प्राथमिक शिक्षा: बेहतर शिक्षक को नहीं चलने देते विभागीय नौकरशाह!
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-स्कूलों में मिड डे मील बना मछली बाज़ार, प्रधान या सभासद को भी देना पड़ता है 15 फीसदी कमीशन, जो नहीं देता उसे 'हेड मास्टर' की कुर्सी छोड़नी पड़ती हैl
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लखनऊ/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l सच्ची घटनाओं पर आधारित एक कहावत है कि पिंजरे में वर्षों तक रहने वाला सर्कस का शेर भी जंगल में छोड़े जाने पर कुत्तों का शिकार बन जाता है, क्योंकि उसे बैठे बिठाए टाइम से मांसाहार मिल जाता थाl जब सर्कस बन्द हुआ तो उन्हें जंगल में छोड़ दिया गया, लेकिन वे फ़िर भी टाइम पर भोजन का इंतज़ार करते रहे और अपनी आलस के चलते भूख से बिलबिलाते हुए कुत्तों का निवाला बन गएl यहां प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की बात हो रही हैl नए और उर्जावान, लगनशील शिक्षक अध्यापन को लेकर जब बच्चों और अभिभावकों के प्रति जवाबदेह बनने के संकल्प पर काम करते हैं तो उसके लिए विद्यालय कैंपस ही जंगल बन जाता है और कमीशनखोर उनके लिए भेड़िया बन जाते हैंl ऐसी स्थित उत्तर प्रदेश के हर जनपद में देखी और सुनी जा सकती हैl हम यहां 'तहलका संवाद' की पड़ताल पर जो बानगी दे रहे हैं वह जौनपुर मुख्यालय के शहरी इलाका मीरपुर की है, जिस हेड मास्टर की तारीफ दो जिलाधिकारी और पूर्वांचल विवि की एक कुलपति कर चुके हों उन्हें राज्य पुरस्कार तो दूर उनकी हेडमास्टर वाली कुर्सी भी छीन ली गईl गनीमत ये है कि उनकी नौकरी बची हैl
एक दिन में 52 एडमिशन का रेकॉर्ड: मुकेश सिंह हेड मास्टर बने तो छात्र संख्या 402 पहुँच गईl जब पद से हटे तो बीते अप्रैल में 143 रह गईl एक शिक्षण सत्र के पहले ही दिन 52 अभिभावक स्कूल पहुंचकर अपने बच्चों को प्रवेश दिलाए जो प्रदेश के नामचीन प्राथमिक स्कूलों में शुमार हो गयाl इसी रेकॉर्ड को देख पूर्वांचल विवि की तत्कालीन कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य हेड मास्टर मुकेश सिंह से वार्ता करके 6 अप्रैल 2023 को मीरपुर के प्राथमिक विद्यालय में पठन- पाठन और समूची व्यवस्था देखने पहुँच गईंl वह यहां की व्यवस्था और अनुशासन देखकर खुद ब खुद बोल पड़ीं कि ये विद्यालय वाकई प्रदेश की बेसिक शिक्षा के लिए रोल मॉडल हैl
अभिनव प्राथमिक विद्यालय मीरपुर इंग्लिश मीडियम: वर्ष 2012-13 में तत्कालीन डीएम ने शहर के प्राथमिक विद्यालय मीरपुर को इंग्लिश मीडियम के तौर पर अभिनव प्रयोग किया और तभी से इसके नाम के आगे अभिनव भी जुड़ गयाl इसके बाद वर्ष 2017- 18 में इसे इंग्लिश मीडियम किया गया, लेकिन विडम्बना ये रही कि यहां पढ़ाने के लिए कई साल तक योग्य शिक्षक ही नहीं मिले और न ही पर्याप्त कक्ष संख्या थीl वर्ष 2016 में मुकेश सिंह का सहायक अध्यापक के तौर पर पद स्थापन हुआ और उन्हें 2019 में हेड मास्टर बनाया गयाl इसी दौरान उन्होंने व्यवस्था के साथ पठन- पाठन सुधारकर छात्र संख्या 402 पहुंचा दी और प्रथम सत्र के पहले दिन 52 छात्रों का प्रवेश लेकर अलग रेकॉर्ड बनायाl वर्ष 2023 में उन्हें हेड मास्टर से इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने सभासद को मिड डे मील में 15 फीसदी कमीशन देने से मना कर दिया थाl इसका खामियाजा उन्हें करीब डेढ़ लाख के मिड डे मील के रूप में अपनी जेब से भरना पड़ाl बाकी अगली कड़ी में,,,,,, क्रमशः


