पश्चिम बंगाल अलग देश होने से बच गया! टीएमसी का रोजगार था 'टोल प्लाजा और गो तस्करी!
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कैलाश सिंह-
संपादक- तहलका संवाद
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ममता बनर्जी से जनमानस के चुभते सवाल:- बांग्लादेश की सीमा पर बाड़बन्दी के लिए ममता सरकार ने क्यों जमीन नहीं दी? सीपीएम से लेकर टीएमसी सरकारों के समय में लगभग छह हजार कम्पनियाँ क्यों भागीं? लाखों की संख्या में घुसपैठियों, रोहिंग्या को क्यों शरण दी गई? एनआरसी, सीएए समेत केंद्रीय कल्याणकारी योजनाएं लागू करने में क्या परेशानी थी? केंद्रीय एजेंसियों की जांच और एसआईआर में लगे न्यायिक अफसरों को घंटों बंधक बनाने के उद्देश्य क्या थे? 'हेलमेट का विकल्प जालीदार टोपी' कैसे?ऐसे छोटे- बड़े सवालों पर नज़र डालेंगे तो झड़ी लग जाएगी. पहले इसी का विश्लेषण करते हैं.
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लखनऊ/कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l पचास साल मानिये या देश की आजादी से 79 वर्ष, लेकिन यह सच है कि जनसंघ अथवा भाजपा पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्तासीन हुई हैl यह संभव हुआ है 'हिंदुत्व और सनातन की चेतना के पुनर्जागरण के बादl इसकी नींव तब पड़ी जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं ने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार का सख्त प्रतिरोध किया थाl यही वह समय था जब 'गोरक्ष पीठाधीश्वर, यूपी के सीएम और सनातन के अग्रणी प्रहरी योगी आदित्यनाथ ने एक सभा में नारा दिया- 'बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ और नेक रहोगेl' यह नारा भारत के हर राज्य में मन्त्र सरीखे काम करने लगा हैl इसका असर पश्चिम बंगाल में ज्यादा इसलिए हुआ क्योंकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की सरकार वह सभी कार्य करती रही जो बांग्लादेश, पाकिस्तान समेत कई इस्लामिक देशों में हो रहा हैl यहां हिन्दू दोयम दर्जे का बनकर रह गया थाl यहां डेमोग्रेफ़ी बदलने की हर मुमकिन कोशिश इस बात का संकेत देती रही है कि इस प्रांत को अलग देश बनाने की कोशिश तेजी पकड़ चुकी थीl पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री स्वामी चिन्मयानंद कहते हैं कि इसमें अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों के षड्यंत्र से भी इनकार नहीं किया जा सकता हैl
ध्वस्त हो गया ममता बनर्जी का रोजगार मॉडल: दरअसल पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही टीएमसी के बन्द हुए अवैध टोल प्लाजा, ड्रग व गो तस्करी का बाधित होना, हेलमेट का विकल्प मुस्लिमों के लिए जालीदार टोपी को बनाया जाना और शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनते ही हेलमेट खरीदने वालों की लम्बी कतारें उसकी कमी की गवाही दे रही हैंl टीएमसी के टोल प्लाजा पर हर वाहन से वसूली की रकम उसके चक्के यानी माल वाहन ट्रक आदि से उसके चक्के (ह्वील) पर निर्धारित होती थीl शुभेंदु की सरकार बनते ही ये टोल बन्द हो गए, उसके कर्मचारी भी लापता हो गएl इसी तरह गो तस्करी पर भी अचानक ब्रेक लग गया जिससे हर दिन करोड़ों की अवैध वसूली प्रभावित हो गईl इस सिंडिकेट में शामिल नौकरशाह भी थोक के भाव हटाए जाने लगे तो यह चेन भी टूटने लगीl यहां गत कई वर्षों से नारे लगते थे कि बांग्लादेश से जोड़कर पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करके जो नया देश बनेगा उसकी पीएम ममता बनर्जी होंगीं! बांग्लादेश में मो. युनुस की अंतरिम सरकार के रहते अमेरिकी डीप इस्टेट और सीआईए की सक्रियता (ऑपरेशन) का पता इस बात से भी चलता है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को बधाई देनाl क्योंकि इससे पूर्व भाजपा की हरियाणा, महाराष्ट्र, उडीसा और बिहार में भी भाजपा की सरकार बनी तब तो बधाई नहीं मिली थीl
अखिलेश यादव ने अभिषेक बनर्जी की की कम्पनी आई पैक से क्यों पल्ला झाड़ा? यह सवाल भी 'यूपी मिशन 27' के मद्देनजर प्रबुध्द वर्ग के जेहन को झकझोर रहा हैl चुनावी सर्वेक्षण या पैसे लेकर चुनावी रणनीति बनाने वाली यह कम्पनी या संस्था प्रशांत किशोर ने शुरू की थी लेकिन बिहार चुनाव में खुद की पार्टी बनाकर मैदान में उतरने से पूर्व उन्होंने आई पैक को छोड़ दिया थाl यह संस्था ममता बनर्जी की पार्टी के लिए 'काले धन को सफेद करने की चेन थी' ऐसा तब साबित होगा जब इसकी जांच पूरी होगीl इसी कम्पनी की जांच करने पहुंची ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम से फाइल छीनकर ममता बनर्जी बनर्जी ने संविधान और कानून का तमाशा बनाया थाl इस प्रकार हर अवैध धंधे के सम्राज्य का संचालन उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी करते थेl उसी संस्था को चुनावी संचालन का ठेका देने वाले यूपी के सपा सुप्रीमो पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने यह कहकर कांट्रैक्ट तोड़कर दिया कि मेरी पार्टी के पास उतने पैसे नहीं हैं जितनी इस कम्पनी की डिमांड हैl क्या ठेका देते समय रकम की बात नहीं हुई थी या तब उनके पास पैसा था? उनका यह बचकाना बयान उसी तरह आमजन के गले नहीं उतर रहा है जैसे उनका पश्चिम बंगाल जाकर ममता बनर्जी के हारने पर उनसे मिलना थाl हर जुबां पर यही सवाल है कि यहां सपा का क्या जनाधार है? या टीएमसी से क्या समझौता है? अलबत्ता खुद ममता बनर्जी अब उसी इंडी गठबंधन और सीपीएम से 'वोट चोरी' का कथित मुद्दा लेकर मिलने को आतुर हैं जिससे वह अब तक दूरी बनाए रखती थींl आई पैक की जांच शुरू होने से अखिलेश यादव ही नहीं डरे हैं बल्कि अन्य राजनीतिक दलों को भी पसीने आ रहे हैंl रहा सवाल ममता बनर्जी के दो अद्भुत मॉडल- कार्यकर्ताओं के रोजगार और प्रदेश के इस्लामीकरण का तो वह शुभेंदु की सरकार बनते ही ध्वस्त हो गया जिसका संचालन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी करते थेl
अब ममता बनर्जी के एकला चलो के नारे का क्या होगा: वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व बने इंडी गठबंधन का सुप्रीमो या अध्यक्ष कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को मानने से परोक्ष रूप से इनकार करने वाली और सीपीएम को पराजित कर उसके ही कैडर और सिंडिकेट को अपनाने वाली ममता बनर्जी ने कभी 'एकला चलो' का नारा दिया था अब वह किस मुंह से इन्हीं दलों का साथ मांगने को आतुर नज़र आ रही हैंl अभी बहुत सवालों के जवाब देश और खासकर पश्चिम बंगाल की जनता मांगेगी, लेकिन यह तय है कि भारत में पश्चिम बंगाल से हिंदुत्व और सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण शुरू हो गया है जो राष्ट्रीय राजनीतिक बदलाव का द्योतक बनेगाl हालांकि बंगाल की जीत और सनातन संस्कृति के जागरण में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' की अहम भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता हैl संघ के लाखों स्वयंसेवक जब पूरी ताकत से मैदान में उतरे तब भाजपा का विजय रथ हरियाणा दिल्ली, महाराष्ट्र, उडीसा, बिहार होते हुए सबसे कठिन किला पश्चिम बंगाल में भगवा लहरा दियाl






