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पश्चिम बंगाल में महासंग्राम: ममता बनर्जी के लिए चुनाव से पहले एसआईआर बना सेमी फाइनल! Thallka Samvad

Tahalka Samvaad

 पश्चिम बंगाल में महासंग्राम: ममता बनर्जी के लिए चुनाव से पहले एसआईआर बना सेमी फाइनल! 


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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ एसआईआर को रुकवाने के लिए पहली बार कोई पार्टी 'तृणमूल कांग्रेस' पहुंची उच्चतम न्यायालयl

-ममता बनर्जी का एकमुश्त वोटर  'जो प्रदेश से बाहर हुए शिफ्ट अथवा मृतक और घुसपैठिए मतदाता गहन पुनरीक्षण सूची से होंगे बाहरl

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लखनऊ/ कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l देश में शुरू हुए निर्वाचन प्रक्रिया के बाद से कई बार 'मतदाता गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) 1980 के दशक तक हुआ लेकिन कभी किसी राजनीतिक दल या उसके मुखिया ने इसका विरोध नहीं किया और न ही न्यायालय की चौखट तक पहुंचाl लेकिन इसकी पहल पश्चिम बंगाल की मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी ने कर दी हैl हालांकि पिछले साल हुए बिहार विधान सभा चुनाव से पूर्व विपक्षी पार्टियों कांग्रेस, राजद आदि ने भारत निर्वाचन आयोग पर तमाम गड़बड़ी सम्बन्धी आरोप लगाकर उच्च न्यायालय में दस्तक दी थीl मामला आज भी कोर्ट में चल रहा हैl विपक्ष कोई ठोस सुबूत नहीं दे सका हैl जबकि ममता बनर्जी ने तो सुप्रीम कोर्ट से 'एसआईआर' को ही रुकवाने की मांग परोक्ष रूप से कर दी हैl उनका आरोप है कि भारत निर्वाचन आयोग भाजपा के आईटी सेल के जरिये 'मतदाता गहन पुनरीक्षण' का कार्य कर रहा हैl हालांकि उनके पास बिहार मामले में कोर्ट पहुंचे विपक्षी दलों की तरह कोई ठोस सबूत या आधार नहीं हैl


राजनीतिक विश्लेषकों एस पांडेय आदि के नजरिये से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की परेशानी को देखें या समझें तो देशभर में शुरू हुए एसआईआर को लेकर दो प्रांतों उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने हल्ला मचायाl यूपी में सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने पहले विरोध किया और बाद में जब मतदाता सूची से 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटने (अधिकतर शहरी वोटरों के नाम कटे) के बाद उन्हें लगा कि भाजपा का ही अधिक नुकसान है तो वह आयोग के समर्थन में आ गएl कुल मिलाकर 'फायदा- नुकसान' के भंवर में फंसे अखिलेश यादव असमंजस में पड़े हैंl जबकि पश्चिम बंगाल में हुई एसआईआर में लगभग 58 लाख वोटरों के नाम कटे हैंl इनमें घुसपैठियों के अलावा बड़ी संख्या में वह लोग हैं जो प्रदेश अथवा दुनिया (मृतक) छोड़ चुके हैंl ऐसे लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कटने के बाद ममता बनर्जी तिलमिला उठी हैंl


प्रदेश छोड़ने वाले या मृतकों के नाम पर होता रहा है बड़ा खेल: पश्चिम बंगाल में एसआईआर शुरू होते ही बांग्लादेशी घुसपैठिए अपने देश में वापसी के लिए भारतीय सीमा का रुख करने लगेl उन्हें डर है कि पकड़े गए तो वे 'डिटेंशन सेंटर' में डाल दिये जाएंगेl तमाम ऐसे लोग तो मिले फार्म वापस ही नहीं किएl क्योंकि जिन्होंने फार्म जमा किए उनके दस्तावेज जांच में जाली साबित हुएl दूसरी तरफ मृतकों और प्रदेश छोड़ चुके लोगों के नाम पर वोट डालने का खेल सीपीएम के दौर में शुरू हुआ था, जिसे ममता बनर्जी की पार्टी कैडर ने और बेहतर ढंग से अपना लियाl अब वही नाम मतदाता सूची से कट रहे हैं तो वह हताशा में हैंl क्योंकि ऐसे लोगों के नाम पर फर्जी मतदान सत्तारूढ़ दलों के लिए सबसे बड़ा हथियार होता रहा हैl 


संविधान में निर्वाचन आयोग को मिला उत्तरदायित्व: भारत निर्वाचन आयोग को संविधान में यह जिम्मेदारी या उत्तरदायित्व मिला है कि आयोग मतदाता सूची का शुद्धिकरण समय- समय पर कर सकता हैl यही कारण है की तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग पर आरोप लगा रही हैं कि आयोग केंद्र में सत्तारूढ़ दल भाजपा के आईटी सेल का उपयोग कर रहा हैl वह नहीं चाहती हैं कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर हो, क्योंकि उनका प्रत्यक्ष व परोक्ष वोटबैंक धराशाई हो रहा हैl वह किसी दल की पहली ऐसी नेता हैं जो एसआईआर रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैंl


पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी समीकरण बदलेगा: पहली बार ममता बनर्जी 'बांग्ला हिंदुत्व' की बात कर रही हैंl क्योंकि उनके विधायक रहे 'हुमायूँ कबीर' उनके ही लिए भस्मासुर बन गए हैंl हालांकि यह भी चर्चा चल रही है कि मुस्लिम वोटर कांग्रेस या सीपीएम की तरफ़ चले गए तो और परेशानी होगी, लिहाजा उन्होंने ही हुमायूँ कबीर को एक समीकरण के तहत अलग किया हैl जबकि वह खुद भाजपा के हिंदुत्व कार्ड के जवाब में 'बांग्ला हिंदुत्व' का दांव खेलने लगी हैंl इस तरह पश्चिम बंगाल में चुनावी समीकरण है तो उलझा हुआ लेकिन 'एसआई आर' उनके गले में मछली के कांटे सरीखे ऐसा फंसा है कि वह न तो उगल पा रही हैं और न ही उनको निगलते बन रहा हैl इस प्रकार चुनाव पूर्व उनके लिए यह सेमी फाइनल रूपी संघर्ष चल रहा हैl क्रमशः

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