पश्चिम बंगाल का चुनावी महाभारत: डेढ़ दशक बाद फ़िर 'अमोघ अस्त्र' बनकर लौटा परिवर्तन का नारा!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-परिवर्तन का नारा डेढ़ दशक बाद लौटा, पहले यह सीपीएम के खिलाफ ममता बनर्जी के हाथ में था, इस बार ममता के खिलाफ नरेंद्र मोदी के हाथ में आ गयाl
-पश्चिम बंगाल में कुल सीट 294, पहले फेज में 152 सीटों पर 92 फीसदी से ज्यादा यानी बम्पर वोटिंग के जरिए दूसरे फेज की 142 सीटों पर बनाया जा रहा दबावl
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कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l पश्चिम बंगाल के विधान सभा चुनाव में डेढ़ दशक पूर्व जिस 'परिवर्तन' के नारे ने यहां की स्थापित सीपीएम की सरकार और कांग्रेस को उखाड़कर ममता बनर्जी को गद्दी पर बैठा दिया, वही नारा फ़िर लौटकर भाजपा के हाथ लगा हैl अबकी वह क्या गुल खिलाएगा? इसका जवाब तो चार मई को मिलेगा लेकिन 'परिवर्तन की आत्मा बना 'भय' मतदाताओं के दिल से निकल चुका हैl इसे साबित किया है 23 अप्रैल को पहले फेज की 152 सीटों के लिए हुई बम्पर वोटिंग नेl अब इसी 'बदलाव रूपी परिवर्तन' के नारे को भाजपा ने 'अमोघ अस्त्र' बनाकर दूसरे और अंतिम फेज में 142 सीटों के लिए 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के प्रचार अभियान में उतार दिया हैl
पहले फेज का मतदान बवाल के साथ हुआ लेकिन जनहानि से बच गया: राजनीतिक विश्लेषकों 'एस पांडेय व आर ए सिंह' के मुताबिक वर्ष 2011 में परिवर्तन के नारे के साथ चुनाव में हुईं हिंसक घटनाओं से 'डर' ममता बनर्जी के लिए विक्टिम कार्ड बन गया थाl बाद में वही डर परिवर्तन वाले नारे में समाहित होकर उसकी आत्मा बनकर उभरा जो आमजन के बीच निजी विकास कार्यों में 'कट मनी' के रूप में फैल गयाl प्रदेश का विकास रसातल में जाता रहा और यही डर कथित राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए 'गुंडे का ताज' बन गयाl बीते चुनावों 2016 और 2021 में हुए मतदान और उसके बाद होने वाली हिंसक घटनाओं ने ममता बनर्जी को 'बेचारी से दबंग राजनेता' के रूप में स्थापित कर दियाl इसी के दम पर उन्होंने मुस्लिम वोटबैंक को अपने पाले में कर लियाl बल्कि यूं समझिये कि वह इनका मसीहा बन गईंl
एसआईआर ने ममता बनर्जी को ताकत विहीन कर दिया: बिहार में विस चुनाव से पूर्व हुई एसआईआर के दौरान इसे पश्चिम बंगाल पहुँचने से रोकने के लिए ममता बनर्जी विक्टिम कार्ड खोजने के साथ कानूनी दांव पेच की तलाश में जुट गईं थींl उन्होंने शायद यही सोचा था कि इसे वैसे ही रोक देंगे जैसे नागरिकता कानून और केंद्रीय एजेंसियों सीबीआई, ईडी आदि के कार्य बाधित किये थेl जबकि आर्जिकर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु डॉक्टर की रेप और हत्या के साथ संदेश खाली की वारदात ने पश्चिम बंगाल में महा जंगलराज को उजागर कर दिया थाl यहीं से बदलाव की बयार आमजन के बीच चलने लगीl महिला सीएम के रहते यहां की महिलाओं में असुरक्षा की भावना गहरे तक पैठ चुकी थीl सहमे आमजन में चर्चा होने लगी थी कि भाजपा भी इस सरकार को नहीं हिला सकतीl क्योंकि 2021 वाले विस चुनाव के बाद इस पार्टी के लोगों को भी पीटा गया था तो आमजन कैसे भयमुक्त होकर वोट देगा? एसआईआर को रोकने और निर्वाचन आयोग को कटघरे में खड़े करने के लिए ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं लेकिन उन्हें मुंह की तब खानी पड़ी जब मालदा में एसआईआर में लगे न्यायिक अधिकारियों पर हमले हुएl इसके बाद प्रदेश की पुलिस को दरकिनार करके निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अर्ध सैनिक बलों को उतार दियाl बावजूद इसके पहले फेज की वोटिंग में भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी समेत कई पर हमले हुएl
91 लाख लोगों के कटे वोट के बाद हुई बम्पर वोटिंग में अपनी जीत के आंकड़े खोज रहे दोनों प्रमुख दल: यहां हुई एसआईआर में लगभग 91 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से कटे हैंl इनमें घुसपैठिये, मृतक और दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो चुके लोग भी शामिल हैंl इसके बाद 23 अप्रैल को पहले फेज में 152 सीटों पर तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार वोटरों में से लगभग 93 फीसदी ने मतदान करके परिवर्तन का संकेत तो जरूर दे दिया है, लेकिन किसके पलड़े में जीत होगी यह दावे भाजपा और टीएमसी यानी दोनों प्रमुख दल कर रहे हैंl इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गाँधी का वह बयान कि- 'ममता बनर्जी भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में रास्ता खोल रही हैl' इस बयान के मायने भाजपा की बढ़त मानकर निकाले जा रहे हैंl जबकि आमजन तो चुनावी लहर गिन रहा हैl असली फैसला चार मई को आयेगा, तब तक कयासबाज़ी परवाज़ करती रहेगीl अभी 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होना हैl उपर्युक्त दावे इसी मतदान में 'नेरेटिव' बनाने का काम कर रहे हैंl....तो अभी इंतजार करिए 29 अप्रैल का,,,, l

