'शीश महल' का मोह: दिल्ली से बेआबरू अरविंद केजरीवाल अब पंजाब में वही तरीका अपना रहे!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-अन्ना हजारे के आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार बनी तब अपनी वैगनार से सीएम पद की शपथ लेने पहुंचे थे केजरीवाल, तब पब्लिक ने माना कि अब हमारे बीच का नेता दिल्ली की गद्दी पर बैठकर आमजन को देगा राहत, पर हुआ उल्टाl
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दिल्ली/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l दिल्ली की गद्दी और अपने 'शीश महल' से बेआबरू हुए पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा शीश महल बनवाए जाने की चर्चा आम होने लगी हैl उन्हें जो सरकारी आवास आवंटित किया गया है उसका क्षेत्रफल दो एकड़ बताया जा रहा हैl दिलचस्प ये कि उनके दरवाजे से बाहर निकलते ही हैलीपैड है, जिसपर राज्य सरकार का हेलिकाप्टर इनके आवागमन के लिए टैक्सी सरीखे खड़ा रहता हैl नियम- कानून से बचने के लिए उनके साथ पंजाब के मुख्यमन्त्री भी अक्सर होते हैंl वह पार्टी की बैठकों में हिस्सा लेने गुजरात, महाराष्ट्र आदि तक आते -जाते हैंl वह किसी विधानसभा या परिषद के भी सदस्य नहीं हैंl फ़िर कैसे उन्हें सरकारी आवास दिया गया? खबर ये भी है कि नियम के विपरीत उन्हें मिले सरकारी आवास को दिल्ली वाले 'शीश महल' की तर्ज पर रेनोवेशन के बहाने विकसित करने की योजना पर काम चल रहा हैl जबकि वह केवल अपनी पार्टी के संयोजक हैंl ऐसे में हर विन्दु पर सवाल खड़े होने लगे हैंl उनके साथ और बचाव में सीएम भगवंत सिंह मान के लगे होने से वहां का आमजन भ्रम में पड़ गया है कि पंजाब का 'असली मुख्यमंत्री' कौन है?
पिछले वर्षों में केन्द्र सरकार के कई पूर्व मन्त्री, सांसद तक को अपने सरकारी आवास छोड़ने पड़े, जो छोड़ने को तैयार नहीं था उससे जबरन खाली कराया गयाl नियम है कि लोकसभा या विधानसभा का चुनाव हारने के छह महीने के अंदर किसी भी सदस्य को मिले सरकारी आवास खाली करने होते हैंl दिल्ली के अपने बनवाये शीश महल पर किस तरह कब्जा बनाए रखने में केजरीवाल लगे थे, इसे सबने देखा- सुनाl उन्होंने विवश होकर जब इस्तीफा दिया तो उस महल को अपनी पार्टी की तत्कालीन सीएम आतिशी के बहाने कब्जे में रखने की उन्होंने कोशिश जारी रखी थी, लेकिन 2025 के चुनाव में आम जनता ने उनकी पार्टी को ही दिल्ली से बाहर कर दियाl अब वर्तमान भाजपा सरकार ने केजरीवाल के उस 'शीश महल' को गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल करने का आदेश दे दिया हैl बेबस केजरीवाल का अंतिम ठिकाना पंजाब बना और अब यहां भी विरोध के स्वर उग्र होने लगे हैंl
विदित हो कि जब पहली बार दिल्ली विधानसभा से कांग्रेस को आउट कर 'आम आदमी पार्टी' की सरकार बनी और पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पोशाक से लेकर रहन -सहन से जो संदेश पब्लिक को दिया उससे दिल्ली में रहने वाले हर किसी को अपना जीवन यापन सस्ता और सर्व सुलभ नजर आने लगा, लेकिन लोगों का भ्रम कोरोना काल में दूर हो गयाl इस महामारी में खासकर यूपी और बिहार के लोगों को दिल्ली- यूपी बार्डर आनंद विहार के पास छोड़ दिया गया, तब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बसों के जरिये लोगों को उनके घर बिहार तक भेजाl तमाम लोग इलाज के लिए हलकान थे और उसी दौरान केजरीवाल अपने लिए शीशमहल बनवा रहे थेl
कठपुतली बन गए हैं पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान: जब से केजरीवाल पंजाब में डेरा डाले हैं तब से वहां के मुख्यमन्त्री भगवंत सिंह मान इस प्रदेश के जनमानस की नजर में 'कठपुतली' की तरह दिखने लगे हैं, जिसकी डोर उन अरविंद केजरीवाल के हाथ में है, जिनको शीश महल की 'लत' लग गई हैl अब उनकी इस लिप्सा का नतीजा पंजाब में गूंजने लगा हैl उनकी हालत उस जुआरी सरीखी है जो हारते जाने के बाद हर बाज़ी में अपनी जीत का मुकद्दर तलाशता हैl


