मिशन यूपी: संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के मायने, कहां से चला उनपर पत्थर!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-सनातन धर्म विस्तारवादी नहीं है,बल्कि 'संघ' सनातनियों को जागृत करने का काम करता हैl
मोहन भागवत का लखनऊ प्रवास के दौरान प्रसंगवश यह कहना कि- हिंदुओं को घर वापसी पर उचित सम्मान मिलना चाहिएl इसमें मुसलमानों के साथ कहां अन्याय है?
-बौखलाए जमीयते उलेमाए हिन्द के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के मुखिया अरशद मदनी ने कहा- संघ प्रमुख का बयान सांप्रदायिक संघर्ष को बढ़ावा देने वाला हैl इसके बाद हरदोई क्षेत्र में ट्रेन के कोच पर हुआ पथराव कई सवाल खड़े करता हैl
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दिल्ली/लखनऊ/नागपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l मिशन यूपी-2027 के तहत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का फोकस उत्तर प्रदेश में बढ़ते ही जहां विपक्षी दलों कांग्रेस और सपा की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं, वहीं धार्मिक कट्टरपंथी नेता अरशद मदनी का बयान 'जिन्ना की मुस्लिम लीग' वाली नीतियों को तरोताजा करता हैl राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मोहन भागवत के हिंदुओं की घर वापसी वाले बयान के काउंटर में अरशद मदनी के 'खूनी संघर्ष' वाले बयान का मतलब यही निकल रहा है कि यदि सनातनी घर वापसी किए तो 'हिन्दू- मुस्लिम के बीच खूनी संघर्ष' का कारण बनेगाl कट्टरपंथी अरशद मदनी शायद अनभिज्ञ हैं कि हजारों साल पुराने 'सनातन धर्म संस्कृति' के अस्तित्व काल से ही विस्तावाद जैसा शब्द या मंशा उसके साथ नहीं जुड़े, बल्कि दूसरे धर्मों खासकर 'इस्लाम और ईसाई' में विस्तावादी नीति के चलते ही भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में 'डेमोग्रेफिक चेंज' देखने- सुनने को मिलते रहे हैंl यूपी में ही आयेदिन 'लव जेहाद- लैंड जेहाद' आदि रूपों में धर्मांतरण के उदाहरण मिलते हैंl अब तो तमाम लोग अपने पुरखों की हिन्दूवादी सरनेम भी लगाने लगे हैंl उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में केराकत तहसील के एक गांव के दर्जनों परिवार अपने पुरखों का सरनेम लगाकर फक्र महसूस कर रहे हैंl
दरअसल पिछले दिनों प्रदेश की राजधानी लखनऊ प्रवास के दौरान आरएसएस के सर संघ चालक डॉ मोहन भागवत ने प्रसंगवश एक सवाल के जवाब में कहा कि- इस देश के जो मुसलमान हैं वह अरब या तुर्क से नहीं आये हैं, वो इसी देश के हैंl इसी तरह जो इसाई हैं वह भी यूरोप से नहीं आये हैं, वह भी इसी देश के हैंl जबकि इन दोनों मजहब के संचालक निरंतर विस्तार की कोशिश करते रहते हैंl अब सवाल ये है कि यदि ये शांतिप्रिय हैं तो अपने धर्म विस्तार के लिए दूसरे धर्म के लोगों का धर्मांतरण क्यों कराते हैं? इसके लिए पैसा क्यों खर्च करते हैं? संस्थाएं बनाकर लोगों को क्यों डराते हैं? धमकी और लालच क्यों देते हैं? इसके बाद भी दावा करते हैं कि जिन लोगों ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया है उनकी अपनी स्वेच्छा हैl मोहन भागवत ने तो बस यही कहा कि जो पुनर्धर्मांतरण करके घर वापसी करते हैं उन्हें हिंदू समाज यानी सनातन धर्म में पूरा सम्मान मिलना चाहिएl इसी बयान पर अरशद मदनी को मिर्ची लगी और वह बौखलाहट में 'संप्रदायिक हिंसा और खूनी संघर्ष' जैसी बात बोल गएl
ट्रेन यात्रा में मोहन भागवत पर चला पत्थर हमला था या इत्तिफाक: वन्देभारत ट्रेन से लखनऊ से मेरठ जाते समय हरदोई के पास सर संघ चालक मोहन भागवत के कोच के निकट वाले डिब्बे पर हुई पत्थरबाजी को रेलवे पुलिस व अन्य सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें दूसरे कोच में शिफ्ट कर दियाl इसे कुछ लोग क्रिकेट खेल रहे बच्चों की गेंद का नाम देकर इत्तिफाक बता रहे हैं, जो जांच के बाद ही साफ़ होगा किंतु उनपर हमला मानकर सुरक्षा कर्मियों द्वारा उन्हें दूसरे कोच में शिफ़्ट किया जाना कई सवाल खड़े करता हैl राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडेय' इसे राजनीति से प्रेरित धार्मिक उन्माद का पत्थर मानने से गुरेज नहीं करते हैंl उनका कहना है कि धर्म की आड़ में राजनीतिक तुष्टिकरण करने वाली कथित सेकुलर पार्टियों की ऊर्जा से ही अरशद मदनी के उकसाऊ बयान के बाद ये पत्थर उछले हैंl मदनी को लग रहा है कि उनकी धार्मिक दुकान जहां प्रभावित होगी वहीं उनको मिलने वाली तुष्टिकरण नामक ऊर्जा की सप्लाई भी बाधित हो जाएगीl दरअसल इनके जैसे लोग धर्म का भय दिखाकर कौम को डराते हैं और गद्दीनसीन होते हैंl ऐसे लोगों के चरण चुम्बन कथित सेकुलर हिन्दू भी करते हैंl इन्हीं ताकतों को पाकर ऐसे कट्टरपंथी लोग धर्मांतरण का धंधा चलाते हैंl
