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नशे का धंधा: 'जौनपुर का मुल्ला टोला टू बांग्लादेश' यहां घुसपैठिए बने हैं तस्करी के स्लीपरसेल! Tahalka Samvad

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 नशे का धंधा: 'जौनपुर का मुल्ला टोला टू बांग्लादेश' यहां घुसपैठिए बने हैं तस्करी के स्लीपरसेल! 

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कैलाश सिंह/संतोष कुमार सिंह

विशेष संवाददाता/चीफ रिपोर्टर

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लखनऊ/वाराणसी/जौनपुर,(तहलका न्यूज नेटवर्क)l कोडीन कफ़ सिरप की तस्करी तो वर्तमान दशक में खासकर कोरोनाकाल से शुरू हुई लेकिन इसके नशेड़ी पूर्वांचल में एक दशक पूर्व से मौजूद हैंl इस रिपोर्ट में बानगी जौनपुर के मुल्ला टोला की दी जा रही है, जहां बांग्लादेशी घुसपैठियों का सीधा कनेक्शन रहा है, लेकिन इसी तर्ज पर वाराणसी समेत पूर्वांचल ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के कुछ खास इलाकों में भी 'फैंसाडील' उन दुकानों से निर्धारित ग्राहकों को दी जाती थी जो अंग्रेजी दारू (शराब) खरीदकर पीने में आर्थिक- सामाजिक रूप से अक्षम होते हैंl  ऐसे नशेड़ियों को जब बांग्लादेशी घुसपैठियों का साथ मिलने लगा तब थोक व फुटकर दवा विक्रेताओं की नज़र इनपर गईl यह जानकारी जब दवा संगठनों के मठाधीशों को हुई तो उन्होंने फैंसाडील की आपूर्ति बढ़ा दी, जब इसपर रोक लगी तब उन्होंने अन्य ब्रांड वाले 'कोडीन कफ़ सिरप' की सप्लाई शुरू करके अपना 'प्रति शीशी एक रुपये का कट' लेना जारी रखाl 



जौनपुर के पान दरीबा में है मुल्ला टोला: शहर के पान दरीबा मोहल्ले में है वह मुल्ला टोला जहां बांग्लादेशी घुसपैठियों का जमावड़ा बढ़ता देख वहां एक कमरे वाले मकान को 'पब सेंटर' सरीखा बना दिया गयाl यहां 130 रुपये वाली कोडीन कफ़ सिरप (100 ml) का दो पैग डेढ़ सौ रुपये में परोसा जाने लगाl लोकल नशेड़ियों ने तो अपने लिए फुटकर दुकानें सेट कर रखी थींl उन्हें देखते ही दुकानदार शीशी पकड़ाकर पैसे ले लेता थाl सूत्र बताते हैं कि एक माह से खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की छापेमारी से ऐसे सिरप ब्लैक में छिपकर बेचे जाते हैंl एक नशेड़ी दूसरे को उसी तरह संकेत से बताता है जैसे 'जौनपुरी दोहरे' के एडिक्ट करते हैंl 


सात साल पूर्व इस दवा माफिया के यहां पकड़ी गई थी लाखों की फैन्साडील : वर्ष 2020 के दशक यानी अब से सात साल पूर्व उस दवा माफिया के पास से लाखों की फैन्साडील पकड़ी गई थी जिसके खिलाफ इस बार भी औषधि प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराई हैl खबर के साथ दी जाने वाली लिस्ट में उसका भी नाम हैl उसे बचाने वाला दवा माफिया ड्रग संगठन का जिला व प्रदेश का पदाधिकारी हैl उसको हाल ही में एक फॉर्च्युनर कार उसी दवा माफिया ने गिफ्ट की है, जिसकी चर्चा शहर में पंख लगाकर उड़ रही हैl


सिंडिकेट में ऐसे शामिल हुए छोटे माफिया: बड़े माफिया जब मैदान में उतरे तो छोटे माफिया के धंधे की 'वाट' लग गईl उन्होंने इसकी तस्करी को पूर्वांचल से उठाकर अंतरराज्यीय यानी बिहार, झारखंड, एमपी, असम और पश्चिम बंगाल तक पहुंचा दियाl इसके बाद बढ़ती डिमांड देख सिंडिकेट ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी का रास्ता वाया नेपाल से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अरब व खाडी़ देशों तक बना दियाl सिंडिकेट से जुड़े तस्करों ने फर्जी बिलिंग व फेक फर्मों का मुख्य केन्द्र वाराणसी को ही बनाए रखाl स्थिति बदलने पर छोटे दवा माफिया, जिन्हें कोडीन कफ़ सिरप के ही धंधे से मतलब था वह सिंडिकेट का हिस्सा बन गएl उदाहरण के तौर पर हर एक फर्म के नाम पर एक हजार शीशी कोडीन कफ़ सिरप की बिलिंग पर फर्म के मालिकों को बग़ैर हर्रे फिटकरी लगे आठ हजार रुपये मिलने लगेl बाकी बल्क में आने वाले माल को अरब कंट्री तक भेजने के सारे खर्च का हिसाब- किताब दुबई से होने लगाl,,,,, क्रमशः

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