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एक राजनीतिक शख्शिसियत: साढ़े चार दशक से चाल में ठसक, व्यवहार में लचक का नाम है कुंवर वीरेंद्र! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad



 एक राजनीतिक शख्शसियत: साढ़े चार दशक से चाल में ठसक, व्यवहार में लचक का नाम है कुंवर वीरेंद्र! 

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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-रिकार्ड: वर्तमान में 14 वीं बार जौनपुर को -ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह यूपी सीएलडीएफ के अध्यक्ष (दर्जा राज्य मन्त्री) और यूपी स्टेट को- ऑपरेटिव बैंक के वाइस चेयरमैन व जौनपुर के निर्दल जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैंl

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लखनऊ/ जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l भाजपा नेता और पूर्व एमएलसी कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह जौनपुर जनपद के ऐसे नेता हैं,जिनके पास 45 साल से जिस तरह निरंतर 'पद और पावर' कायम है,उसी तरह इनकी 'चाल में ठसक और व्यवहार में लचक' बनी हुई हैl इनकी खासियत है विरोधी को भी अपना बना लेनाl  वर्ष 1990 में कांग्रेस से एमएलसी रहेl वर्ष 1997 में कल्याण सिंह के दौर में भाजपा से जुड़ेl श्री सिंह ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में अपनी धमक कायम की फिर भी वह मातृ भूमि से सदा जुड़े रहेl ज्यादातर नेता टिकट मिलने के बाद चुनाव प्रचार के दौरान आमजन से रूबरू होते हैंl लेकिन श्री सिंह को आज भी जौनपुर की लगभग 1700 ग्राम पंचायतों में हर समुदाय के दर्जनों लोग उन्हें 'कुंवर साहब' के नाम से जानने वाले तीन पीढ़ियों के लोग मौजूद हैंl


चुनावों के दौरान कुंवर वीरेंद्र की नेताओं के लिए बढ़ जाती अहमियत: पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की जरूरत बन जाते हैं कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंहl चूंकि हर जाति वर्ग,समुदाय में इनकी व्यावहारिक पकड़ है लिहाजा प्रत्याशी इनका सहयोग वहां लेते हैं जहां 'पैसा और बहुबल' फेल हो जाता हैl विदित हो कि वर्ष 2026-27 चुनावी साल में यूपी कदम रख चुका हैl मार्च के बाद त्रि-स्तरीय पंचायत की तैयारी चल रही हैl जिन्हें मैदान में उतरना है वे खुद के लिए 'गाड फादर' की तलाश में निकल पड़े हैंl 


कुंवर वीरेंद्र की नजर में कथित बाहुबली नेताओं का काफिला: नये वर्ष में एक संक्षिप्त मुलाकात में कुंवर वीरेंद्र कहते हैं कि 'बाहुबली' शब्द तो राज घरानों में वीर राजकुमारों के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है,जिसका जिक्र कालांतर में खासकर दक्षिण की फिल्मों में किया गया, लेकिन मीडिया ने इसे आपराधिक दुनिया से राजनीति में आये लोगों पर चस्पा कर दियाl इसी का नतीजा वाहनों का काफिला बनकर सामने आयाl दिलचस्प तो ये है कि जिस कलर के वाहन पीएम, सीएम के काफिले में होते हैं वही कलर ये कथित बाहुबली नेता भी अपने वाहनों के काफिले में शामिल करते हैंl जबकि इनके काफिले से अब आमजन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता हैl हालांकि कथित बाहुबलियों के समर्थक सोशल मीडिया पर रील चलाकर उन्हें रीयल लाइफ से काटकर ग्लैमराइज करते हैं, जिसके चलते बेरोजगार नौजवान खुद कथित बाहुबली बनने के चक्कर में अपना भविष्य अंधेरी सुरंग की तरफ़ मोड़ रहे हैं जो समाज के लिए घातक हैl


कांग्रेस से शुरू की राजनीति भाजपा से ही समापन: कुंवर वीरेंद्र ने वर्ष 1984 में पूर्व मन्त्री अरुण कुमार सिंह मुन्ना के साथ कांग्रेस से राजनीतिक दुनिया में कदम रखा थाl उसी दौरान वह पहली बार जिला को- ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन बने थेl कांग्रेस में वह जिलाध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय संगठन मन्त्री तक रहेl इस दौरान उन्हें महाराष्ट्र समेत कई राज्यों का प्रभार मिला तब इनका राजनीतिक दायरा भी प्रदेश से बाहर राष्ट्रीय पैमाने पर आ गया थाl वर्ष 1990 में वह कांग्रेस से एमएलसी बनेl इससे पूर्व 1988 में निर्दल जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए थेl बाद में कल्याण सिंह के दौर में भाजपा से जुड़े और आज के रक्षा मन्त्री राजनाथ सिंह के साथ सतत जुड़ाव बना हैl चुनावी राजनीति के सवाल पर वह कहते हैं कि धनबल और बाहुबल के दौर में अब सामान्य व्यक्ति के लिए यह सपने की भी बात नहीं रहीl यदि राजनीतिक दलों से बग़ैर पैसे खर्च किए टिकट मिले तभी आम इंसान चुनावी समर में उतर सकता हैl

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