संघ के मिशन यूपी के मायने: वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के मध्य भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा का वह बयान याद करिए जब उन्होंने कहा था कि 'भाजपा खुद सक्षम है,अब उसे आरएसएस की जरूरत नहीं हैl' यही वह समय था जब कथित पार्टी हाई कमान अमित शाह के इशारे पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनका ही मंत्रिमंडल उन्हें उखाड़ने में लगा था और अधिकतर टिकट वितरण भी दिल्ली से हो रहा थाl संघ के स्वयं सेवक घर बैठ गए और पार्टी में बढ़ा असन्तोष कोर वोटरों के साथ कार्यकर्ताओं को भी घरों में कैद होने को विवश कर दिया थाl नतीजतन पार्टी 240 के अंक पर अटक गईl जब पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर संघ और भाजपा के बीच गतिरोध दूर हुआ तब भाजपा हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र और बिहार तक फतह हासिल करती चली गईl उसी कड़ी का हिस्सा है पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेशl मिशन यूपी के तहत ही संघ प्रमुख मोहन भागवत का गोरखपुर, लखनऊ और मेरठ का दौरा माना जा सकता हैl
मोहन भागवत और योगी की तीन मुलाकात: अयोध्या की राम जन्म भूमि मन्दिर परिसर, गोरखपुर और अब इसी हफ़्ते लखनऊ में संघ प्रमुख से अलग- अलग हुई तीन मुलाकात कुल 145 मिनट की रही जिसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैंl लेकिन प्रदेश की राजधानी में संघ प्रमुख से दोनों डिप्टी सीएम भी मिलेl इससे यह जाहिर होता है कि 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान देश- प्रदेश की राजधानी में आये सांगठनिक गतिरोध की कसक को मोहन भागवत ने दूर करने की प्रक्रिया पर संवाद किया हैl
इसलिए सहमी हैं ममता बनर्जी और डरे हैं अखिलेश यादव, राहुल गाँधी: बिहार प्रदेश में विधान सभा चुनाव से पूर्व हुए एसआईआर और आये नतीजों ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को हिलाकर रख दियाl इसी कारण वह सुप्रीम कोर्ट तक दौड़कर थक गईंl इधर सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव पहले तो सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान पर खुश हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि एसआईआर में कट रहे साढ़े तीन करोड़ नामों में अधिकतर वोटर भाजपा के हैंl जबकि योगी ने पार्टी को संकेत दिया था कि अपने वोटरों के फार्म दुरुस्त कराएंl जब यह बात अखिलेश यादव को समझ आई तब उनके बयान भी पलटने लगेl इस बीच असदुद्दीन ओवैसी के यूपी आगमन की दस्तक और बसपा सुप्रीमों मायावती के अकेले चुनावी समर में उतरने की घोषणा ने अखिलेश के साथ कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को भी विचलित कर दिया हैl
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ए आई समिट कार्यक्रम में कथित युवा कांग्रेसियों का अर्ध नग्न प्रदर्शन शर्मनाक: देश की राजधानी दिल्ली में चल रहे ए आई समिट कार्यक्रम में दुनिया के सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधि, कार्पोरेट घराने शामिल हैंl ऐसे में कुछ कथित युवा कांग्रेसियों द्वारा पहुंचकर प्रधान मंत्री के खिलाफ नारेबाजी से दुनिया में जहां राष्ट्रीय छवि दागदार हुई वहीं कांग्रेस के प्रति देश के युवाओं का मन भी विषाक्त हो सकता हैl यदि वह कांग्रेसी थे अथवा नहीं थे, दोनों स्थितियों में राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और प्रियंका वाड्रा गाँधी व पार्टी मुखिया को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिएl इसे कांग्रेस का डर कहें या लोकतंत्र में संवैधानिक पदों और राष्ट्र की मर्यादा को लेकर अज्ञानता मानें, इन दिनों संसद में 'सदन से लेकर एआई समिट' तक जिस तरह राहुल गाँधी और उनकी पार्टी द्वारा जो किया जा रहा है उससे राष्ट्रीय छवि और संवैधानिकता के दागदार होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैl

