पीयू को मात देने में लगा है वाराणसी का संपूर्णानंद संस्कृत विश्विद्यालय!
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संतोष कुमार सिंह
पूर्वांचल ब्यूरो चीफ
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-पूर्वांचल और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालयों में केवल एक समानता है की दोनों में संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या लगभग 600 है, लेकिन संस्कृत विवि से संबद्ध कॉलेज आधा दर्जन प्रांतों में फैले हैं, जबकि पूर्वांचल से संबद्ध कॉलेज सिमटकर कुछ जिलों में बचे हैंl
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वाराणसी/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l धार्मिक नगरी काशी यानी 'वरुणा और अस्सी' को मिलाकर नाम पड़ा वाराणसी जिसको स्मार्ट सिटी का दर्जा तब मिला जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अपना लोकसभा क्षेत्र के रूप में चुनाl यहां वैसे तो तीन विश्वविद्यालय बीएचयू, काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद हैंl लेकिन बात संपूर्णानंद संस्कृत विवि की हो रही है, जो लूट के तरीके की नकल जौनपुर के पूर्वांचल विवि से कर रहा हैl वह इसलिए कि यहां एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति जौनपुर का ही वाशिंदा हैl उसी के टेबिल पर संबद्ध कॉलेजों के प्रबन्ध कमेटियों की फ़ाइल हर पांच साल में अनुमोदन के लिए आती है जिसका रेट अब आसमान छूने लगा हैl इसके चलते कई राज्यों के शैक्षणिक संस्थान संचालित करने वाले हलकान हैंl
संपूर्णानंद संस्कृत विवि के अधीन संबद्ध कॉलेज: अकेले उत्तर प्रदेश तमाम जनपदों में 554 कॉलेज यानी संस्कृत महाविद्यालय संबद्ध हैंl इसके अलावा बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों में भी संबद्ध कॉलेज संचालित हैंl इनको संचालित करने के लिए बनी प्रबन्ध कमेटियों को हर पांच साल में रिनिवल यानी अनुमोदन कराना होता हैl इसके लिए कमेटी के सचिव या प्रबन्धन में से किसी जिम्मेदार सख्श को वाराणसी स्थित विवि के रजिस्ट्रार दफ्तर में संपर्क करना पड़ता हैl
पांच हज़ार से बढ़कर दो लाख हुई बग़ैर रसीद वाली फ़ीस: दशकों पूर्व सैकड़ों से शुरू हुई प्रबन्ध कमेटियों के अनुमोदन की कथित फ़ीस पिछले वर्षों तक पांच हज़ार रुपये तक थी जो इस साल सीधे दो लाख हो जाने से यूपी समेत कई राज्यों में शिक्षण संस्थान संचालित करने वालों में खलबली मची हैl इनमें से कई तो भटकते हुए उस अधिकारी के जौनपुर स्थित घर खोजते फिरते हैं जो विवि जाने की जहमत से बचना चाहते हैंl,,,,, क्रमशः


