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कातिल माझा पर सीएम की सख्ती: बिक्रेता व क्रेता बनेंगे हत्यारोपी! Tahalka Samvad

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 कातिल माझा पर सीएम की सख्ती: बिक्रेता व क्रेता बनेंगे हत्यारोपी! 

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कैलाश सिंह/रुद्र प्रताप सिंह

विशेष संवाददाता/ब्यूरो चीफ़

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लखनऊ/जौनपुर,(तहलका न्यूज नेटवर्क)l एक दशक से हर साल दिसम्बर- जनवरी महीने में पतंग की डोर 'कातिल माझा' बन जाती हैl यह डोर उस मकड़जाल सरीखे हो जाती है जिसमें इंसान मक्खी की तरह उलझकर अपनी जान गंवा बैठता थाl मकड़जाल में मक्खी का काल बनती है मकड़ी, लेकिन चाइनीज या सिंथेटिक माझे तो दोधारी तलवार सरीखे इंसान की गर्दन और चेहरे को निशाना बनाते हैंl पतंग की इस 'कातिल डोर' में उलझकर हर साल प्रदेश भर में दर्जनों लोग जान गंवाते रहे हैं, लेकिन अनाथ हुए परिवारों की आवाज़ 'शासन तो दूर प्रशासन' तक भी नहीं पहुंचती थीl केवल सामाजिक संस्थाएं ही जागरुकता अभियान चलाती रही हैंl अब मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ की नज़र जब कातिल माझे पर पड़ी तो ज़मीन पर क्रेता- बिक्रेता की जहां रूह फना होने लगी, वहीं आसमान में परवाज़ करने वाली पतंगें भी उड़ान भरने से सहम गईंl



सीएम का सख्त आदेश, कौन बनेगा हत्यारोपी: सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त आदेश दिया है कि चीनी माझे से यदि किसी शख्स की जान जाती है तो नायलालन व सिंथेटिक थ्रेड एवं कोटेड विद ग्लास (काँच) थ्रेड का भंडारण, निर्माण व बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगीl सीएम ने लखनऊ के बाज़ारखाला निवासी शोएब नामक युवक की चीनी माझे से कटी गर्दन से हुई उसकी मौत को गंभीरता से लेकर यह आदेश जारी किया है, जिसपर सम्बन्धित अधिकारियों ने अमल किया तो अब प्रदेश भर में आमजन की जान का जोखिम नहीं रहेगाl हालांकि योगी के इस आदेश के बाद से आसमान पतंगों से खाली नज़र आने लगा हैl जब खरीददार ही नहीं रहेंगे तो भंडारण और निर्माण करने वाले कातिल माझे से खुद दूरी बना लेंगेl

दरअसल दशकों पुरानी पतंगबाज़ी का खेल बहुत रोचक और भारतीय त्योहारों जैसे मकर संक्रान्ति (जब भागवान सूर्य उत्तरायण होते हैं) का सूचक भी रहा हैl एक दशक पूर्व तक इस खेल में गाहे- बगाहे बच्चों के छत से गिरने की खबरें मिलती थीं, लेकिन सड़कों पर गले नहीं कटते थेl कारण, उसकी डोर सूती होती थी जो राहगीर या बाइक सवार के गले में फंसकर टूट जाती थीl इतना ही नहीं, खिलाड़ियों में चल रही पतंगबाज़ी प्रतिस्पर्धा में एक-दूजे की डोर काटने से जीत- हार के फैसले में किसी अन्य को क्षति भी नहीं होती थी,लेकिन हाल के दशक में 'सिंथेटिक माझे' ने खेल के फैसले को रोक दिया और सड़कों पर बाइक से चलने वालों के लिए 'काल' बन गयाl जौनपुर की घटनाओं को बानगी मानें तो पिछले साल के अंतिम महीनों में  दो परिवार अनाथ हो गएl इस कातिल माझे ने एक शिक्षक और एक चिकित्सक का गला काट दियाl माझे की धार इतनी तेज़ थी कि घायलों के इलाज़ का भी मौका नहीं मिलाl जिले के पचहटिया की सड़क और शास्त्री पुल उनके लिए स्लाटर हाऊस बन गयाl इसके अलावा पूर्व की घटनाओं में जो घायल बच गए उनके हादसे को छोटी दुर्घटना का नाम दिया गयाl इसके भुक्तभोगी व सहमे लोग आज भी दूसरों को बचकर बाइक चलाने की सलाह देने से नहीं चूकते हैंl


कातिल माझे के लिए पिछले महीनों जौनपुर शहर कोतवाली क्षेत्र के एक दुकानदार को मनबढ़ों ने इस बात पर पीटा था कि क्यों उन्हें वह चीनी माझा नहीं दे रहा हैl इस मामले में उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश पदाधिकारी व जिलाध्यक्ष इंद्रभान सिंह इंदू ने दखल देकर मामले को शांत कराया थाl उन्होंने 'तहलका संवाद' को बताया कि दुकानदार बार- बार उन मनबढ़ ग्राहकों से कहता रहा कि जिस चीनी या सिंथेटिक धागे से लोगों की जान पर बन रही है उसे वह अरसे से नहीं बेचता है, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थेl कहते रहे कि चाहे जहां से व्यवस्था करोl जब उसने सख्ती से मना किया तो आधा दर्जन युवक उसे पीटने के साथ दूकान में भी तोड़फोड़ कर दिएl श्री इंदू का कहना है कि सीएम योगी का यह आदेश जन हितकारी हैl अब प्रदेश के किसी भी शहर और गांव में बाइक सवारों की जान जोखिम में नहीं रहेगीl व्यापारी खुद भी सिंथेटिक माझा की बिक्री से दूरी बना लेंगेl अब फ़िर सूती धागे की डोर से पतंगें आसमान में परवाज़ करेंगीl

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