पश्चिम बंगाल विस चुनाव: अबकी सियासी महाभारत में टीएमसी के खिलाफ भाजपा आक्रामक!
---------------------------------------
कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
---------------------------------------
-ममता बनर्जी के सामने दो पिच (विस क्षेत्र) पर खेलेंगे शुभेंदु अधिकारी, चुनाव आयोग ने शीर्ष नौकरशाहों को हटाया तो ममता ने 'खेला होबे' के वक्तव्य से टीएमसी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया -अबकी छक्का मारेंगे!
---------------------------------------
कोलकाता/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l इसमें कोई शक नहीं कि डेढ़ दशक तक पश्चिम बंगाल पर राज करने वाली ममता बनर्जी वामपंथी शासन के 'तरीके' को अपनाकर विपक्षी दल सीपीएम व कांग्रेस को इस प्रदेश में जमीन से उठने नहीं दियाl पिछले विधान सभा चुनाव 2021 में भाजपा मुकाबले में आई तो चुनावी हिंसा के साथ ममता का ड्रामा 'खेला होबे' वोटों की गिनती के बाद खत्म हो गया, लेकिन हिंसा ने और बड़ा रूप ले लिया थाl इस बार 'एसआईआर'-गहन मतदाता पुनरीक्षण ने उनके चुनावी खेल 'खेला होबे' की रीढ़ तोड़ दीl तभी तो उन्होंने इसके साथ 'छक्का मारबे' को भी जोड़ दियाl इससे यही समझा जा सकता है कि वह अबकी चुनावी महाभारत में पुराने फार्मूले से हटकर कुछ नया अपनाने की प्लानिंग का संकेत अपने कार्यकर्ताओं को दे रही हैंl
विदित हो कि 'एसआईआर' के चलते मृतकों के अलावा दूसरे प्रांतों में शिफ्ट हो चुके लोगों के साथ बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठिये भी वोटर लिस्ट से बाहर हो चुके हैंl इनकी संख्या लगभग एक करोड़ हो सकती हैl अब ममता बनर्जी के लिए मुस्लिम वोट बैंक सबसे बड़ी थाती हैl इसमें सेंध न लगे इसके लिए उन्होंने चुनावी घोषणा के दौरान लुभावना चारा डालकर अपना जाल फेंक दिया हैl इन वोटरों के खिसकने को लेकर उन्हें भाजपा से नहीं, बल्कि अन्य दलों से डर हैl ममता बनर्जी ने एसआईआर को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगाई, लेकिन वह सफ़ल नहीं हो पाईंl पिछले चुनाव में भी उन्होंने घायल होकर ह्वील चेयर से प्रचार किया लेकिन हर सिम्पैथी की हवा आर्जिकर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु डॉक्टर के रेप और हत्या की घटना ने निकाल दीl इस घटना के विरोध और मृतका को न्याय दिलाने के समर्थन में जिस प्रकार क्रीमी लेयर सड़क पर उतरा था वह भुलाया नहीं जा सकता हैl निष्कर्ष ये कि ममता बनर्जी के सारे पुराने ड्रामें का पर्दाफाश हो चुका हैl अब देखना ये है कि इस बार उनके स्लोगन 'खेला होबे- छक्का मारबे' का क्या रहस्य है?
पिछले चुनाव में टीएमसी से आयातित कार्यकर्ताओं के सहारे भाजपा मैदान में उतरी थी, जिसका खामियाजा उसे चुनाव बाद तक भुगतना पड़ा थाl इस बार पिछली गलती को दोहराने की बजाय भाजपा ने अपनी ठोस तैयारी कर ली हैl तभी तो अपने प्रत्याशियों की पहली सूची सबसे पहले जारी कर दीl पिछली बार जिन दो सीटों से ममता बनर्जी चुनाव में उतरी थीं, उनमें एक पर वह भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से हारी थींl इस बार उनकी दोनों सीटों पर उनके सामने भाजपा ने शुभेंदु को खड़ा करके दो मेसेज दे दिया हैl एक यह कि भाजपा अब टीएमसी के सामने कार्यकर्ताओं की श्रृंखला में पूरी तरह मजबूत हैl दूसरे यह कि उसने शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के मुकाबले पार्टी के बड़े चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर दिया हैl
इस बार ममता बनर्जी का विक्टिम कार्ड चलना कठिन हैl सीपीएम से मिले संकेत से चुनाव आयोग इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा हैl चुनाव आयोग को मिली सूचना के मुताबिक दिन में 'एक से तीन बजे के मध्य' टीएमसी का खेला होबे की टाइमिंग है, जिसमें फर्जी वोटिंग होती रही हैl इसके अलावा मर चुके लोगों, दूसरे राज्यों में बस चुके या शिफ्ट होने वालों के अलावा घुसपैठियों को मिलाकर ममता बनर्जी के फर्जी वोट बैंक वाले मुख्य आधार से लगभग एक करोड़ मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर होंगे ऐसी संभावना जताई जा रही हैl राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ममता बनर्जी ने पिछली बार की तरह इस बार भी खेला होबे का जो नारा दिया है उसके साथ 'छक्का मारबे' वाला शब्द डिफेंसिव लाइन को दर्शाता हैl उन्होंने अपने उपद्रवी कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया है कि हम हिंसा नहीं वाकई खेल की बात कर रहे हैं! .......क्रमशः
नोट- चुनावी विश्लेषण के लिए लाइक व क्लिक करें हमारे डिजिटल प्लेटफ़ार्म- tahalkasamvaad. Com को, धन्यवाद l

