सामाजिक सख्शियत: 'कैलास मानसरोवर' में स्नान का स्वप्न ज्ञान प्रकाश सिंह के लिए साकार हुआ!
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-कठिन डगर: चार दशक पूर्व 1982 में जौनपुर के गोधना गांव निवासी ज्ञान प्रकाश सिंह रोजगार की तलाश में पहुंचे माया नगरी मुंबई, खोले सुरक्षा एजेंसी और बन गए लाखों युवकों के रोजगारदाता,अब अपने गृह जनपद में समाजसेवा के जरिए राजनीतिक ज़मीन तलाश रहेl
---------------------------------------- कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
लखनऊ/ जौनपुर,(तहलका न्यूज नेटवर्क)l गायत्री परिवार की धार्मिक पत्रिका के एक अंक में लिखा है कि 'जो जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता हैl' यानी सोच से आत्म विश्वास बढ़ता है जो कठिन डगर को आसान बना देता हैl इसके बाद वही सोच सपने को साकार करती हैl ऐसे ही स्वप्नदर्शा जौनपुर के गोधना गांव निवासी ज्ञान प्रकाश सिंह हैं जो अब समाजसेवा के रास्ते राजनीति में कदम रख चुके हैंl इसके लिए उन्होंने भाजपा का प्लेटफार्म चुनाl अब वह इसी दल से जुड़कर आगे बढ़ रहे हैंl
धार्मिक प्रवृत्ति वाले ज्ञान प्रकाश सिंह के लिए ऐसी सोच जब सपने में तब्दील होकर दृढ़ संकल्प का रूप लेती है तो कभी- कभी मंजिल तक जाने वाली डगर बड़ी कठिन होती हैl खुली आँखों से ऐसा ही स्वप्न उन्हें जून 2019 में दिखा और वह 'कैलास मानसरोवर' (जो 1962 के युद्ध के बाद से चीन में है) के लिए निकल पड़ेl वहां की यात्रा के लिए पहला पड़ाव नेपाल की राजधानी काठमांडू थाl हर पड़ाव पर दो दिन रुकने, फिजिकल जांच के बाद वह छोटे हेलिकॉप्टर (चापड़ ) से नेपालगंज, फ़िर तिब्बत, हिलसा होते हुए समुद्र तल से 22 हज़ार फीट की ऊंचाई पर देवाधिदेव महादेव के निवास स्थल कैलास मानसरोवर तक पहुँच गएl वहां बसों के जरिए पर्यटकों अथवा श्रद्धालुओं को घुमाया जाता हैl वह भी बस में सवार हुए लेकिन दिल में यहां स्नान की लालसा हिलोरें ले रही थीl
मैदानी क्षेत्र में जून की तपती गर्मी में कैलास मानसरोवर पर्वत श्रृंखला पर 'माइनस डिग्री' के तापमान में बस में सवार श्रद्धालुओं के दांत बज रहे थे, लेकिन ज्ञान प्रकाश सिंह 'मानसरोवर' में डुबकी लगाने के उपाय खोज रहे थेl यहां स्नान प्रतिबन्धित हैl एक स्थान पर थोड़ी देर के लिए बस रुकी लोगों के फ्रेश होने के लिएl इसी बीच एक बाहरी व्यक्ति गमछा लिए उन्हें मिला, जिससे गमछा लेकर वह सरोवर में संकरे रास्ते से उतर गएl तीन डुबकी लगाकर वह बाहर आये और कपड़े पहन कर बस में सवार हो गएl अरसे की मुराद पूरी होने की खुशी से सर्द मौसम भी उन्हें खुशगवार लग रहा थाl वहां से लौटने पर उन्होंने अपने गांव गोधना में विशाल भवन 'कैलासपति' के निर्माण पर काम शुरू किया जो 2025 में बनकर तैयार हो गयाl
कोरोनाकाल में समाजसेवा बना फुल टाइम जॉब: वर्ष 2020 में कोरोनाकाल का वह भयावह दौर कोई नहीं भूलेगाl तमाम लोग अपनों से बिछड़कर काल के गाल में समा गएl लोग 'दवा और भोजन' के लिए तरस रहे थेl गरीब जेवर और ज़मीन बेच रहे थेl इस दौरान सवर्णों में तमाम ऐसे भी मध्यम परिवार थे जिनके घर अन्न नहीं था लेकिन वह सार्वजनिक रूप से सहायता भी नहीं लेना चाहते थेl इस तरह के तमाम परिवारों के जीवन की पतवार भी बने ज्ञान प्रकाश सिंहl इसके बाद अयोध्या में भागवान श्री राम मन्दिर निर्माण में भी जौनपुर की तरफ़ से बड़े सहयोगी बनेl
ज्ञान प्रकाश समाजसेवा के रास्ते राजनीति की तरफ़ बढ़ा रहे कदम: माया नगरी मुंबई से वर्ष 2010 के दशक में कई कथित उद्योगपति चुनावी मौसम में जौनपुर समेत पूर्वांचल के जिलों में बगुलों की तर्ज पर उतरते रहेl क्योंकि उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रीय दलों में 'कैश टिकट खिड़की' खुली थीl चुनावी बयार खत्म होते ही वह कथित उद्योगपति जिलों को छोड़ते गएl लेकिन 2019 में अपने गृह जनपद जौनपुर आये ज्ञान प्रकाश सिंह ने इस मिथक को कोरोनाकाल में तोड़ दियाl उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली और रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़कर धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों में अपनी सक्रियता जन जनप्रतिनिधियों की तरह जिले भर में बढ़ा दीl क्रमशः



