बदलता विमर्श: फिल्म धुरंधर है भारत के खिलाफ पाकिस्तान के जेहाद की कहानी!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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स्वामी चिन्मयानंद ने कहा:-
1-देश में मोदी- योगी की अग्रणी भूमिका ने सात दशक से चले आ रहे विमर्श (नेरेटिव) में शुरू किया बदलाव और होने लगा सनातन संस्कृति व हिंदुत्व का पुनर्जागरणl
-बांग्लादेश में डेढ़ साल से चल रही उथल- पुथल के पीछे पाकिस्तान की 'जमाते इस्लामी सोच' कर रही काम, अंतरिम सरकार का मुखिया मो. युनुस है अमेरिका की कठपुतलीl
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दिल्ली/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l इन दिनों भारत के बाहर और भीतर मची खलबली में जो दो मुख्य विंदु उभरकर सामने आये हैं उससे दुनिया में हमारे देश के दो नेताओं 'पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ' द्वारा क्रमशः 11 साल और आठ साल में बोये जा रहे 'राष्ट्रवाद और हिंदुत्व यानी सनातन पुनर्जागरण' के बीज अब वृक्ष के रूप में निखर रहे हैंl राष्ट्रवाद रूपी वृक्ष ने भारत विरोधी विमर्श को धराशाई करने की शुरुआत कर दी हैl इसका असर वॉलीवुड की फिल्म 'धुरन्धर' के जरिए देखा और महसूस किया जा सकता हैl इसी तरह सनातन और हिंदुत्व के पुनर्जागरण को देश में हुए हालिया प्रदर्शनों के मद्देनज़र समझा जा सकता हैl इसमें हिन्दूवादी संगठन बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं की सुरक्षा और नरसंहार के विरोध में आवाज बुलन्द कीl
दरअसल फिल्म धुरंधर 'भारत के खिलाफ पाकिस्तान के जेहाद' की कहानी है जो देश में हुई सच्ची घटनाओं पर आधारित हैl इसे 70 साल से इतिहास के पन्ने पर नहीं आने दिया गया थाl अब तक मीडिया का मजबूत अंग माना जाने वाला वॉलीवुड भी अलग नेरेटिव गढ़ता रहा हैl लेकिन फिल्म धुरंधर के पटकथा लेखक, निर्माता निर्देशक ने कलाकारों के जरिए उसे पलटकर रख दिया हैl उन्होंने सच्ची घटनाओं को आमजन के बीच यथावत परोसने का काम किया हैl
इसी प्रकार सोई हुई सनातन संस्कृति और हिंदुत्व को गोरखनाथ मठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 2017 में जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने तब उहोंने भरे सदन में कहा था कि ' मैं सनातनी हिंदू हूँ' जिसपर मुझे गर्व हैl मैं तुष्टीकरण में ईद नहीं मानता और न ही दरगाहों पर टोपी पहनकर चादर चढ़ाता हूँl मेरे लिए हर धर्म का सम्मान हैl लेकिन संविधान के तहत प्रदत्त कानून से किसी को खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती हैl
इन्हीं प्रकरण पर देश के पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री स्वामी चिन्मयानंद ने 'तहलका संवाद' से हुई विशेष बातचीत में कहा कि अब से करीब डेढ़ साल पूर्व 'जब पांच अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्ता पलट हुआ और वहां की पीएम शेख हसीना को निर्वासित होकर भारत में शरण लेनी पड़ी थी' तब पाकिस्तान परस्त जमाते इस्लामी के कट्टरपंथियों द्वारा किए जा रहे अत्याचार के विरुद्ध अल्पसंख्यक हिंदुओं ने एकजुट होकर विरोध किया थाl उस दौरान योगी आदित्यनाथ ने दुनिया भर के सनातनियों के लिए मन्त्र रूपी नारा दिया था कि 'बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ रहोगेl' इस मन्त्र का असर 2025 के आखिरी महीने में तब दिखा जब बांग्लादेश में आम चुनाव की घोषणा के बाद उपद्रव शुरू हुआ और फ़िर वहां के बाशिंदे अल्पसंख्यक और हिन्दू पिसने लगेl जब वह फ़िर विरोध में खड़े हुए तो भारत में भी हिंदूवादी संगठनों के साथ सनातनी भी उठ खड़े हुएl
स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि बांग्लादेश में दो हिंदुओं की नृशंस हत्या के बाद भारत के हर राज्य के सनातनियों की नींद टूटी और वे बांग्लादेशी हिंदुओं अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन कियेl इसके बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार घुटनों पर आईl हालांकि वहां हिंदुओं पर अत्याचार 54 साल में कभी कम तो कभी ज्यादा होता रहा हैl क्योंकि इसकी गवाही हिंदुओं की जनसंख्या देती हैl जब 1971 में यह देश दुनिया के नक्शे पर आया तब वहां हिंदुओं की संख्या लगभग 22 फीसदी थी जो अब घटकर महज आठ प्रतिशत के करीब रह गई हैl
इस तरह अब तक पाकिस्तान को उदार बताया जाता रहा: दरअसल जेहादियों की नज़र में जिन देशों में इस्लामी शासन नहीं है वहां के लोगों को वह काफ़िर मानते हैंl इसे बानगी से जानिए- जो हिन्दू इस्लाम मजहब में कनवर्ट होते हैं वह जेहादियों की भाषा सीखकर सर्वाधिक क्रूर बन जाते हैंl आतंक और पाकिस्तान पर्यायवाची हैं, साथ ही वहां के जेहादियों को भारत के कथित सेकुलरों का परोक्ष रूप से समर्थन मिलता हैl जिन्हें आज भी इसके प्रमाण चाहिए उन्हें 'पहलगाम और हमास' की घटनाओं पर नज़र डालनी चाहिएl क्योंकि इन घटनाओं पर कितने लोगों ने समर्थन और विरोध किया है उसी से पता चल जाएगाl इन्हीं कथित धर्मनिरपेक्ष लोगों की जुबान से बांग्लादेश में हो रहे उपद्रव में हिंदुओं के नरसंहार पर बोल नहीं फूट रहे हैंl जब हिंदूवादी संगठन आगे आये हैं तब सोये हुए सनातनियों की भी निद्रा भंग हुई हैl
ऐसे फिल्म धुरंधर ने बदल दिया नेरेटिव: वॉलीवुड अभी तक असली राष्ट्रद्रोहियों के चेहरों पर पर्दे डालता रहा हैl फिल्म धुरंधर की पटकथा ने असली घटनाओं को कहानी का रूप देकर जब कलाकारों के जरिए उसे पर्दे पर उकेरा है तो सबसे ज्यादा परेशानी पाकिस्तान को होने लगीl हमारे देश और दुनिया में भी इस फिल्म के समर्थकों और विरोधियों के जरिये अब तक जारी नेरेटिव के ध्वस्त होते और 'नये विमर्श' की पड़ रही नींव को देखा और समझा जा सकता हैl



