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भू- माफिया डॉक्टर: झील में अपने ही बहनोई की ज़मीन अजगर बन निगल रहा एक चिकित्सक! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 भू- माफिया डॉक्टर: झील में अपने ही बहनोई की ज़मीन अजगर बन निगल रहा एक चिकित्सक! 



-माफिया का बदलता स्वरूप-


जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l यूं तो शहर के वाजिदपुर तिराहा से लेकर जेसीज चौराहा होते हुए गोमती नदी के तट तक 'ग्रीन लैंड' पार्क, खुला स्थान और नाला के रूप में सारी जमीन सरकारी दस्तावेज में दर्ज हैl इसी कारण इसकी 'नवैयत' बदले बग़ैर भवन बनाने के लिए मास्टर प्लान विभाग से नक्शा नहीं पास हो सकता है लेकिन पुलिस- प्रशासन और करिश्माई लेखपालों ने इसे खेती योग्य बनाकर इसे कथित किसानों के नाम दर्ज कर दी, उसी तरह फर्जी नक्शा भी पास होने लगेl 


अस्सी के दशक में बाईपास रोड ( प्रयाग राज- गोरखपुर फोर लेन) के पश्चिमी छोर से लगभग 10 किलोमीटर दूर दक्षिण में सई नदी किनारे वाले रामदयालगंज इलाके के गांवों से आने वाला 'भैंसा नाला' यहां बनी प्राकृतिक झील में समाहित होता थाl इसके बाद बारिश में झील के ओवरफ्लो होने पर यह पानी गोमती नदी से होकर गंगा बेसिन में मिलता था लेकिन अजगर रूपी भू- माफिया भैंसा नाले को ऊँची इमारतों की नींव में दफनाकर उसके अस्तित्व को समाप्त कर दियेl इसके बाद झील में एक चिकित्सक रूपी एनाकोंडा' ने अपना अड्डा जमा लियाl इसके कुनबे सरीखे अन्य जंतुओं ने भी 'व्यावसायिक कांपलेक्स' बना लिए।






दरअसल बात हो रही है भू - माफिया बने एक डॉक्टर की जो पिछले एक साल से अपने सगे छोटे बहनोई की लगभग सात विस्वा बैनामा वाली जमीन को अजगर सरीखे निगल रहा हैl अपना हक जमाने के लिए वह बहनोई पर अस्पताल से लाखों रकम चोरी करने की तोहमत भी कथित समाज में लगाता फिरता हैl उधर पुलिस - प्रशासन को नोटों की गड्डी में तौलकर जमीन पर पिलर खड़ा कर लियाl उसके दुर्भाग्य से भांजा अनुराग हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में अधिवक्ता बन गयाl उसके ही प्रयास के बाद उस पिलर पर छत नहीं पड़ सकीl इधर बीच हफ़्ते भर में उसने तबादला होकर आये पुलिस- प्रशासन के नये अफसरों को पुराने तरीके से अपने शीशे में उतार लिया और फ़िर छत ढालने के फेर में पड़ गया। इधर शांत बैठा अधिवक्ता भांजा अनुराग फ़िर सक्रिय हुआl अबकी बार उसने 'भू माफिया मामा' के अवैध कब्जों वाली किताब खोलनी शुरू कर दी है, जिसका तफ़्सील से जिक्र स्टोरी की अगली कड़ियों में मिलता रहेगाl 


हैरतअंगेज:-नर्सिंग कॉलेज हरिबंधनपुर में है लेकिन लाइसेंस और भवन हुसेनाबाद का है। जौनपुर मुख्यालय के शहरी इलाके में जमीनों का 'खेल' दशकों से शतरंज और कैरम को भी मात दे रहा है। बानगी के तौर पर स्टोरी के साथ डीएम को दिये पत्र और तस्वीरें इस खेल की गवाही दे रही हैं। झील में जिस नर्सिंग स्कूल कॉलेज का संचालन हो रहा है वह हरिबंधनपुर इलाका में है, जबकि स्कूल कॉलेज की जमीन,भवन और लाइसेंस सब कुछ सरकारी दस्तावेज के तहत हुसेनाबाद में दर्ज है।,,,,, क्रमशः

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