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क्राइम कन्ट्रोल: पुलिस के सामने घटना स्थल पर ही उतर जाता है झूठ का नकाब: आयुष।Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 क्राइम कन्ट्रोल: पुलिस के सामने घटना स्थल पर ही उतर जाता है झूठ का नकाब: आयुष


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कैलाश सिंह-

विशेष संवाददाता

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-सहज व्यक्तित्व के धनी आईपीएस आयुष श्रीवास्तव की नज़र में अपराध नियंत्रण का बेहतरीन फार्मूला है- त्वरित, निष्पक्ष और कठोरतम कार्रवाईl


 -उत्तर प्रदेश में सरकार से पुलिस को मिली ताकत और अधिकार का फायदा आमजन को हो लेकिन अपराधी में कानून का भय जरूरी हैl

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लखनऊ/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l आईपीएस आयुष श्रीवास्तव मानते हैं कि जिस तरह फसल को बचाने के लिए खेत से 'जंगली घास' को किसान उखाड़ फेंकते हैं, उसी तरह भूमि को लेकर 'उसपर उगने वाले अपराध' यानी विवाद की स्थिति में ही त्वरित और कठोर निर्णय लेकर खत्म कर देना चाहिए, अन्यथा यही अपराध जब 'हीनियस क्राइम' में तब्दील हो जाता है तब इसपर नियंत्रण करना जटिल हो जाता हैl इसके पनपते ही राजस्व प्रशासन का मौके पर पहुंचना जरूरी होता हैl लेकिन आमजन में भ्रम होता है कि ये अधिकार भी पुलिस के पास हैl ऐसे मामलों में पुलिस की इंट्री प्रशासन की जरूरत अथवा बलवा होने पर होती हैl यहीं से जंगली घास सरीखे अपराध उगता है जिसमें सच और झूठ को अलग करके देखना कठिन हो जाता हैl सच का पता घटना स्थल पर जाकर ही लगता हैl वहां पास- पड़ोस के लोग भी चश्मदीद होते हैंl इनके जरिए निष्पक्ष कार्रवाई आसान हो जाती हैl


आयुष श्रीवास्तव का आईपीएस में चयन और प्रशिक्षण के बाद यूपी के जौनपुर में पहली पोस्टिंग एक साल पूर्व हुईl वह एसपी सिटी के तौर पर शहर और ग्रामीण इलाकों में होने वाले भूमि विवाद से उपजे अपराधों में समानता पाते हैंl इसी तरह महिला और साइबर अपराध पुलिस को बहुत छकाते हैंl जैसे कोई युगल अपने घरों से भागकर महानगरों में रहने लगता है तो परिजन लड़की को नाबालिग बताकर अपहरण का आरोप लगाते हैंl पुलिस मुंबई, दिल्ली, चेन्नई या कोलकाता आदि महानगरों तक पता लगाकर जब उन्हें बरामद करती है तब वही लड़की खुद को बालिग साबित करके हमे निरुत्तर कर देती हैl इसमें महकमें का वक्त बर्बाद होता हैl साइबर क्राइम भी तेजी से बढ़ा हैl इसमें अपराधी अधिकतर पैसे ऐंठने को 'हनी ट्रैप' (लड़कियों का इस्तेमाल) करते हैंl पुलिस चोरी के मोबाइल या अन्य उपकरण तो बरामद कर पीड़ितों को सुपुर्द कर देती है लेकिन ब्लैकमेलिंग या डीजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं में खुद पीड़ित सतर्कता से पुलिस पर भरोसा करके सहयोगी भूमिका में आता है तब हमारा काम आसान हो जाता हैl


भूमि विवाद में दोनों पक्ष को थानों में क्यों बुलाया जाता है?इस सवाल पर ए एस पी आयुष कहते हैं कि बगैर राजस्व कर्मी की मौजदगी के थानों में नहीं बुलाना चाहिए, लेकिन बलवा या रंजिश में कत्ल की आशंका से बचने के लिए ऐसा करना पड़ता हैl फ़िर भी हमारा प्रयास होता है कि उन्हें तहसील या थाना दिवसों में बुलाया जाए ताकि राजस्व विभाग द्वारा मामले का निस्तारण हो जाएl थानों में कोई एक पक्ष पुलिस को ही लेनदेन वाले कटघरे में खड़ा कर देता है जिससे आमजन का भरोसा हमसे उठने लगता हैl रहा सवाल 'पुलिस लॉकप' का तो यह अपराधियों के लिए होता है ताकि उन्हें न्याय पालिका के पहले कार्य दिवस में पेश किया जा सकेl राजनीतिक या विभागीय दबाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें भी सिफारिश आमतौर पर यही होती है कि सम्बन्धित पक्ष 'निरपराधी' यानी दोषी नहीं हैl इसकी जांच में स्थिति स्पष्ट करके ही हम कार्रवाई का प्रयास करते हैंl 


स्वभाव से 'एक्स्ट्रा आर्डिनरी' आयुष श्रीवास्तव कहते हैं कि हम आमजन की सुरक्षा और अराजक तत्वों पर कानून का पालन कराने को कार्रवाई करते हैंl इसलिए खुद का या वर्दी का रौब दिखाने की बजाय आमजन में घुल- मिलकर उनके लिए सहजता से उपलब्ध रहना ही हमारा कर्तव्य है, यही मेरी कार्यशैली भी हैl

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