यूपी में भाजपा के 'कुर्मी' नेता की तलाश के मायने: महज एक साल में पंकज चौधरी की है परीक्षा!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-बड़े सवाल: क्या भाजपा में 'योगी आदित्यनाथ' विरोधी खेमे के नेता माने जाने वाले पंकज चौधरी अपने समाज के मास लीडर हैं? क्या पार्टी उनके बहाने कम समय में कुर्मी वोटरों को अपनी तरफ़ खींच पायेगी? क्या भाजपा की 'कुर्मी नेता' की तलाश पूरी हो गई? सबका जवाब मिलेगा 2027 मेंl
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दिल्ली/लखनऊ/गोरखपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l गोरखपुर के महराजगंज से सात बार से सांसद पंकज चौधरी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैंl वह कुर्मी समाज से आते हैं और वह भाजपा में योगी आदित्यनाथ के विरोधी खेमे के नेता माने जाते रहे हैंl पार्टी हाई कमान ने उन्हें 'उत्तर प्रदेश अध्यक्ष' की कमान सौंप दी है, जिसकी औपचारिक घोषणा आज यानी 14 दिसम्बर को हो गईl पार्टी ने इसके लिए उनकी किस योग्यता को सर्वोपरि माना यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिये से देखें तो यही लगता है कि उन्हें भाजपा से दूर हुए 'कुर्मी वोटरों' को जोड़ने के लिए उपयुक्त माना गया है, जिसका परिणाम 2027 के यूपी विधान सभा चुनाव में मिलेगाl वह अन्य कुर्मी नेताओं की तरह अपने समाज में क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर दखल रखते हैंl इसमें संशय की कोई गुंजाइश नहीं है, परंतु उन्हें 'कुर्मी समाज का मास लीडर' नहीं माना जा सकता हैl
'तहलका संवाद' से हुई बातचीत में विभिन्न अखबारों में संपादक रहे राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडेय' मानते हैं कि भाजपा को दरअसल 2022 के यूपी विधान सभा चुनाव के बाद ही पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप देनी चाहिए थीl तब उन्हें संगठन में काम करने, लोगों से मिलने और कुर्मी समाज में महाराजगंज, गोरखपुर क्षेत्र से बाहर आकर प्रदेश के सभी हिस्सों में दायरा बढ़ाने का मौका मिलताl भाजपा ने उस दौरान ऐसा नहीं सोचा जिसका खामियाजा उसे 2024 के लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ाl नतीजा सामने था, यूपी की 80 सीटों में 'समाजवादी पार्टी का पीडीए' भाजपा पर भारी पड़ाl पार्टी 40 का आंकड़ा भी नहीं छू सकीl
अब तक किस पार्टी के साथ रहा कुर्मी समाज: कुर्मी समाज भाजपा के साथ जनसंघ के समय से शुरुआती दौर से रहा हैl बाद में यह समाज पूरी तरह किसी दल के साथ नहीं रहाl कालांतर में यह वोटर डॉ राम मनोहर लोहिया, फ़िर चौधरी चरण सिंह, जब बसपा बनी तो 'बसपा- सपा- भाजपा' तीनों दलों में कुर्मी वोट विभाजित होता रहाl वर्ष 2022 में यह वोटर सपा की तरफ़ घूम गया और 2024 के लोकसभा चुनाव में ये वोटर पूरी तरह सपा के पीडीए में समाहित हो गएl तभी से भाजपा को उस कुर्मी नेता की तलाश में थी जो अपने समाज के छिटके वोटरों को फ़िर पार्टी से जोड़ सकेl लेकिन इस खोज में पार्टी ने काफी समय गंवा दियाl अब पंकज चौधरी के सामने एक साल का संक्षिप्त समय है जिसमें उन्हें हाई कमान के निर्देश पर अपनी टीम भी बनानी हैl
ये रहे अब तक के बड़े कुर्मी नेता: इसी तरह भाजपा में अब तक पूर्वी यूपी में ओम प्रकाश सिंह, अवध में विनय कटियार, प्रेमलता कटियार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संतोष गंगवार कुर्मी नेता रहे जो बरेली से आधा दर्जन से अधिक बार सांसद रहे और कई बार केंद्रीय मन्त्री भी रहेl वह अब राज्यपाल हैंl इसके अलावा सोनेलाल पटेल ने अलग पार्टी बनाई थीl उनके बाद उनकी बड़ी बेटी अनुप्रिया पटेल एनडीए का हिस्सा हैं और केंद्र में मंत्री हैंl सोनेलाल की छोटी बेटी पल्लवी पटेल सपा के टिकट पर विधायक हैं, जिन्होंने यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य को हराया थाl उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ कर दी तो सपा ने पार्टी से निकाल दियाl अब वह असंबद्ध विधायक हैंl सपा के पास सबसे बड़े कुर्मी नेता बेनी प्रसाद वर्मा रहेl इसके अलावा सभी पार्टियों में कोई न कोई कुर्मी नेता रहा हैl इससे पूर्व भाजपा ने कुर्मी वोट खींचने के लिए स्वतन्त्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, लेकिन वह भी अपने समाज के 'मास लीडर' नहीं बन पाएl राजनीतिक विश्लेषक 'पंकज चौधरी' को लेकर भी यही अनुमान लगा रहे हैंl वह अपने समाज के मास लीडर एक साल में बन पाएंगे या नहीं, इसका नतीजा 2027 के विधान सभा चुनाव परिणाम पर निर्भर करेगाl
पंकज चौधरी अपने प्रोडक्ट तेल 'राहत रूह' से अधिक चर्चित हैं: पंकज चौधरी कभी संगठन में काम नहीं किये हैंl उनका जनाधार महाराजगंज, गोरखपुर के आसपास कुछ जिलों में माना जा सकता हैl यानी उनका असर समूचे पूर्वी यूपी में भी नहीं माना जाता हैl पार्टी ने भी छिटक रहे कुर्मी वोटरों को जोड़ने के लिए कभी उनका उपयोग नहीं कियाl वह अपनी तेल कम्पनी के प्रोडक्ट 'राहत रूह' से जरूर थोड़ा चर्चित हैंl
कहीं, योगी की रफ्तार का ब्रेकर तो नहीं बनेंगे पंकज चौधरी: भाजपा हाई कमान ने कहीं पंकज चौधरी को लाकर योगी को कमजोर करने की मंशा तो नहीं पाले है! ये आशंका राजनीतिक विश्लेषकों के जेहन में घूम रही हैl क्योंकि इस समय देशभर में यदि कोई नेता चर्चित और लोकप्रिय नेता है तो वह हैं यूपी के सीएम योगीl पंकज चौधरी योगी विरोधी खेमे के हैं और अब उन्हें पार्टी हाई कमान का समर्थन भी है तो जाहिर है वह योगी को कमजोर करने के चक्कर में संगठन के लिए नुकसानदेह साबित होंगेl किसी व्यक्ति को 'पद' देने से उसके समाज का वोट नहीं मिलता हैl इसकी बानगी राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा से ली जा सकती हैl इसलिए 'पद' मिलने से पंकज चौधरी का कद तो जरूर बढ़ा है लेकिन कुर्मी समाज को वह भाजपा से कितना जोड़ पाएंगे, इसका फैसला आगामी विस चुनाव में होगाl क्योंकि उतर प्रदेश में जातीय समीकरण पर नजर डालें तो पिछड़ा वर्ग में यादव के बाद सबसे अधिक वोटर कुर्मी समाज के हैंl



