इन्तिहा हो गई: वेनेजुएला पर ट्रंप और बांग्लादेश में युनुस हिंदुओं पर ढा रहे ज़ुल्म!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-युद्ध रुकवाने और शांति के पैग़ाम का ढोंग रचने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दरअसल अपनी ध्वस्त हो रही अर्थ व्यवस्था को संभालने और ख़ुद मुख़्तारी कायम रखने के लिए दुनिया में तख्ता पलट कर युद्ध में झोंक रहे: स्वामी चिन्मयानन्द
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दिल्ली/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l इस समय समूची दुनिया में बढ़ी अस्थिरता राजनीतिक भूकम्प सरीखे नज़र आ रही हैl कुटिनीतिक विशेषज्ञ इन सबके पीछे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अमेरिकी डीप इस्टेट और वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का हाथ मानते हैंl श्रीलंका, नेपाल हो या पांच अगस्त 2024 को बांग्लादेश में हुआ तख्ता पलट हो, इसके पीछे अमेरिकी विस्तारवादी नीति का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैl दुनिया में मची उथल- पुथल को लेकर हमारे देश के पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री स्वामी चिन्मयानन्द भी कुटिनीतिज्ञों के विचार का समर्थन करते हैंl वह 'तहलका संवाद' से हुई खास बातचीत में वेनेजुएला की घटना को 'पेट्रो डालर का खेल' और बांग्लादेश में हो रहे 'हिंदुओं के नरसंहार को पाकिस्तान परस्त कट्टर पंथियों की जिहादी मानसिकता' करार देते हैंl
कुटिनीतिज्ञों के मुताबिक: वेनेजुएला के राष्ट्रपति दम्पति के अपहरण या गिरफ्तारी, जो भी कहा जाए इसके पीछे 'पेट्रो डालर' का खेल माना जा रहा हैl प्राकृतिक सुंदरता वाले इस देश के तत्कालीन राष्ट्रपति का गुनाह अमेरिका की नज़र में सिर्फ़ इतना है की उसने अपनी पेट्रोलियम सम्पदा का कारोबार केवल 'डालर' की बजाय दूसरे देशों की करंसी में भी करना शुरू कर दिया थाl इससे डालर का अस्तित्व खतरे में पड़ने लगा था, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नागवार लगाl यह दीगर है कि उन्होंने ड्रग तस्करी आदि आरोप लगाए हैं जो बेबुनियाद हैंl इसी का प्रथम संस्करण था दुनिया पर अमेरिकी 'टैरिफ वॉर' जो फेल होता जा रहा हैl अब वेनेजुएला पर किया गया हमला 'पेट्रो डालर' का खेल है, जो भी देश अपने पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री दूसरे देशों से 'डालर' की बजाय अन्य करंसी में करेगा वह अमेरिकी हमले का शिकार होगा!
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अनवरत अत्याचार, नरसंहार के असल मायने: इस देश में पूर्व पीएम खालिदा जिया के शासनकाल में महीनों प्रवास के दौरान स्वामी चिन्मयानन्द ने महसूस किया था कि पाकिस्तान से अलग हुए बांग्लादेश देश में 'जातिवाद नहीं, बल्कि भाषा' को लेकर संघर्ष थाl यहां दो ही प्रमुख राजनीतिक दल 'आगामी लीग और बीएनपी रहेl बीएनपी की मुखिया खालिदा जिया थींl उनके निधन के बाद दो 'बेगमों' के बीच जारी वर्चस्व के संघर्ष पर विराम लग गयाl क्योंकि दूसरी बेगम शेख हसीना तख्ता पलट के बाद भारत में निर्वासन का जीवन व्यतीत कर रही हैंl खालिदा जिया के इंतकाल से कुछ दिन पूर्व उनके बेटे 'तारिक रहमान' ने बांग्लादेश आकर अपनी पार्टी बीएनपी की कमान संभाल ली हैl यदि फरवरी में आम चुनाव हुए तो उन्हें सहानुभूति की लहर सत्ता तक पहुंचा सकती हैl जबकि शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को अमेरिकी पिट्ठू और अंतरिम सरकार का मुखिया मो. युनुस पहले ही प्रतिबन्धित कर चुका हैl
जमाते इस्लामी और कट्टर पंथियों के बस का नहीं है चुनाव जीतना: स्वामी चिन्मयानन्द कहते हैं कि मो. युनुस नहीं चाहता है कि बांग्लादेश में चुनी हुई सरकार सत्ता पर काबिज़ होl क्योंकि वह खुद भी चुनाव के जरिये शीर्ष नेतृत्व की कुर्सी तक नहीं पहुँच सकता हैl उसके सहयोग में देश के भीतर आंतरिक उपद्रवी 'जमाते इस्लामी और कट्टरपंथी' चुनाव में वोट किस मुंह से मांगने जाएंगे, वैसे वे चुनाव लड़ना भी नहीं जानतेl उन्हें केवल धर्म के नाम पर जिहाद करने की महारत हासिल हैl वह चाहते हैं कि युनुस जैसा 'कठपुतली' शासन चलाता रहे ताकि 22 फीसदी से घटकर बचे आठ प्रतिशत अल्पसंख्यक अथवा हिंदुओं को खत्म कर दिया जाएl इसी जिहादी मानसिकता का नतीजा है वहां हो रहा नरसंहारl
बांग्लादेश में पांच हिंदुओं का कत्ल, महिला के साथ रेप: दो हफ़्ते में बांग्लादेश में पांच हिंदुओं की नृशंस हत्या और एक महिला के साथ गैंगरेप ने मानवता को शर्मसार कर दिया हैl दुनिया के मानवाधिकार संगठन और शीर्ष नेताओं की जुबान यहां इंसानियत पर हो रहे अत्याचार पर भी बंद हैl दो दिन में एक पत्रकार को गोली मारी गई और महिला के साथ गैंगरेप के बाद उसे पेड़ से बांधकर उसकी चोटी यानी सिर का बाल भी काट दिया हैl युनुस सरकार ने भारत द्वारा एक बांग्लादेशी खिलाडी़ के आईपीएल से बाहर किये जाने के बाद अपने यहां मैच के प्रसारण पर रोक लगाकर खुद के आर्थिक फायदे पर ताला जड़ दियाl क्रमशः
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