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नशे का धंधा: कोडीन कफ़ सिरप मामले में 'जांच की आंच' में फंसे गुर्गे पर बच गया रिंग मास्टर! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 नशे का धंधा: कोडीन कफ़ सिरप मामले में 'जांच की आंच' में फंसे गुर्गे पर बच गया रिंग मास्टर! 


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कैलाश सिंह-

विशेष संवाददाता

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-सात साल पूर्व भी जौनपुर में पकड़ी जा चुकी है कोडीन कफ़ सिरप 'फेन्साडील' की बड़ी खेप, जिसका तब बाज़ार मूल्य था लगभग 90 लाख, उसे बचाया था ड्रग एसोसिएशन के रिंग मास्टर नेl

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दिल्ली/लखनऊ/वाराणसी/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l एक महीने से जिस कोडीन कफ़ सिरप की तस्करी का मामला सुर्खियों में है, उसके रिंग मास्टर पर जांच एजेंसियों की परछाईं तक नहीं पड़ सकी हैl जबकि यह प्रकरण अब राजनीतिक चोले में भी तब्दील होते नज़र आने लगा हैl विपक्षी पार्टियां एक 'पूर्व माननीय' के बहाने जहां सत्ताधारी दल भाजपा को लखनऊ से लेकर दिल्ली तक घेरने में लगी हैं, वहीं एक विपक्षी पार्टी के सुप्रीमों के साथ उस व्यक्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जो कफ़ सिरप सिंडिकेट के रिंग मास्टर के छोटे बेटे का 'प्राइवेट गनर' हैl इस गनर का 'परिवर्तित नाम है राहुल यादव', जबकि रिंग मास्टर का यह बेटा हिस्ट्रीशीटर और दिवंगत माफिया मुन्ना बजरंगी का फंटर रहा हैl माफिया का दर्जनों करोड़ रुपये मारकर बैठा यह परिवार हर राजनीतिक दल के नेताओं से सांठगांठ रखने में माहिर हैl


 

इसका बड़ा भाई सत्ताधारी दल  में हाल के दिनों तक ओहदेदार था, जबकि एक सदस्य बहुरूपिया हैl उसने माफिया के पैसे से बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया हैl वह व्यवसायी होने के साथ मीडिया में भी दखल रखने का दावेदार हैl यह समूचा परिवार जिले के बड़े भू- माफिया में भी शुमार हैl अपराध और अपराधियों से भी इनका पुराना नाता रहा हैl कोडीन कफ़ सिरप जैसे तमाम धन्धों के संरक्षण के लिए इस कुनबे को राजनीतिक चोला भी धारण किए रहना पड़ता हैl


अब समझिये कोडीन कफ़ सिरप के रिंग मास्टर का खेल: ये दशकों से दवा माफिया है, दिलचस्प तो यह कि वह वर्षों से ड्रग एसोसियेशन का जिला और प्रदेश का पदाधिकारी एक साथ हैl इसकी दवा की छोटी सी दूकान जौनपुर के जहाँगीराबाद में है लेकिन बग़ैर दवा बिके हर महीने लाखों का मुनाफा देती हैl यहां बिलिंग का भी झंझट नहीं होता हैl दरअसल इस दूकान से 'दवा की दलाली' (ब्रोकरिंग)होती हैl यह रिंग मास्टर अरसे से कोडीन कफ़ सिरप की 'प्रति शीशी पर एक रुपया कट' लेता आ रहा हैl इसी ने तत्कालीन औषधि निरीक्षक से मोलभाव करके अपने उस गुर्गे को सात साल पूर्व बचाया था जिसके यहां से करीब 90 लाख की अवैध 'फेन्साडील' कफ़ सिरप बरामद हुई थीl इस बार भी उसके समेत कई गुर्गों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, लेकिन रिंग मास्टर साफ़ बचा हुआ हैl क्योंकि वह अपने यहां से कोई दवा नहीं बेचता है बल्कि उसका धंधा दलाली (कमीशन) का हैl हाल ही में कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट से जुड़े और इस बार नामजद एक गुर्गे ने रिंग मास्टर को फारच्युनर गाड़ी गिफ्ट की हैl,,,,,,, क्रमशः

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