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पश्चिम एशिया महायुद्ध विराम फेज-3: कोई नहीं 'जीता- हारा', फायदे में है अमेरिका, हार्मूस बना ईरानी कवच! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 पश्चिम एशिया महायुद्ध विराम फेज-3: कोई नहीं 'जीता- हारा', फायदे में है अमेरिका, हार्मूस बना ईरानी कवच! 



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कैलाश सिंह

राजनीतिक संपादक

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-युद्ध विराम के बदलते मायने: अमेरिका की तरफ़ से यह तीसरी बार हुई है सीज फ़ायर की घोषणा, इस बार ईरान ने शांति समझौते की बात अपनी तरफ से दी गई शर्तों के साथ स्वीकारीl

-ईजराइल का लेबनान के हिजबुल्ला आतंकी संगठन पर जारी हमला अमेरिका के युद्ध विराम से असरहीन, दूसरी तरफ पोस्टमैन की हैसियत रखने वाले पाकिस्तान के मध्यस्थता वाले दावे की खिल्ली उड़ रहीl

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दिल्ली/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l ईरान से अमेरिका, ईजराइल का संयुक्त महायुद्ध आखिरकार 40 वें दिन आठ अप्रैल को तीसरी बार अमेरिकी सीज फ़ायर की घोषणा पर ईरानी मुहर लगने के बाद थम गयाl फ़िर भी कुवैत पर ईरान और लेबनान पर ईजराइल का हमला जारी रहाl बावजूद इसके सीज फ़ायर की घोषणा से मिडिल ईस्ट ही नहीं समूची दुनिया को फौरी तौर पर राहत अवश्य मिली हैl लेकिन सबके मन में संशय भी बरकरार हैl राहत इसलिए मिली है क्योंकि इस महायुद्ध से तमाम देशों की अर्थ व्यवस्था धड़ाम हो चुकी हैl  कई देशों में तो कोरोना काल सरीखा लॉक डाउन में आनलाइन वर्किंग लागू हो चुकी थीl खाद्य व पेट्रोलियम उत्पादों के दाम आसमान छूने लगे थेl दुनिया के सबसे बड़े दुबई जैसे 'आर्थिक सुरक्षा की गारन्टी वाले देश' में भी वेतन कटौती की नौबत आन पड़ी थीl इस महायुद्ध का सर्वाधिक फायदा अमेरिका को हुआ,अब युद्ध उपकरण बनाने वाली उसकी कंपनियों के हथियार खाड़ी व यूरोपीय देशों में खूब बिकेंगेl उसके भी पुराने हथियार खर्च हो चुके हैंl अमेरिका के साथ रूस भी तेल बेचकर फायदे में रहाl अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बदलते बयान भी शेयर मार्केट को उठाते- गिराते रहे जिसका फ़ायदा उनके देश व करीबियों को मिलाl







ईरान झुका नहीं, उसका सबसे बड़ा हथियार जल डमरू मध्य का समुद्री रास्ता बना: ध्यान रहे कि यह महायुद्ध विगत 28 फरवरी को शुरू हुआ थाl इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध के 24 वें दिन पहली बार पांच दिन फ़िर 10 दिन के सीज फ़ायर की घोषणा की थी जो एकतरफा साबित हुईl ईरान ने साफ़ मना करके ट्रम्प को दुनिया के दादा वाले तमगे पर तगड़ा डेंट लगा दिया थाl जब दो अमेरिकी पायलट ईरान के रेगिस्तान व पहाड़ों में लापता हुए तब अमेरिकी खुफिया एजेंसी 'सीआईए' व फौज के साथ कमांडो ने 'ईरान की सेना को भ्रम के जाल' में फंसाकर अपने पायलटों को सुरक्षित निकाल लिया और फाइटर विमानों को खुद नष्ट कर दिया ताकि उसकी नकल ईरानी न कर पाएंl ऐसा करके सीआईए ने अमेरिका को नम्बर एक पर बनाए रखाl दूसरी तरफ ईरान ने अपने अधीन महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता 'जल डमरू मध्य क्षेत्र' को ही हथियार बना लिया जिससे समूची दुनिया में आर्थिक व्यवस्था चरमरा गईl क्योंकि इसी नजदीकी रास्ते से दुनिया के 20 फीसदी से अधिक पेट्रोलियम उत्पादों व अन्य व्यापार की आपूर्ति होती रही हैl दूसरे रास्ते इतनी लम्बी दूरी वाले हैं कि उसके चलते सभी देशों को आयात- निर्यात काफी महंगा साबित होताl इस रास्ते पर रोक लगाकर ईरान ने दुनिया को ऐसा हलकान किया कि सभी के दबाव पर अमेरिका तीसरे सीज फ़ायर (दो सप्ताह) यानी 22 अप्रैल तक की डेट निर्धारित किया और अपनी शर्तें भी थमा दीl इसके जवाब में ईरान ने भी 10 शर्तें रख दींl समझौते के लिए पहली बैठक 10 अप्रैल को होनी हैl यहां तक स्थिति लाने में ट्रम्प का वह बयान कि- हम ईरान की सभ्यता ही मिटा देंगेl इससे दुनिया भर में सियापा छा गया थाl दूसरी ओर ईरान के दृढ़ संकल्प को वहां की पब्लिक यानी नागरिकों ने अपनी कुर्बानी देने वाली एकजुटता से अपने देश की ताकत का लोहा मनवा दियाl ध्यान रहे कि दुनिया के ताकतवर देशों में पहले नम्बर पर अमेरिका है जिससे 16 वें नम्बर वाला ईरान अडिग होकर लोहा लेता रहाl


