बहाल हुआ लोकतंत्र: बांग्लादेश में बीएनपी नेता तारिक रहमान की सरकार के सामने होगी विपक्षी कट्टरपंथी चुनौती!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-बांग्लादेश में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी 'बीएनपी' की नई सरकार दिलाएगी डेढ़ साल से मो. युनुस के अंतरिम शासन से मुक्तिl कट्टरपंथी दलों जमाते इस्लामी व नेशनल सिटीजन पार्टी को राजनीतिक मैदान में मिली तगड़ी शिकस्तl
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दिल्लीl(तहलका न्यूज नेटवर्क) बांग्लादेश में कट्टरपंथी सत्ता में नहीं आ सके लेकिन वह विपक्षी दल के रूप में सत्तासीन होने वाले बीएनपी नेता तारिक रहमान की सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेंगेl उन्हें फ़िर से नये बांग्लादेश के निर्माण के लिए भारत का सहयोग लेना सबसे अहम होगाl लेकिन भारतीय सीमा से लगी अधिकतर सीटों पर जमाते इस्लामी को मिली जीत भी दोनों देशों के फिर से बेहतर सम्बन्ध बनाने में रोड़ा बनेंगीl क्योंकि इन सीटों पर कट्टरपंथी ही जीते हैं जो बड़ी चुनौती बनेंगेl जमाते इस्लामी ने 68 सीट और इसका गठबंधन 76 सीटें लेकर मुख्य विपक्षी दल बन गया हैl कथित आंदोलनकारी छात्रों का दल भी नेशनल सिटीजन पार्टी बनाकर मैदान में आया था लेकिन उसको मिली महज छह सीटों ने यह साफ़ कर दिया है की पूर्व पीएम 'शेख हसीना' से वहां की जनता उतनी नाराज नहीं थी जितना उपद्रव तस्वीरों में नज़र आयाl चूंकि युनुस की अंतरिम सरकार ने भारत में शरण लिए अपदस्थ पीएम शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था यह सोचकर कि कट्टरपंथी संगठन सत्ता में आ जाएंगे, लेकिन उनके मंसूबे पर पब्लिक ने पानी फेर दियाl उनके लिए बीएनपी एक मात्र विकल्प थी जिसे वोट देकर जनता ने शीर्ष पर बैठा दियाl
पाकिस्तान को लगा झटका: बांग्लादेश में बीएनपी नेता तारिक रहमान की जीत से सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगा हैl फ़िर भी वह बांग्लादेश के इस्तेमाल के फिराक में हैl राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडे' मानते हैं कि बांग्लादेश पर तीन देशों अमेरिका, चीन और पाकिस्तान की नज़र रहेगीl रहमान के लिए देश की अर्थव्यवस्था बनाए रखने के लिए पूर्व पीएम व आवामी लीग की नेता 'शेख हसीना' की तरह भारत से बेहतर सम्बन्ध बनाकर चलने होंगेl क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के मुकाबले बहुत ज्यादा हैl जाहिर है पाक के पास बांग्लादेश को देने के लिए कुछ भी नहीं हैl वह सैन्य ताकत में बांग्लादेश से जरूर आगे हैl
साढ़े तीन दशक रहा दो बेगमों का राज: बांग्लादेश में करीब 35 साल तक दो बेगमों खालिदा जिया और शेख हसीना का शासन चलाl वर्ष 1991 में डेढ़ दशक के सैन्य शासन के बाद पहली बार महिला प्रधानमन्त्री के रूप में खालिदा जिया ने सत्ता संभाली थीl इसके बाद 1996 में आवामी लीग की नेता शेख हसीना सत्ता में आईंl फ़िर 2001 से 2006 तक खालिदा सत्ता में रहींl इसके बाद पांच अगस्त 2024 में तख्ता पलट तक शेख हसीना पीएम रहींl इनके शासन में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था तेजी से ऊंचाई नापती रहीl इस तरह साढ़े तीन दशक तक यहां की सत्ता इन्हीं दो बेगमों के बीच रहीl पिछले साल खालिदा जिया का इंतकाल होने के बाद उनके बेटे तारिक रहमान ने बीएनपी की कमान संभालीl विगत 17 साल से लंदन में रह रहे तारिक रहमान ने कम वक़्त में अपनी पार्टी बीएनपी को शिखर पर पहुंचाने के साथ यहां फ़िर पुरुषों का शासन ला दियाl
मो. युनुस का अंतरिम शासन अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए काल बना: पांच अगस्त 2024 को यानी अब से डेढ़ साल पूर्व हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्ता पलट हुआ थाl तब से अमेरिकी डीप इस्टेट की शह पर वहां अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनुस अस्थाई सरकार चला रहे थेl भारत में शरण लिए वहां की अपदस्थ पीएम शेख हसीना की पार्टी को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गयाl छात्र आंदोलन के नाम पर तख्ता पलट में मुख्य भूमिका निभाने वाले कट्टरपंथियों ने अलग दल 'नेशनल सिटीजन पार्टी' बना लिया, जिसे महज छह सीट पर जीत मिलीl मुख्य विपक्षी दल बने 'जमाते इस्लामी' को 68 सीटें मिलींl पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत के बाद विगत 17 साल से लंदन में रहने वाले उनके 60 वर्षीय उनके बेटे 'तारिक रहमान' ने पार्टी की कमान संभाली और चुनाव की घोषणा के बाद बांग्लादेश पहुंचेl इस तरह कम वक़्त में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को चुनाव में मिली 209 और गठबंधन को मिलाकर 212 सीटों ने एक बार फ़िर इस देश की सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा दिला दियाl यहां कुल सीट 300 में से 297 का चुनाव परिणाम निर्वाचन आयोग ने घोषित कियाl बाकी तीन में दो सीटों का परिणाम स्थगित रखा है और एक सीट पर प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव स्थगित हो गया थाl

