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और पुलिस के बूते भू- माफिया चिकित्सक ने अपने बहनोई की ज़मीन पर छत डालकर पूर्ण कब्जा कर लिया! Tahalka Samvaf

Tahalka Samvaad


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 ...और पुलिस के बूते भू- माफिया चिकित्सक ने अपने बहनोई की ज़मीन पर छत डालकर पूर्ण कब्जा कर लिया! 

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--माफिया का बदला स्वरूप--


-इस प्रकार पैसे की माई चढ़ती है पहाड़: सिविल कोर्ट से हुए स्टे को शहर कोतवाल ने किया दरकिनार, कहा ये ज़मीन डॉक्टर की है, उनके कार्य में बाधक बने तो लॉकअप की हवा खानी पड़ेगी, यही ज़मीन डॉक्टर के सगे बहनोई अरुण सिंह के पिता और अनुराग सिंह के दादा चन्द्र भूषण सिंह निवासी चंदापुर तहसील बदलापुर के नाम है -अधिवक्ता अनुराग सिंह


-इसी ज़मीन के पास है झीलनुमा गड्ढा, बगल से निर्माणाधीन गोरखपुर- प्रयागराज फोरलेन जौनपुर शहर के मध्य से गुजरा हैl नईगंज में फ्लाईओवर और गोमती पर पुल बन जाने पर इस रोड पर वाहन फर्राटा भरेंगे लेकिन जिस दिन बाढ़ आयेगी उस दिन यह मार्ग तो बाधित होगा ही साथ में आधा शहर के डूबने का मुख्य कारण बनेगी वही झील जहाँ 'भैंसा नाला' की बेदर्दी से हत्त्या कर दी गई! 

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जौनपुर/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क) एक कहावत है कि 'हवस किसी भी चीज की हो वह इंसान को समाज में रसातल तक पहुंचा देती हैl उसके लिए रिश्ते- नाते ही नहीं, इंसानियत भी मर जाती हैl जिसके लिए वह सम्पदा एकत्र करता है वही अगली पीढी उसे बर्बाद भी कर देती हैl उसके पास बाप का 'कुसंस्कार' बचा रह जाता है जो उसकी चमड़ी उधेड़ने के साथ ही समाप्त होता हैl बात हो रही है एक भू - माफिया डॉक्टर की जो अपने ही 'बहनोई के लिए कंस' सरीखे हो चुका है लेकिन भांजा भी भागवान कृष्ण का भक्त बनकर उसके गले की फांस बन गया हैl इस एपिसोड में उस डॉक्टर द्वारा ज़मीन कब्जे और उसपर बनाए गए अवैध भवनों से जुड़े दस्तावेज की जानकारी हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के अधिवक्ता अनुराग सिंह द्वारा सीएम और न्याय पालिका सहित पुलिस- प्रशासन को दी गई है जिसे हम यथावत प्रस्तुत कर रहे हैंl


सात महीने में सिविल कोर्ट से हुए स्थगनादेश के बावजूद कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कथित डॉक्टर ने बीते फरवरी डीएम द्वारा रोके गए निर्माण पर आज छत डाल लीl अधिवक्ता अनुराग सिंह के मुताबिक मुकदमा संख्या 760/ 2016 के तहत जौनपुर सिविल कोर्ट से मुझे स्टे मिला थाl फ़िर भी शहर कोतवाल से शिकायत की गई तो उल्टे मेरे पिता को हवालात में डालने की धमकी दी गईl सवाल ये है कि राजस्व के मामले में पुलिस कैसे हस्तक्षेप कर सकती है? इसके अलावा मुकदमा कोर्ट में लम्बित भी है फ़िर पुलिस को कहां से अधिकार मिल गया? इसका जवाब पुलिस को भी कोर्ट में ही देना पड़ेगाl


भू - माफिया के कहे में जो नहीं आता उसपर वह लगाता है गलत इल्जाम: इस कथित डॉक्टर की ज़मीन के प्रति हवस इतनी बड़ी है कि उसका वश चले तो वह जौनपुर का समूचा शहरी क्षेत्र कब्जा कर लेl इसका उदाहरण मड़ीयाहूँ रोड पर स्थित शीतगृह के निकट कालोनी में कुछ विस्वा ज़मीन खरीदने के बाद उसने कालोनी गेट वाली सड़क पर 'अपने नाम की कालोनी' घोषित कर बड़ा सा बोर्ड लगा दिया हैl इसे लेकर उस कालोनी में आक्रोश चरम पर हैl दूसरी तरफ़ कटघरा इलाके में इसने 'आम और अमरूद' का बगीचा उजाड़कर उसपर फार्म हाउस बना लिया हैl यह तीन पत्रकारों, एक राजनेता, एक पूर्व एडीएम, दो कर्मचारियों पर लाखों रुपये बकाया बताता फिरता हैl अब ताज़ा उदाहरण उसके खुद के छोटे बहनोई अरुण सिंह बने हैंl उनपर एक करोड़ का मौखिक इल्जाम हैl अधीनस्थों में एक तो उसके अवैध भवन में संचालित कथित नर्सिंग कॉलेज का संचालक थाl उसके मुताबिक उसको वेतन की बजाय प्रवेश लेने वाले छात्रों की सालाना फीस में कमीशन तय थाl दिलचस्प ये कि दो साल के कोर्स की फीस शासन की तरफ़ से 75 हज़ार निर्धारित थी लेकिन वसूली दो लाख होती रहीl इससे अधिक वसूली में 50-50 पर मामला निर्धारित थाl उसे कमीशन नहीं मिला तो उसे रुपये की बोरी लेकर भागना पड़ाl बाकी अन्य लोग जब उसके मुताबिक सहयोग नहीं किए तो मौखिक आरोप लगाने में कौन सी दमड़ी खर्च हो रही हैl  बाकी अगली कड़ी में,,,,,, क्रमशः

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