सीज फ़ायर की उम्र कितनी होती है? यह सवाल हर इंसान के जेहन में कौंधता जरूर है तो हम बानगी के साथ इसकी अल्पायु बताते हैंl बावजूद इसके यह तय है कि यह अमर तो नहीं है यानी युद्ध सदा के लिए बंद नहीं होता हैl ईरान और अमेरिका की परोक्ष शर्तें जो मीडिया में घूम रही हैं उनमें अधिकतर शर्तें एक- दूसरे को समझौते के तहत नजदीकी की बजाय दूरी बढ़ाने का कारण पैदा करती नज़र आ रही हैंl उनमें पहली बानगी तो यही रही कि डेड लाइन से डेढ़ घंटे पहले सीज फ़ायर हुआ फ़िर भी उस दिन हमले नहीं रुकेl दूसरी बानगी ये कि ईजराइल- ईरान के बीच एक बार युद्ध विराम पिछले साल जून में हुआ था जो आठ महीने में ही दम तोड़ दियाl इस बार हुए सीज फ़ायर की घोषणा के बाबजूद लेबनान पर ईजराइली हमला और भीषणतम हो गयाl पहला सवाल यही है कि जब ईजराइल के साथ मिलकर अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हमला किया तो युद्ध विराम अकेले क्यों? दरअसल 'नेटो' देशों के हाथ खड़े करने से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अकेले पड़ गए थेl उनकी लोकप्रियता घट रही थी और वहां महंगाई से नागरिक त्रस्त होकर इस युद्ध का विरोध करने लगे थेl यही कारण है कि ईरान बातचीत की टेबल पर अमेरिका से आँखें मिलाकर बग़ैर डरे तैयार हुआ हैl 


युद्ध विराम पर संदेह का सबसे बड़ा कारण: इस युद्ध में अमेरिका पीछे हटा हैl हार्मूस पर ईरान का कब्जा बरकरार हैl  साथ ही भारत अपने प्रवासी नागरिकों को अपने दूतावास के सम्पर्क में रहने और सुरक्षित समय में दूतावास के निर्देशन में भारत वापसी करने को तत्पर रहने की सलाह हैl इस युद्ध विराम से ईरान का कद अवश्य बहुत बढ़ा हैl इसमें पाकिस्तानी पीएम शाहबाज शरीफ का सोशल मीडिया पर जारी बयान भी संदेह के दायरे में हैl इस बयान की भाषा ही अजीब लगती हैl क्योंकि ऐसी भाषा पाकिस्तान कभी बोला ही नहीं हैl वैसे भी एक लाइन इस कॉपी पेस्ट की पोल खोलती है, जिसमें संदेश लिखा है कि- पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री अपनी पोस्ट में क्या लिखने वाले हैंl यानी उनके ड्राफ्ट के साथ लिखे गए संदेश को हटाए बगैर पोस्ट कर दिया गया था, जिसे बाद में डिलीट करके फ़िर शांति वार्ता की मध्यस्थता वाला मेसेज  पोस्ट किया गयाl राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये पोस्ट अमेरिका द्वारा लिखी गई जाहिर होती है, जिसके जरिए अमेरिका ने पाकिस्तान को 'मध्यस्थ' बनाने को मोहरा बनाया हैl वर्तमान परिस्थिति में इस तरह का मोहरा कोई अन्य देश नहीं बन सकता हैl अब इंतजार कीजिए शर्तों में समझौते और युद्ध विराम की उम्र का l

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