हैरतअंगेज: बेसिक स्कूलों में कैसे चलेंगे स्मार्ट क्लासेज!
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-योजना में ब्रेकर: प्रदेश सरकार को पहले मिड डे मील में कमीशनखोरी रोकनी पड़ेगीl इसके बाद नगर और ग्रामीण इलाकों में संचालित विद्यालयों में शिक्षकों के पद स्थापन नियमावली का कड़ाई से पालन कराना होगा, जो वर्तमान नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार के रहते जटिल कार्य होगाl
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लखनऊ/ जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश के कुछ प्राथमिक विद्यालयों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्मार्ट बनाने के लिए योजना की घोषणा इसी महीने शिक्षक दिवस से पूर्व की थीl तभी से नौकरशाही इस योजना को अमलीज़ामा पहनाने में लगी भी है, लेकिन आम जनमानस को 'बेसिक शिक्षा में स्मार्ट क्लासेज' की यह योजना हैरतअंगेज लग रही है, क्योंकि प्रदेश के लगभग सभी विद्यालयों में नामांकित जिन बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है उसमें जिम्मेदार लोग '15 फीसदी कमीशन कट' जो लेते हैंl उसे भुगतान करने वाले हेडमास्टर को दलाल बनना पड़ता है, अन्यथा उसे अपने प्रधानाध्यापक पद से हाथ धोना पड़ता हैl इसकी बानगी जौनपुर के नगरीय क्षेत्र में स्थित 'प्राथमिक विद्यालय मीरपुर' है, जिसका कभी अंग्रेजी माध्यम से संचालन शुरू हुआ थाl यहां वर्ष 2023-24 तक छात्र संख्या 402 तक पहुँच गई थी, लेकिन मिड डे मील में कमीशन न देने के चलते तत्कालीन हेडमास्टर मुकेश सिंह को पद से हटा दिया गयाl उनके स्थान पर जिसे ग्रामीण क्षेत्र से मीरपुर में पद स्थापन किया गया उसमें नियम को दरकिनार कर दिया गयाl परिणाम स्वरूप छात्र संख्या वर्तमान सेशन में घटकर मात्र 143 रह गई हैl इसी के चलते यहां की एक रसोइया को हटा दिया गया हैl इसमें भी नियमावली को दरकिनार किया गया, जिसमें विद्यालय प्रबन्धन फंस गया हैl क्योंकि रसोइया प्रियंका देवी मौर्या ने आईजीआरएस के तहत शिकायत कर दी हैl उसका जवाब अभी तक प्रशासन नहीं दे सका हैl
कहां गया मिड डे मील का 35 क्विंटल खाद्यान्न? मीरपुर प्राथमिक विद्यालय में जब तत्कालीन प्रधानाध्यापक ने उस दौर के सभासद को मिड डे मील में 15 फीसदी कमीशन देने से मना किया तो उसने बेसिक शिक्षा विभाग से मिलकर खाद्यान्न निर्गत होने से रोक दियाl ऐसे में तत्कालीन बीएसए ने हेडमास्टर से मौखिक तौर पर कहा कि गतिरोध दूर होने तक निजी तौर पर व्यवस्था कीजिएl यह सिलसिला वर्ष 2023-24 में लगभग छह महीने तक चलाl जब दूसरे शिक्षक को हेडमास्टर बनाकर लाया गया और मुकेश सिंह को हटाकर वहीं सहायक अध्यापक बना दिया गया तब से बिना शोरगुल के मिड डे मील में फ़िर कमीशनखोरी चल पड़ी, लेकिन अपनी व्यवस्था से मिड डे मील चलाने वाले शिक्षक मुकेश सिंह को अभी तक लगभग 35 क्विंटल खाद्यान्न का हिसाब नहीं मिलाl इसके लिए हर साल ऑडिट का ड्रामा चलता हैl वही ड्रामा इस महीने के मध्य में भी दोहराया गयाl
नियम के तहत रसोइया प्रियंका देवी मौर्या को नहीं हटाया जा सकता है: मीरपुर नगरीय प्राथमिक विद्यालय में जब 402 छात्र संख्या थी तब रसोइया की संख्या भी पांच थीl क्योंकि 301 से 1000 बच्चों पर यह रसोइया संख्या थीl इस एपिसोड के साथ इसका मानक टेबल भी लगा हैl जब छात्र संख्या घटने लगी तब चार रसोइया रह गईंl इसके बाद जब वर्तमान सत्र में छात्र संख्या गिरकर महज 143 आ गई तब सितम्बर 2026 में प्रियंका देवी मौर्या को वर्तमान हेडमास्टर ने मौखिक तौर पर स्कूल से बाहर कर दियाl शिक्षा परिषद की नियमावली में पहला नियम है कि उस रसोइया को नहीं हटाया जा सकता है जिसका बच्चा उसी विद्यालय अथवा वार्ड या ग्रामसभा में पढ़ता होl प्रियंका देवी मौर्या का एक बच्चा मीरपुर में ही उच्च प्राथमिक विद्यालय का छात्र हैl प्रियंका देवी ने इस मामले की शिकायत के जरिये एबीएसए, बीएसए, डीएम जौनपुर और मुख्यमन्त्री पोर्टल, आईजीआरएस में भी गुहार लगाई हैl
तब तक ऐसे होता था अध्यापन: बेसिक शिक्षा के परिषदीय विद्यालयों में पूर्व मुख्यमन्त्री कल्याण सिंह की सरकार तक पढाई इतनी बेहतर थी कि इंग्लिश मीडियम वाले विद्यालय संचालकों को बच्चे खोजने पड़ते थे, लेकिन अब तो प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के बच्चे भी उनमें नहीं पढ़ते हैंl सारा खेल कमीशन का हो गया जिसमें शिक्षक उलझा दिया गयाl पहले बस्ता, किताब, ड्रेस में कमीशन को लेकर लूट शुरू हुई, जिसे सरकार ने बन्द करके बच्चों के खाते में देना शुरू कर दियाl तब कमीशन खोरों की गिद्ध नज़र 'मिड डे मील' पर टिक गईl तब से यह सिलसिला कायम हैl अब योगी आदित्यनाथ की सरकार नौकरशाही के इस जाल से निकलकर कैसे स्मार्ट स्कूल संचालित करेगी? इसी को लेकर जनमानस हतप्रभ हैl,,, क्रमशः



