नशे का कारोबार: कोडीन युक्त कफ़ सिरप सिंडिकेट का सरगना शुभम दुबई के अपने अड्डे पर छिपा!
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कैलाश सिंह-
विशेष संवाददाता
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-तीन माह बाद पुलिस की गिरफ्त में आये 50-50 हज़ार के इनामी विकास सिंह नरवे, आकाश पाठक व अंकित श्रीवास्तव, कोडीन युक्त कफ़ सिरप सिंडिकेट की इस तिकड़ी के दो आरोपी अंकित व विकास जौनपुर में रहते हुए आईपीएल स्ट्टेबाज़ी में भी मशगूल थेl
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वाराणसी/ जौनपुर/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l यदि बीते साल अक्टूबर 2025 में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त रोशन जैकब ने दवा एजेंसियों के खिलाफ शिकायत और शक के आधार पर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ जांच अभियान न छेड़ा होता तो लाखों से शुरू होकर करोड़ों तक पहुंचा नशे का यह कारोबार अब तक अरबों के टर्नओवर वाला हो गया होताl फ़िर दवा में इस्तेमाल होने वाले कोडीन युक्त कफ़ सिरप 'दारू वाले ब्रांड' में शुमार हो जातेl फ़िर भी इस धंधे का सरगना वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल अपने धंधे के संचालन को मुख्यालय (हेड ऑफिस) दुबई के जिस होटल में शिफ्ट कर लिया था, उसका वह खुद मालिक भी बताया जाता हैl वह तो जांच एजेंसियों के पहुँचने से पूर्व भारत से निकल गया, लेकिन अपने राजनीतिक संरक्षण देने वाले आका से बचाव की गफलत में उसका कुनबा फंस गया, अन्यथा अपने परिजनों के साथ खास गुर्गों को भी वह दुबई में शिफ़्ट करा लिया होताl उसका धंधा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका थाl हालांकि वाराणसी पुलिस और ईडी ने उसकी संपत्ति जब्ती के साथ उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कर चुकी हैl
वाराणसी से हमारे पूर्वांचल के चीफ रिपोर्टर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक-गिरफ्तार हुए शुभम जायसवाल के गुर्गों में आजमगढ़ का विकास सिंह 'नरवे' गांव का निवासी हैl उसकी टाइटिल के साथ गांव का नाम 'नरवे' भी जुड़ गयाl उसकी 'देवनाथ फार्मेसी' से शुभम जायसवाल की फर्म 'शैली ट्रेडर्स' को पांच लाख से अधिक कोडीन युक्त कफ़ सिरप की शीशी बेची गई थीl विकास इस तस्करी में सारा हिसाब रखने लगा थाl क्योंकि वह शुभम का भरोसे वाला गुर्गा बन गया थाl विकास का जोड़ीदार वाराणसी के मैदागिन गोलघर निवासी आकाश पाठक भी शुभम के लिए खास दर्जा हासिल कर चुका थाl इसने भी अपनी फेक फर्म 'लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड' बनाई थीl इसके जरिये लाखों शीशी कोडीन वाली कफ़ सिरप खपाई गई थीl तीनों पर पुलिस ने 50-50 हजार का ईनाम रखा था जिनकी नेपाल बार्डर से गिरफ्तारी दिखाई गईl
तहलका संवाद के कंसल्टेंट एडिटर के एन सिंह के अनुसार-
विकास सिंह नरवे का साथी जौनपुर शहर कोतवाली क्षेत्र का निवासी अंकित श्रीवास्तव हैl कफ़ सिरप के धंधे में उतरने से पूर्व वह आईपीएल क्रिकेट मैचों का सट्टेबाज़ थाl उसका भी अपना गैंग थाl लेकिन यह गैंग हमेशा हार- जीत के भंवर फंसे होने से दाने- दाने को मोहताज रहता थाl कफ़ सिरप सिंडिकेट में शामिल होते ही विकास की तरह इसकी भी लाइफ स्टाइल बदल गईl सट्टेबाज़ी में वह चार्जशीटर भी हैl उसके समेत आधा दर्जन से अधिक मुकदमा संख्या 106/23 धारा 465/468 आईपीसी 13 जी एक्ट 66 डी आईटी एक्ट जौनपुर शहर कोतवाली में दर्ज हैl विवेचना थाना लाइन बाजार पुलिस ने करके चार्जशीट सिविल कोर्ट में पेश कर दीl
सवाल यह उठता है कि जिलों का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यदि सभी दवाओं की 'डिमांड और सप्लाई' पर नज़र रखता रहा होता तो नशे के लिए कोडीन युक्त कफ़ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी नहीं हुई होती? प्रतिबन्धित दवाओं की बिक्री करने वाली दवा की थोक व फुटकर एजेंसियों से हर माह अवैध वसूली इस घपले के खुलासे से पूर्व तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में होती रही है जिसकी बानगी जौनपुर में हैl इस जिले में वर्तमान औषधि निरीक्षक ने पिछले साल के अंत में चार्ज लेने के बाद अवैध बिक्री व वसूली पर अंकुश लगाना शुरू किया तो ड्रग के धंधे से जुड़े लोगों में खलबली मची थीl इस बीच अक्टूबर 2025 में तो प्रदेश के अन्य जिलों की तरह यहां भी एक दर्जन से अधिक 'दवा एजेंसियों' और उनके मालिकों' के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुईl
वर्ष 2019-20 में कोरोना काल में एक दवा एजेंसी संचालक के यहां से लाखों शीशी कोडीन युक्त 'फैन्साडील' ब्रांड का कफ़ सिरप पकड़ा गया था, लेकिन तत्कालीन प्रशासनिक अफसरों और औषधि निरीक्षक ने ले- देकर मामले को रफा-दफ़ा कर दिया थाl इसमें अहम भूमिका ड्रग एसोसियेशन के उस पदाधिकारी की थी जो आज भी जिला व प्रदेश कमेटी में पदासीन हैl वह कई एजेंसियों से कोडीन युक्त कफ़ सिरप की प्रति शीशी पर एक रुपये 'कट' लेता हैl यह जौनपुर जिले का बड़ा भू- माफिया भी हैl साथ में वह दागी दवा एजेंसी आज भी संचालित हैl उसपर जांच का फन्दा नहीं पड़ा! जबकि एजेंसी संचालक और एसोसियेशन का पदाधिकारी वाराणसी से बिलिंग के जरिये दशकों से बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक कोडीन युक्त कफ़ सिरप की सप्लाई बग़ैर शोर शराबे के करते रहेl क्रमशः

