पीयू का गडबड़झाला 6: हैरतअंगेज लाइब्रेरी, विद्यार्थी 60 और किताबें पांच सौ, फ़िर भी सेलेबस की पुस्तकों का अकाल!
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कैलाश सिंह/संतोष कुमार सिंह
विशेष संवाददाता/चीफ रिपोर्टर
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-पूर्वांचल विवि की लाइब्रेरी में दिल्ली के दरियागंज से खरीदी गई 20 रुपये किलो की पुस्तकों पर करोड़ों का होता रहा भुगतान, एक बार जांचकर्ता ने घोटाले को पकड़ा, शायद- नोटों की गड्डियों में वह रिपोर्ट भी दफ़न हो गईl
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लखनऊ/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l किसी महान शायर ने दुनिया की राजनैतिक व्यवस्था पर 'तंज यानी कटाक्ष' करते हुए लिखा था- 'बरबाद गुलिस्ताँ करने को एक उल्लू ही काफ़ी था, हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम- ए- गुलिस्ताँ क्या होगा?
इस शे'र को हमने पहली बार तब सुना था जब पाकिस्तानी असेंबली पर वहां के एक पत्रकार ने कुछ वर्षों पूर्व तंज करते हुए इसे पढ़ा थाl उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल विवि में घपलों- घोटालों की दशकों से झड़ी लगी हैl उसी में एक घोटाला करोड़ों का यहां की लाइब्रेरी का हैl पिछले वर्षों में राजभवन से शिकायत के बाद जांच भी हुई और 'अमानत में खयानत' भी पकड़ में आई, लेकिन वह रिपोर्ट कब्र में लाश की तरह शायद नोटों के बण्डल में दफ़न कर दी गईl
दरअसल इसका खुलासा बीते बुधवार को तब हुआ जब एमबीए एग्री की छात्रा ईश्विका सिंह का सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हुआl छात्रा ने रजिस्ट्रार को शिकायतों की फेहरिस्त वाला ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से लाइव बातचीत में विवि की तमाम कमियों के साथ बताया कि यहां की लाइब्रेरी में हमारे सेलेबस की एक भी पुस्तक नहीं हैl इसके बाद वीसी प्रो. वंदना सिंह ने सम्बन्धित जिम्मेदारों से सवाल किया कि क्या वाकई में यहां सेलेबस की पुस्तकें नहीं हैं? जिम्मेदारों ने जाकर देखा और वीसी को बताया कि नहीं हैं सम्बन्धित विषयों से जुड़ीं किताबेंl फ़िर सवाल आया कि आखिर हर साल एक दशक तक किन कीमती पुस्तकों, ई जर्नल, ई मैग्जीन के नाम पर किए गए तीन- तीन करोड़ के भुगतान का लाभ क्या हुआ? जवाबदेह निरुत्तर हो गए, बस इतना भर कहा कि रेकमेंडेशन तो विभागों से जाता रहा लेकिन आपूर्ति की पुष्टि कभी नहीं कराई गईl इसके बाद वीसी अचंभित हो गईंl
एक दशक से अधिक दिनों तक पुस्तकालय अध्यक्ष रहे कथित 'चार्ल्स शोभराज' का कारनामा: विश्वविद्यालय में नियम को धता बताकर कूट रचित दस्तावेजों के जरिए दशकों से प्रोफेसर बना एक शिक्षक को कई पूर्व कुलपतियों ने लाइब्रेरी की भी जिम्मेदारी सौंपे रखीl उसने हर साल तीन करोड़ से अधिक की पुस्तकों (कागजी बिल) से लाइब्रेरी को भर दियाl हालांकि यदि सच में ये किताबें खरीदी गई होतीं तो 'दस मन्जिला भवन के हर तल के कमरे भर चुके होतेl' इसके रख रखाव के लिए लाखों की दीमक मारने वाली दवा भी खरीदनी पड़तीl
दिल्ली के दरियागंज की दिलचस्प कहानी: विवि के सूत्रों की मानें तो पिछले दशक में लगातार जिस शिक्षक को लाइब्रेरी का प्रेसिडेंट बनाये रखा गया था, उसने खुद और अपने पिता की संयुक्त लेखक वाली पुस्तकों का जखीरा यानी 500 पुस्तकों को भर दियाl विवि को बिलिंग में 10 फीसदी का डिस्काउंट भी दे दियाl वैसे यह पुस्तक एक सेलेबस से जुड़ी है, लेकिन पढ़ने वाले छात्रों की संख्या सीट महज 60 है, फ़िर पांच सौ किताबें वह भी एक ही सब्जेक्ट की होने का किसको लाभ हुआ, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता हैl अब दिल्ली के दरियागंज की पटकथा पर ध्यान दें तो यहां 'कथित लेखक व किताब' चोरों की पौ बारह होती हैl सामान्य पाठकों के लिए तो यह स्थान किसी तीर्थ से कम नहीं है लेकिन किसी शैक्षणिक संस्थान में काम करने वाले जुगाड़ू लेखकों और संस्थान के लिए पुस्तकों की खरीद करने वालों के लिए तो यह इलाका 'ट्रेड मार्केट' सरीखा हैl यदि करोड़ों की खरीद करने वाला हो तो उसे हजारों मूल्य वाली पुस्तकें महज 20 रुपये किलो के भाव मिल जाती हैंl पूर्वांचल विवि की लाइब्रेरी में यही खेल वर्षों तक चला हैl तभी तो इस कथित व्यापारी शिक्षक के पास प्रदेश की राजधानी के पाश इलाके में आलीशान मकान भी हो गया हैl अब वह एक बड़े बिजनेस में उतरने वाला हैl
संविदा शिक्षकों की भर्ती में लाखों के वारे- न्यारे का प्लान तैयार: विवि के विभिन्न विभागों में कुल 70 सीटों के लिए पिछले दिनों विज्ञप्ति भी जारी हो चुकी हैl यहां हर शाख पे उल्लू (मां लक्ष्मी का प्रतीक वाहन) पहले से बैठे हैंl ये पुरोहित गैंग- 2 के आधा दर्जन मेंबरों में से हैंl उपन्यास 'चंद्रकांता' के पात्रों यक्कू और अय्यारी में ये सभी दक्ष हैंl इसी काकस ने इस विश्वविद्यालय को दशकों से पंसारी की दूकान बनाकर रख दिया हैl इनके और भी कारनामे तहलका की पड़ताल के जरिए अगली कड़ियों में मिलते रहेंगेl

