राम जानकी मन्दिर जौनपुर: भू माफिया के सामने पहाड़ सरीखे खड़े हुए इंद्रभान सिंह इंदु!
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कैलाश सिंह-
विशेष संवाददाता
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-जौनपुर में शाही पुल के पश्चिमी- दक्षिणी छोर पर स्थित 1853 में स्थापित राम जानकी मन्दिर के अधीन 16 कुटी हैंl कुल मिलाकर अरबों की भूमि पर गिद्ध नज़र टिकाए जमीन के सौदागरों की नीयत डोल रही,उनकी राह में पुजारी बने हैं रोड़ रोड़ाl
-मन्दिर के पुजारी राम प्रीत मिश्र की हालत उन ऋषियों की तरह हो गई जिनकी तपस्या व यज्ञ में खलल पैदा करते थे राक्षस, यहां राम की सेवा में लगे पंडित को भू माफिया दे रहे धमकी और मन्दिर परिसर को जानवरों की हड्डी फेंककर कर रहे अपवित्रl
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लखनऊ/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l ऐतिहासिक विरासत समेटे जौनपुर को लगभग पांच सौ साल पूर्व मुगल शासनकाल में 'शिराज- ए- हिंद' का खिताब तब मिला जब यह हिंदुस्तान की शैक्षणिक राजधानी हुआ करता थाl यहां उर्दू, फारसी आदि पढ़ने के लिए देसी-विदेशी छात्र आया करते थेl एक तरफ़ मुगलकाल के अवसान और ब्रिटिश हुकूमत के क्रूरतम शासन का विरोध करने वाले आज़ादी के दीवाने सिर पर कफ़न बांधकर बिगुल बजा रहे थे, वहीं धर्म अध्यात्म का दीप रोशन रखने वाले देवालयों की आधार शिला के लिए अपनी संपत्ति दान करने को आतुर थेl उन्हीं में शुमार थे 'रवि स्टूडियो' के संचालकl उनकी ही दान की गई जमीन पर गोमती नदी किनारे शाही पुल के पश्चिमी- दक्षिणी छोर पर 'श्री राम जानकी मन्दिर का निर्माण आज से पौने दो सौ साल पूर्व यानी वर्ष 1853 में हुआ थाl
दरअसल राम जानकी मन्दिर के अधीन जौनपुर के कई मन्दिरों, कुटी के अलावा चित्रकूट समेत कुल 16 यानी लगभग डेढ़ दर्जन कुटी (मठ) हैं, जिनकी जमीनें बेसकीमती हो गईं हैं, इसके चलते भू माफिया की बाज़ नज़र लगी हैl जौनपुर शहर में ही एक व्यक्ति खुद को 'स्वघोषित' महंत प्रचारित करके करीब तीन दर्जन दुकानों से पैसा उगाहने में लगा हैl उसके गिरोह से जुड़कर भू माफिया मन्दिर से जुड़ी जमीनों को हड़पने की फिराक में हैंl उन्हें मोटी रकम के बल पर जिला प्रशासन का भी सहयोग मिलता हैl इसका जीता- जागता प्रमाण तो मन्दिर परिसर से सटा वह 'बाउंड्री युक्त हाता' है जिसपर एक भू माफिया ने दावा ठोंका हैl
संदिग्ध है प्रशासनिक कार्यशैली: जिला प्रशासन की कार्यशैली दशकों से संदिग्ध हैl बीच के वर्ष 2022 में तत्कालीन डीएम मनीष वर्मा ने भू- माफिया और मास्टर प्लान पर एक साथ लगाम लगाई थीl उन्होंने चाँदमारी, वाजिदपुर, शास्त्रीनगर, जोगियापुर, जेसीज चौराहा से ओलंदगंज, राजा का पोखरा समेत तमाम इलाकों के करीब दो हज़ार उन लोगों को नोटिस जारी कराया जिनके भवन फर्जी या बग़ैर नक्शा पास हुए बने थेl ऐसी जमीनों पर वैध नक्शा तभी पास हो सकता है जब उनकी 'नवैयत' भवन बनाने के काबिल हो, यानी ये सभी जमीनें खुला मैदान, ग्रीन लैंड, चारागाह आदि नामों से दर्ज हैंl इस तरह अपनी खरीदी जमीन पर भवन बनाने वाले भी 'भू- माफिया' की लिस्ट में शुमार हैंl जब कोई नया अफ़सर आता है तब खुद का बजट सुधारने के लिए दो- चार को नोटिस जारी करके पांच- दस लाख का इंतजाम कर लेता हैl
गोमती नदी के दायरे में इसी हफ़्ते एक भू- माफिया ने ढाल दी छत: गूलर घाट स्थित राम जानकी मन्दिर के हाते से सटी जमीन पर एक भू- माफिया ने प्रथम तल पर इसी हफ़्ते छत ढाल दीl जबकि ग्राउंड फ्लोर पिछले वर्षों में बनाकर उसमें 'अवैध पानी प्लांट' (आर ओ प्लांट)भी चला रहा हैl वह कहता भी है कि पुलिस- प्रशासन की जेब गरम करके गलत कार्य को सही तरीके से करना आसान हैl इस मामले में 'तहलका संवाद' के रिपोर्टर ने सिटी मजिस्ट्रेट को अवैध भवन निर्माण की जानकारी देते हुए नदी के 'मानक' पर सवाल भी किया तब मजिस्ट्रेट ने बताया था कि नदी किनारे से 100 मीटर की दूरी तक कोई भी निर्माण अवैध मान्य होगाl जबकि यह भवन उसी मानक के दायरे में हैl उसने छत ढलाई के बाद मन्दिर कैंपस में बकरे और चिकन की हड्डी के साथ दारू की बोतल व अन्य कचरे फेंके और पुजारी को धमकायाl पुजारी ने थाना कोतवाली में लिखित शिकायत भी दर्ज करने को दी हैl
ये है मन्दिर के महंतों की लिस्ट: मन्दिर के पुजारी राम प्रीत मिश्र के मुताबिक वह केवल पुजारी यानी राम के सेवक हैंl इसके पहले महंत श्री गंगा दास रहे, उन्हें अयोध्या के महंतों ने यहां का महंत नियुक्त किया थाl इसके बाद यह क्रम द्वारिका दास, जमुना दास, जनार्दन दास और छठवें महंत केशव दास ने सतीश दास को महंत बनाया जो वर्तमान में चित्रकूट के मठ- मन्दिर पर रहते हुए संचालन कर रहे हैंl
अब यहां बनेगा खाटू- श्याम का भव्य मन्दिर: जब उद्योग व्यापार मण्डल के प्रांतीय नेता इंद्रभान सिंह इंदु ने सुरक्षा की कमान संभाली तो व्यापार संगठन के लोगों ने राम जानकी मन्दिर के हाते में खाटू- श्याम का मन्दिर बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसपर सबकी सहमति बन गईl जिले के लिए यह मन्दिर 'खाटू श्याम' के रूप में पहला होगाl इससे पूर्व मन्दिर को बचाने की गुहार जब पुजारी राम प्रीत मिश्र ने इंद्रभान सिंह इंदु से लगाई तो उस दौरान वह वाराणसी के अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा रहे थेl फ़िर भी उन्होंने अपने संगठन के सदस्यों के जरिए स्थिति सम्भाली, लेकिन मन्दिर से सटी जमीन पर अवैध निर्माण को वह नहीं रोक सकेl उन्हें हैरत है कि इसका नक्शा कैसे पास हुआ? या फ़िर बग़ैर नक्शे के यह भवन बन गया!,,,,,,,, क्रमशः
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