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मिशन 2029: महिला आरक्षण लागू होने से बदल जाएगा देश का राजनीतिक परिदृश्य!।Tahalka Samvad

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 मिशन 2029: महिला आरक्षण लागू होने से बदल जाएगा देश का राजनीतिक परिदृश्य! 


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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक: यूपी में बढ़ेगी लोकसभा की 40 सीट, तब यह संख्या बढ़कर हो जाएगी 120, देश भर में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी! 


-नये लोकसभा भवन में 880 सीटों की व्यवस्था, महिला सांसदों की संख्या 273 हो जाएगीl अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन संभावितl

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दिल्ली/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l तीन साल बाद देश में होने वाले लोकसभा चुनाव में महिलाओं की 33 फीसदी वाली सशक्त भागीदारी के लिए मोदी सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कराकर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या कम किये बगैर उसे बढ़ाने का मंसूबा बना चुकी हैl लोस चुनाव के साथ उडीसा, आंध्र प्रदेश,अरुणांचल इन तीन राज्यों के भी चुनाव उसी के साथ होंगे जिनके कार्यकाल खत्म होंगेl इसी सत्र में आने वाले महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पास होने पर 'महिला वोट बैंक' किस दल की तरफ़ झुकेगा यह तो चुनावी साल में पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि संसद में 273 महिला सदस्यों के आने से देश का राजनीतिक परिदृश्य अवश्य बदला हुआ नज़र आयेगाl


महिला आरक्षण से किस राजनीतिक दल को मिलेगा फायदा: राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मोदी सरकार इसी बजट सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लाने जा रही है, जिसके सर्व सम्मति से पास होने की संभावना प्रबल मानी जा रही हैl चूंकि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं वोट करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं लिहाजा कोई भी दल इसका विरोध नहीं करेगाl जो भी दल आपत्ति करेगा वह महिला वोट बैंक से हाथ धो सकता हैl जाहिर है यह खतरा कोई भी मोल नहीं लेगाl ऐसे में भाजपा का पलड़ा भारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता हैl क्योंकि इसकी पहल इसी पार्टी ने की हैl


महिला आरक्षण की नींव 2023 में पड़ी थी: राजनीतिक विश्लेषक एस पाण्डे के मुताबिक मोदी सरकार द्वारा लाया गया 2023 में नारी वन्दन विधेयक पारित होकर जब कानूनी जामा पहना था तभी भाजपा सरकार विपक्षी दलों पर भारी पड़ गई थी, लेकिन विपक्षी पार्टियों को जनगणना और परिसीमन कराकर 33 फीसदी महिला आरक्षण के 2029 में लागू होने को लेकर संदेह बना हुआ थाl मोदी सरकार ने 2021 में होने वाली जनगणना को यदि 2026-27 में कराकर आरक्षित सीटें बढ़ाने के फेर में पड़ती तो 2029 की बजाय शायद 2034 में महिला आरक्षण लागू हो पाताl लिहाजा सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करके लोस, विस सीटें बढ़ाने का उपाय खोज निकाला हैl अब इसी बजट सत्र में सरकार संशोधन विधेयक लाने जा रही है जिसपर सरकार को आम सहमति की उम्मीद हैl


महिला आरक्षण के लिए आनुपातिक फार्मूला अपनाएगी सरकार: वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानकर मोदी सरकार चुनावी क्षेत्रों का निर्धारण करने जा रही हैl इसी भौगोलिक निर्धारण में महिला आरक्षण के तहत 33 फीसदी सीटें बढ़ेंगीl उदाहरण के तौर पर जैसे यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैंl इसमें आरक्षण के तहत सीटें बढ़ेंगी तो यह संख्या 120 तक होने का अनुमान हैl दूसरी खास बात यह कि जो भी सीटें  आरक्षित हैं उनमें उसी आरक्षण वाली सीटें बढ़ेंगी यानी 'आरक्षण में आरक्षण' का फार्मूला अपनाया जा सकता हैl जैसे दलित समाज के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 86 हैl वह बढ़कर 126 हो जाएगी जिसमें उसी वर्ग की 33 फीसदी सीटें बढ़ेंगी जिनपर महिला प्रतिनिधि चुनी जाएंगीl सामान्य वर्ग की सीटों पर इसी तरह के फार्मूले को अपनाया जा सकता हैl


परिसीमन करायेगा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों वाला आयोग: परिसीमन को लेकर किसी तरह का राजनीतिक विरोध या आपत्ति की गुंजाइश नहीं के बराबर होती हैl क्योंकि यह कार्य सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जजों वाले आयोग के निर्देशन में होता हैl यानी इसे सरकार नहीं कराती हैl इसलिए आयोग की संस्तुति को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती हैl

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