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सुलगाता सवाल: विपक्ष कैसे चाहता है रिजीम चेंज? Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 सुलगाता सवाल: विपक्ष कैसे चाहता है रिजीम चेंज?




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केंद्र सरकार का फार्मूला: ध्रुव राठी की बड़ी गलती का इंतज़ार, काक्रोच का दशहरा में दाह संस्कार! 

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कैलाश सिंह

राजनीतिक संपादक

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-रीजीम चेंज के बयान वाले बामपंथी जाल में फंसे काक्रोच, राहुल गाँधी के लिए 'नेहा बोरा' का चेहरा एलवीडब्ल्यू वाले क्रिकेट खिलाड़ी जैसा साबित हुआ, अरविंद केजरीवाल का सीधा फंडा 'यूज एण्ड थ्रो' हैl

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लखनऊ/दिल्ली,(तहलका न्यूज नेटवर्क)l कहावत है कि शेर जब शिकार पर झपटता है तब वह कुछ कदम पीछे को जाता हैl जून- जुलाई में काक्रोचों के प्रदर्शन में झुकी मोदी सरकार का अंदाज़ भी उसी तरह का समझा जा सकता हैl राजनीतिक विश्लेषक तो 'मोदी- शाह' की खामोशी को बेहद खतरनाक मानते हैंl भारत की राजधानी दिल्ली में काक्रोचों के बहाने हलचल मचाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के रोल मॉडल एक दशक पुराने आप नेता अरविंद केजरीवाल रहेl लिहाजा वह इस बार पूरी तरह आमजन की निगाह से उतर गएl उन्होंने देश के एलओपी पद की गरिमा भी धूल धूसरित कर दीl कांग्रेस नेता ने निशाने पर तो पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को रखा लेकिन हमला देश की हर संवैधानिक संस्था पर कियाl अंत में राहुल गाँधी ने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को पीछे करके प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस 'नेहा बोरा' का चेहरा आगे किया उसकी एक वीडियो में 'रिजीम चेंज' की मंशा जाहिर हो गईl  उसके रोल मॉडल बांग्लादेश में तख्ता पलट करने वाले कथित जेहादी छात्र हैंl यानी भारत में भी बन्दूक से तख्ता पलट की मंशा जाहिर हो गईl यदि विपक्ष चुनाव से सत्ता परिवर्तन चाहता तो 2029 से पहले 12 राज्यों में होने वाले चुनाव पर फोकस करताl



दरअसल प्रशांत भूषण द्वारा रीजीम चेंज के बयान का तो उनके जारी वीडियो में उनकी मंशा साफ़ हो गई, वैसे उन्हें तो अरविंद केजरीवाल पहले ही दूध की मक्खी सरीखे अपनी पार्टी से निकाल बाहर कर चुके हैंl उन्हें अब तक कहीं ठिकाना भी नहीं मिलाl मोदी सरकार ने शायद सभी अराजकता करने वालों की मंशा को आमजन की नज़र में उजागर होने का मौका दियाl शायद इसीलिए काक्रोचों को बड़ी गलतियां करने का इंतजार सरकार करती रही हैl इसी पैमाने पर ध्रुव राठी जैसों का हश्र उमर खालिद जैसी होने का अनुमान लगाया जा सकता हैl दशहरे के दिन दिल्ली की जनता रावण के साथ अभिजीत दिपके के पुतले का दाह संस्कार करने की योजना बना ली हैl रहा सवाल कांग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा रिजीम चेंज की मांग का तो आखिर कैसे? बन्दूक से या चुनाव के जरिये, इसी सुलगते सवाल का जवाब कांग्रेस को खोजना है क्योंकि यही सवाल अभी तक जनमानस के जेहन में कौंध रहा हैl


राजनीतिक विश्लेषक डॉ अरविंद मिश्र व एस. पाण्डे कहते हैं कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन किस तरीके से चाहता है? कांग्रेस के साथ विपक्षी दल और उनके समर्थक भी इसी सवाल पर उलझे हुए हैंl जनतंत्र में संवैधानिक तरीका तो चुनाव है, लेकिन कथित वामपंथी नेता शायद नेपाल और बांग्लादेश वाला तरीका अपनाना चाहते हैंl   ऐसे में कांग्रेस को कौन सा तरीका अपनाना है जिसका फैसला वह अपने चेहरे का एक परत नकाब उतरने तक नहीं कर पाईl इससे पहले वह हर संवैधानिक संस्था यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट को भी कटघरे में खड़े करने- घेरने या दबाव बनाने की कोशिस कर चुकी है, जिस केजरीवाल के कथित 'झूठे आरोप लगाओ और निकल लो', वह इस बार जनता के सामने फेल हो गयाl राहुल गाँधी ने यही तो किया वोट चोरी का नेरेटिव बनाने मेंl सुबूत के अभाव में वह चाहते हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ही साबित करें कि उन्होंने कोई वोट चोरी नहीं की हैl यदि उनके पास प्रमाण होता तो सुप्रीम कोर्ट से पहले राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत कर सकते थेl अब उनका नया शिगूफा है कि एक नवम्बर को रामलीला मैदान में पांच लाख लोगों को प्रदर्शन के लिए एकत्र करेंगेl जबकि उस मैदान की क्षमता ही 50 हजार की संख्या वाली हैl वही भर जाए तो बड़ी बात होगीl


कहीं, ध्रुव राठी,अभिजीत दिपके को मोदी सरकार की रणनीतिक ढील तो नहीं है: ध्रुव राठी और काक्रोच अभिजीत दिपके को अभी तक समझ नहीं आया कि अरविंद केजरीवाल इनके लिए क्यों कुछ बोल नहीं रहेl यहां से भागा राठी लंदन में भीड़ जुटाकर भारत में रिजीम चेंज का राग अलाप रहा हैl दरअसल मोदी सरकार उसे उमर खालिद जैसी गलती करने की छूट दे रही है तभी तो उसे वेलेबल वारंट जारी कराया गया हैl दो अक्टूबर से काक्रोचों की अराजकता निरंतर बढ़ती गई और उन्हीं के चलते सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक एलओपी व कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी प्रदर्शन कर दियाl इधर दिपके भी बाँड भरके फंस चुका हैl अब तो उसके लिए यह मुद्दा सांप- छछून्दर सरीखे हो चला हैl 


जून- जुलाई में काक्रोचों का पहला प्रदर्शन नीट पेपर लीक को लेकर हुआ और शिक्षा मन्त्री का इस्तीफा हो गयाl तब देश का युवा इनके साथ नज़र आया लेकिन इनका घिनौना रूप दो अक्टूबर से सामने आने लगा तो कथित जेनजी इनसे दूर हो गयाl अब तो ये 'मोदी- शाह' के ट्रैप में घिरे नज़र आने लगे हैंl हद तो तब हो गई जब समूचे प्रदर्शनकारियों के साथ राहुल गाँधी और कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं के साथ देश के तिरंगे का भी अपमान कर दियाl

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