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मिडिल ईस्ट का महायुद्ध: ईरान के क्लस्टर बम ने युद्ध का संतुलन बिगाड़ा और दुनिया में आर्थिक मंदी शुरू!Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 मिडिल ईस्ट का महायुद्ध: ईरान के क्लस्टर बम ने युद्ध का संतुलन बिगाड़ा और दुनिया में आर्थिक मंदी शुरू!



 

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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-भारत में गैस के दाम बढ़ते ही विपक्षी दलों की राजनीति : रूस से क्रूड आयल की भारतीय खरीद पर 'अमेरिकी प्रतिबन्ध और छूट' बेमायने, कच्चे तेल की खरीद भारत अपनी नीति से जारी रखे हैl

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दिल्ली, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l अमेरिका ने युद्ध के मामले में ईरान की ताकत को शायद कमतर आंका थाl उसे लगा था कि वह ईरानी धार्मिक नेता व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने के साथ तीन दिन में युद्ध समाप्त कर देगा, लेकिन हुआ इसके उलटl इस युद्ध ने 'महायुद्ध' का रूप ले लिया और अब तो दस दिन में दूसरे धर्मगुरु और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अलीरेज अराफी' के बाद तीसरा नाम 'मोजतबा खामेनेई' का नाम सामने आया जिसे अमेरिका नामंजूर कर रहा हैl उसकी किसी भी मंशा को दरकिनार करते हुए ईरान ने लगातार तबाही मचा रखी हैl बीच में जब ईरान को एहसास हुआ कि उसने युएई समेत एक दर्जन इस्लामिक देशों को अपना दुश्मन बना लिया है तो वहां के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों से माफ़ी मांगकर उनके प्रति अपनी मंशा जाहिर करते हुए यह भी साफ़ किया कि ईरान किसी भी हाल में अमेरिका के सामने घुटने नहीं टेकेगाl हालांकि पड़ोसी देशों से उसका माफ़ीनामा युद्ध के नौवें दिन भी हवाई साबित हुआl इस तरह ईरान अब अकेला हो चुका हैl फ़िर भी उसका दावा है कि वह छह महीने तक युद्ध लड़ने की तैयारी करके बैठा है! दूसरी तरफ  भारत को खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 90 लाख भारतीयों की चिंता प्रमुख हैl खास ये है कि इनमें भी मुस्लिमों की संख्या सर्वाधिक हैl


दिलचस्प यह है कि इस 'महाविनाशक महायुद्ध' में ईरान ने जिस प्रतिबन्धित  हथियार 'क्लस्टर बम' का इस्तेमाल शुरू किया है उससे वह अमेरिका- इजराइल के 'डिफेंस सिस्टम' को चकमा देने में कामयाब हो रहा हैl घातक हथियारों में 'क्लस्टर बम' पर लगी रोक को अमेरिका और इजराइल ने भी नहीं माना थाl यही कारण है कि व्याकुल अमेरिका ने उसके जवाब में 'ग्रेविटी बम' का उपाय निकाला हैl विदित हो कि क्लस्टर बम का प्रयोग दूसरे विश्व युद्ध में किया गया थाl वर्तमान युद्ध में क्लस्टर बम से ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने 'ग्रेविटी बम' को स्मार्ट बनाकर मैदान में उतारा हैl इस युद्ध में खास किस्म के हथियारों का इस्तेमाल ही इसके संभावित तीसरे 'विश्वयुद्ध' की तरफ़ बढ़ने का संकेत माना जा सकता हैl


क्लस्टर बम की खासियत: दुनिया भर के युद्ध विशेषज्ञ 'क्लस्टर बम' से ईरान द्वारा किए जा रहे हमले को लेकर भौंचक हैं कि यह ईरान के पास कहां से आया है? कहीं इसे बनाने वाली सामग्री उसे रूस या चीन ने तो नहीं मुहैया कराई है! क्योंकि इसे बनाने वाली सामग्री दोनों देशों के पास मौजूद मानी जा रही हैl दूसरे विश्वयुद्ध में इसका प्रयोग जर्मनी और सोवियत संघ  ने किया थाl इस बात की भी संभावना ज्यादा है कि इसको ईरान ने खुद विकसित किया होगा! क्योंकि वह दशकों से युद्ध में काम आने वाले हथियारों की नई टेक्नॉलजी पर काम कर रहा थाl क्लस्टर बम की खासियत ये है कि वह आसमान से लक्ष्य तक पहुंचने से पूर्व सैकड़ों बम की संख्या में तब्दील होकर बड़े इलाके में फैल जाता हैl इजराइल का आरोप भी सामने आया कि ईरान ने तेल अबीव शहर में विगत दो मार्च को इस बम का इस्तेमाल किया थाl 


वर्ष 2008 में एक समझौते के तहत दुनिया के लगभग सौ देशों ने यह तय किया था कि कोई भी देश इस घातक 'क्लस्टर बम' को नहीं बनाएगा और न ही बेचेगाl क्योंकि ये बम लक्ष्य तक पहुँचने से कुछ पहले ही सैकड़ों की संख्या में बदलकर बड़े क्षेत्रफल में फैलकर लम्बे समय तक नुकसान पहुंचाता हैl इसे रोकना कठिन भी होता हैl इनमें से कुछ तो हफ़्तों, महीनों बाद जब फटते हैं तो निरीह नागरिकों के लिए जानलेवा साबित होते हैंl अब इसके मुकाबले अमेरिका ने और घातक स्मार्ट 'ग्रेविटी बम' को मैदान में उताराने से पूर्व ईरान को सरेंडर करने की चेतावनी भी दे दी, लेकिन ईरान 'मरने और मारने' यानी बर्बाद होने और करने पर तुला हैl इस तरह मिडिल ईस्ट का यह महायुद्ध नई तकनीक, रणनीति और नये हथियारों के साथ और भीषण होने का संकेत दे रहा है जो दुनिया को आर्थिक मंदी के गर्त में खींच रहा हैl ईरान ने अपने 'जल डमरू' वाले संकरे समुद्री रास्ते को रोक दिया है जो दुनिया में ऊर्जा संकट (एनर्जी क्राइसिस) का बड़ा कारण बना हैl


अमेरिकी रुख में बदलाव के मायने और दुनिया में आर्थिक मन्दी के साथ महंगाई के प्रमुख कारण: दुनिया में कच्चे तेल में अब तक लगभग 32 प्रतिशत की तेजी आने से शेयर के भाव गिरते जा रहे हैं और महंगाई आसमान का रुख करने लगी हैl   हमारे देश में एलपीजी के दाम प्रति सिलेंडर 60 रुपये बढ़ना इसी का संकेत हैl अमेरिका में इसी साल मध्यावधि चुनाव है लिहाजा डोनाल्ड ट्रम्प नहीं चाहेंगे कि वहां महंगाई बढ़े और आर्थिक मन्दी का सामना उनके देश को करना पड़ेl शायद यही कारण हो सकता है भारत को रूस से बम्पर क्रूड आयल खरीद में 30 दिन के लिए प्रतिबन्ध हटानाl दिलचस्प तो ये है कि भारत अपने व्यापारिक समझौते या खरीद फरोख्त अपनी नीतियों पर करता हैl वह तेल हो या गैस आदि ऊर्जा भी अरसे से दुनिया के 40 देशों से करता हैl कोरोनाकाल में भारत रूस से अधिक कच्चे तेल सस्ते दाम पर खरीदकर उसे रिफाइनरी में शोधित करके योरोपीय देशों को बेच रहा थाl जब रूस ने छूट कम की तो भारत ने खरीद भी कम कर दी थीl


भारत के विपक्षी दल कांग्रेस की राजनीति मुस्लिम वोटबैंक पर आधारित: राजनीतिक विश्लेषक एस पाण्डे के मुताबिक अमेरिका, इजराइल का ईरान से संयुक्त युद्ध में भारत की तरफ़ से स्थिति स्पष्ट करने का दबाव तो यही संकेत देता है कि देश के नुकसान के साथ यदि पीएम नरेंद्र मोदी को नुकसान पहुंचे तो भी कांग्रेस को मंजूर हैl देश में जिस तरह ईरान के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं क्या कश्मीर के पहलगाम में मारे गए हिंदुओं के समर्थन और आतंकियों के विरोध में इस प्रकार के प्रदर्शन हुए? वोट की राजनीति राष्ट्र को दांव पर लगाकर नहीं होनी चाहिएl अमेरिका-इजराइल के संयुक्त युद्ध में ईरान अकेला पड़ चुका हैl उसके साथ दुनिया के बाकी 56 इस्लामिक देश भी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं क्यों? यह बड़ा सवाल भारत के विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों के लिए हैl भारत सरकार के लिए ईरान अथवा खाड़ी देशों में रह रहे '90 लाख भारतीयों की सुरक्षा या ईरान' में पहले कौन महत्वपूर्ण है?

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