पीयू में समथिंग इज़ रांग: पहली परीक्षा का परिणाम आया नहीं, दूसरे सेमेस्टर का आयोजन तैयार!
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के एन सिंह/संतोष कुमार सिंह
कन्सल्टेंट एडिटर/चीफ रिपोर्टर
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-पूर्वांचल विवि में यूजीसी के नियम ताक पर: यहां लूट खसोट के उपाय खोजता है पुरोहित गैंग, भवनों की रंगाई पोताई यानी रेनोवेशन के नाम पर करोड़ों का होता है वारा-न्यारा, लैब टेक्नीशियन व अटेंडेंट बने हैं पार्टी पेमेंट के प्रभारी, ठेकेदार पीयू के अधीन कॉलेजों में बादलवाते हैं प्रबंधनl
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जौनपुर/वाराणसी/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l पिछले साल पूर्वांचल विश्वविद्यालय में हुए दीक्षांत समारोह के दौरान लूट- खसोट में मस्त आयोजन समिति वह कमी नहीं दूर कर सकी जिसपर महामहिम कुलाधिपति व उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन की नजर पड़ गई थीl उन्होंने भाषण के दौरान यहां के ट्रांजिट हॉस्टल को 'अंग्रेजी दारू का ठेका' जैसे नाम से विभूषित किया थाl यह बात उन्होंने तब कही थी जब उनके भाषण के दौरान कुछ मिनट के लिए बिजली गुल हो गई थीl लाखों का जेनरेटर इस मौके पर नहीं चल पाया थाl जबकि करोड़ों खर्च करके यहां वर्षों से सोलर पैनल भी लगा है जो खेत में नीलगाय (घड़रोज) को डराने वाला धोख साबित हो रहा हैl यहां विवि परिसर हो या आवासीय परिसर सब जगह गंदगी का सम्राज्य हैl यहां अधिकारी से लेकर बाबू और चपरासी (परिचारक) तक लूट के उपाय इस तरह खोजते हैं मानो चंद्रयान की तैयारी में लगे होंl यहां ईमानदारी की सजा प्रताड़ना हैl लूट में सहयोगी बने चतुर्थ श्रेणी कर्मी भी वित्तीय विभाग में अहम भूमिका निभाते हैंl कार्यालय सहायक यानी बाबू या लिपिक प्रोफेसर, हेड वाले आवास में काबिज होते हैं और इसके इनटाइटिल लोग उनके सामने उसी तरह हाजिरी बजाते हैं जैसे स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक बाबू के सामने गिड़गिड़ाने को विवश होते हैंl इस नये धारावाहिक में 'पीयू में हो रहे गोलमाल' का लेखाजोखा' क्रमवार मिलेगाl
पहला रिजल्ट आया नहीं, दूसरी परीक्षा को आपाधापी क्यों? दरअसल किसी भी कुलपति का कार्यकाल तीन वर्ष का होता हैl एक साल तो उन्हें कैंपस के 'चंद्रकांता संतति उपन्यास' सरीखे यक्कु व अय्यारों को समझने में गुजर जाते हैंl दूसरे साल जो वीसी का भरोसा जीत लेते हैं उन्हें पुरोहित गैंग हाईजैक कर लेता हैl आखिर पैसा किसको काटता हैl जो ईमानदारी झाड़ते हैं उन्हें यही गैंग अपनी साजिश से दरकिनार करा देता हैl यही हाल पूर्वांचल विवि में इन दिनों चल रहा हैl तभी तो वीसी का कर्ताधर्ता एक लिपिक बना हैl उसे टाइप फोर वाला आवास व ऑफ़िस मिला है जो विभागाध्यक्षों को मिलना चाहिएl पीआरओ ऑफ़िस का तो दो साल से ताला ही नहीं खुला हैl गैंग ने दीक्षांत समारोह रूपी चौथे चंद्रयान की खोज कर ली हैl ताकि जुलाई तक दीक्षांत समारोह करा लिया जाएl इस समारोह के आयोजन में खर्च अनलिमिटेड होता है, जिसका ऑडिट नहीं होता हैl इसके आगे परीक्षाओं में पेपर से लेकर कॉपी जांच तक खर्च के नाम पर मिलने वाली रकम चिंदी साबित होती हैl
गोलमाल में दीक्षांत की टक्कर बिल्डिंग रेनोवेशन लेता है: पूर्वांचल विवि की एक आवासीय बिल्डिंग का नाम 'संगम'l यह विवि प्रशासन को 2019 यानी कोरोनाकाल में हैंडओवर हुई थीl इसके दो साल बाद ही पूर्व कुलपति के समय में लगभग पांच करोड़ की लागत से रेनोवेशन हुआl इसमें कुल 36 फ्लैट हैंl अब कल्पना कीजिए कि दो साल में कितनी टूटफूट हो गई जिसकी मरम्मत में करोड़ों खर्च किये गएl अब फ़िर दो साल बाद उसी बिल्डिंग का रेनोवेशन चल रहा हैl लागत वही पांच करोड़l ये है पुरोहित गैंग की असली कमाईl ऐसा नहीं कि ये बीमारी एक जगह हैl एक हिन्दी दैनिक में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तैनात एक मैनेजर इसलिए कुछ दिन निलंबित रहा क्योंकि उसने बैठकों में नाश्ता, भोजन खर्च देखकर शहर में अपनी बीवी के नाम पर खोली कैंटीन से खाद्य व पेय पदार्थ बढे दामों पर मंगा रहा थाl
अब जानिए यूजीसी की परीक्षा नियमावली: पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अधीन कई जिलों के 600 से अधिक कॉलेज संचालित होते हैंl एक एम ए हिन्दी के द्वितीय सेमेस्टर के छात्र ने कुलपति, कुलाधिपति, सीएम, यूजीसी को भेजे शिकायती पत्र में लिखा है कि हमारी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 31 जनवरी 2026 को संपन्न हुईl इसके बाद पांच फरवरी से द्वितीय सेमेस्टर की कक्षाएं यानी पढाई शुरू हुईl पहली परीक्षा का रिजल्ट अभी नहीं आयाl नियम के तहत दूसरी परीक्षा में 90 दिन का अंतराल होना चाहिए, लेकिन 70 दिन में ही- 17 अप्रैल से दूसरी परीक्षा की स्कीम तैयार हैl इन 70 दिनों में 20 दिन तो छुट्टियों में गुजर गएl यानी 50 कार्य दिवस की पढाई हुई हैl इसमें कोर्स कैसे पूरे हुए होंगे इसका अनुमान सहज लगाया जा सकता हैl उस छात्र ने लिखा है कि अधूरी पढाई और कोर्स के चलते तमाम छात्र तनाव में हैंl
पुस्तकालय में कोर्स की किताबों का अभाव: पिछले दिनों प्रबन्ध संकाय की एक छात्रा के वायरल वीडियो ने तहलका मचाया था जिसमें उस छात्रा ने लाइब्रेरी की दुर्दशा को मीडिया के सामने उजागर किया थाl यहां भी किताबें तो लाखों रुपये की भरी हैं लेकिन कोर्स की नहीं हैंl,,,,,, क्रमशः

