नशे का धंधा: कोडीन कफ़ सिरप के सिंडिकेट का दुबई कनेक्शन!
----------------------------------------
कैलाश सिंह-
विशेष संवाददाता
----------------------------------------
-जहां प्रतिबंधित है शराब, वहां कोडीन कफ़ सिरप की खपत है बेशुमार, दवा के नाम पर फर्जी कागजात पासपोर्ट सरीखे नज़र आते हैं, जो खाड़ी देशों तक भेजने का रास्ता बनाते हैं निर्बाधl
-जांच एजेंसियों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मैदान में उतरा, एसटीएफ, एसआईटी ने यूपी के खाद्य सुरक्षा एव्ं औषधि प्रशासन द्वारा उपलब्ध व्यौरे से कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट की कड़ियों को जोड़ रहाl
----------------------------------------
लखनऊ/वाराणसी/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l पांच साल पूर्व जब कोरोना काल में कुछ दिनों तक 'शराब' प्रतिबंधित रहा तब नशेड़ियों ने कोडीन युक्त कफ़ सिरप की विभिन्न वेरायटी का विकल्प मानकर दुरूपयोग शुरू कर दिया था, जब शराब की दुकानें खुल गईं तब तक नये नशेड़ियों में 'कोडीन कफ़ सिरप' ने अपना विस्तार कर लिया थाl इसके बाद दवा विक्रेताओं ने आपूर्ति बढ़ा दी तो इस धंधे के जगलरों ने सिंडिकेट खड़े कर लिएl जौनपुर के दवा जगलर (दवा संगठनों से जुड़ा पदाधिकारी) ने वाराणसी के जगलरों को जोड़कर इस धार्मिक नगरी को मुख्य अड्डा बना दियाl
इसके बाद धंधे में सफ़ेदपोशों की संख्या बढ़ने लगी और कारोबार का विस्तार पूर्वांचल से पूर्वोत्तर राज्यों तक होने लगाl जब इसकी खेप पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के हाथ लगी तो कोडीन कफ़ सिरप के लिए अंतरराष्ट्रीय मार्ग भी प्रशस्त होने लगे और फ़िर इसकी खेप दुबई का रास्ता नापने लगीl इस तरह दवा के नाम पर यह नशा अरब और खाड़ी देशों में लोगों की पहली पसन्द बन गयाl इस मामले केवल जौनपुर में एक दर्जन से अधिक लोगों और फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है, जबकि तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका हैl इनमें सबसे गिरफ्तार पहले अमित सिंह टाटा ने सिंडिकेट से जुड़े सदस्यों के राज उगलेl फ़िर कोलकाता से शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल की गिरफ्तारी हुई और अब एसटीएफ का बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह भी गिरफ़्त में आ गयाl
दरअसल कोडीन कफ़ सिरप की बढ़ती मांग और फैलते दायरे को देखकर एक खास विदेशी दवा कम्पनी इस धंधे में कूद पड़ी और उसने अपने अन्य उत्पाद को कम करके कफ़ सिरप का प्रोडक्शन बढ़ा दियाl इधर सिंडिकेट में सदस्यों की बढ़ती संख्या और धडा़धड़ फर्जी दवा एजेंसियां खुलने लगींl डिमांड और सप्लाई की फर्जी बिलिंग का कार्य वाराणसी के गोपनीय अड्डों से होने लगीl आमजन की नज़र में अब सवाल ये उठता है कि फर्जी फर्मों के बढ़ते पंजीकरण पर प्रदेश का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन क्या सोया पड़ा था? उसने डिमांड और सप्लाई के कागजात व धरताल पर हो रही खपत को क्यों नहीं जांचा- परखा? दरअसल होता यह रहा कि प्रतिबन्धित और नकली दवाओं की बिक्री पर भी विभाग आँख मूंदे रहा, क्योंकि बदले में उसे 'मोटा कट' जो मिलता रहाl यही कारण है कि प्रदेश भर में 'आक्सीटोसिन इंजेक्शन' दशकों से बेहिसाब बिकता रहा हैl इसका दुरूपयोग दुधारू पशुओं खासकर गायों और भैंसों के अलावा सब्जियों में लौकी आदि पर किया जाने लगाl रात में इस दवा को लौकी की बतिया में इंजेक्ट करने पर वह सुबह तक एक हाथ लम्बी मोटे छिलके में तब्दील होती रहीl इसी तरह पशुओं को चारा कम देने और इंजेक्शन लगाने पर दूध दोगुना मिलने लगाl इस दूध और लौकी का असर इंसानी बच्चों में अधिक दिखने लगाl उसी तरह मध्य प्रदेश में कोडीन युक्त सिरप मासूमों के लिए काल बन गया था, लेकिन एडल्ट नशेड़ियों की मस्ती की चाहत ने सिंडिकेट का धंधा अकेले यूपी में दो हज़ार करोड़ से अधिक कर दियाl ये आंकड़े जांच एजेंसियों के हैंl सूत्रों की मानें तो हर परत खुलने के साथ जांच एजेंसियों की आँखें हैरत में फट रही हैंl
बानगी जौनपुर की: पांच साल पूर्व तक जो फटेहाल थे वह आज लाखों, करोड़ों में खेल रहे हैं, जो ड्रग माफिया डीलरशिप के नाम पर कर्ज में डूबे थे वह आज आलीशान कोठयों और कारों की हर नई सीरीज के मालिक हैंl इनमें कई तो भू- माफिया हैंl आज दवा की थोक दुकानों पर फुटकर बिक्री ही नहीं, अवैध क्लिनिक भी चल रही हैंl दवा का एक बड़ा ड्रग डीलर तो अरसे से कोडीन कफ़ सिरप के धंधे में समाया हैl वह हर शीशी पर एक रुपया 'कट' लेता रहा है, क्योंकि वह ड्रग संगठनों में से एक का पदाधिकारी हैl प्रतिबन्धित दवा बेचने वालों से वह सालाना लाखों वसूलता हैl बदले में उनका बचाव, पक्ष में आंदोलन का झंडा भी उठाता हैl लूट की रकम बांटने में कोई नहीं झगड़ता हैl,,,,,, क्रमशः





