ट्रेड डील: अमेरिका ने टैरिफ घटाया फिर भी भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-'भारत -अमेरिका' में व्यापारिक समझौते का पिटारा खुला नहीं, विपक्ष के पेट में दर्द बढ़ गया! कांग्रेस व विपक्ष 'नरेंदर सरेंडर' का नेरेटिव बनाने में जुटा, उसे यह नहीं सूझ रहा कि अमेरिका ने 50 से घटाकर 18 फीसदी टैरिफ क्यों किया?
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नई दिल्ली, (तहलका संवाद)l भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए समझौते ने अमेरिका को झुकने के लिए विवश कर दियाl यूरोपियन यूनियन ने इसे 'मदर ऑफ आल डील्स' का नाम दियाl इस बीच अमेरिका में महंगाई चांद को छूने की तरफ अग्रसर हुई तो डोनाल्ड ट्रम्प पर अपने देश की पब्लिक का दबाव बढ़ने लगाl उन्हें लगा कि टैरिफ वॉर से दबाव में आने की बजाय रूस और चीन की तरफ़ भारत के झुकाव का मतलब हमारे हाथ से दुनिया का एक बड़ा 'भारतीय बाज़ार' निकल जाएगाl डोनाल्ड ट्रम्प ने फौरन भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दियाl इस दौरान दोनों देशों में 'ट्रेड डील' पर सहमति बन गईl राजनीतिकरण विश्लेषक मानते हैं कि जब भी किन्हीं दो देशों में समझौता होता है तो दोनों को झुकना पड़ता है फ़िर भी वे अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हैंl
राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडेय' का कहना है कि भारत- अमेरिका के बीच हुई डील डील में दोनों देशों ने अपने राष्ट्रीय हित को सामने रखकर किया हैl इसमें जब अमेरिका के टैरिफ का दबाव फेल हुआ और वहां बढ़ती महंगाई से पब्लिक का दबाव बढ़ने के साथ यूरोपियन यूनियन ने भारत से व्यापारिक समझौते कर लिए तब डोनाल्ड ट्रम्प विचलित होने लगेl वह भारत को अपने से दूर करके दुनिया का एक बड़ा बाजार नहीं खोना चाहते थेl रहा सवाल भारत का रूस से तेल खरीद का तो वह बदस्तूर हैl इतना जरूर है कि रूस की दो कम्पनियों पर अमेरिकी प्रतिबन्ध के चलते तेल खरीद वहीं की दूसरी कम्पनियों से भारत कर रहा है लेकिन उसकी मात्रा घट गई हैl वैसे भी भारत दुनिया के 41 देशों से तेल खरीद करता हैl उसे जहां भी सस्ता मिलता है उससे ट्रेड करता हैl कोरोना काल के पूर्व से ही भारत रूस से कच्चे तेल (क्रूड आयल) खरीदकर उसे रिफाइंड करके यूरोपियन देशों में बेचकर मुनाफा भी कमा चुका हैl यह नज़ीर दुनिया के सामने पहले से मौजूद हैl
डेयरी, फिशरीज व एग्रीकल्चर की भारतीय रेड लाइन: भारत- अमेरिका के बीच हुई डील का व्योरा जब आमजन के सामने आएगा तब दूध प्रोडक्ट, मछली और मछुआरों के हित के साथ कृषि उत्पाद में किसानों के हित पर ध्यान देने योग्य स्थिति आयेगी कि हमारी सरकार ने खुद की खींची रेड लाइन में कहां समझौता किया हैl क्योंकि हमारा देश इन उत्पादों में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि निर्यात की ताकत रखता हैl उदाहरण के तौर पर यदि भारत कृषि उत्पादों में मक्का का आयात करता है तो उसे खाने में नहीं, बल्कि इंडस्ट्री उपयोग यानी उससे 'एथेनाल' बना सकता हैl रक्षा उपकरणों में भी हमारा देश तेजी से निर्यात करने की तरफ बढ़ रहा हैl देश के विपक्ष को 'ट्रेड डील' का पूरा मसौदा जानने के बाद ही सरकार या पीएम मोदी पर हमलावर होना चाहिएl रहा सवाल भारत के 'झुकने' के नाम पर विमर्श (नेरेटिव) खड़ा करने का तो उसे देश के भीतर के मुद्दों पर आना चाहिएl राष्ट्रीय हित की जिम्मेदारी को दांव पर लगाना कहीं से उचित नहीं हैl
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