पश्चिम बंगाल का चुनावी परिणाम: महिलाओं का अपमान कहीं ममता को भारी न पड़ जाए!
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कैलाश सिंह
राजनीतिक संपादक
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-टीएमसी के खेला पर सख्त पहरा: हारें या जीतें, हिंसा की आग में झुलसने का डर 'उन्हें' वोट न देने वालों के मन की गहराई तक समाया हैl हालांकि इस बार निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार ने दो महीने बाद तक के लिए लगा दिया है सख्त पहराl
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कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव के परिणाम चार मई को आयेंगेl इसकी पूर्व संध्या यानी तीन मई की रात सभी प्रत्याशियों के अलावा प्रदेश में सरकार बनाने और बचाने को आतुर टीएमसी- भाजपा यानी दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के लिए कातिल सरीखे गुजरेगीl लेकिन टीएमसी के पिछले कारनामे पर नज़र डालें तो यही लगता है कि यह पार्टी जीते या हारे, हिंसा का खेल होना तय हैl इसी के मद्देनज़र कोर्ट, आयोग और केंद्र सरकार ने सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए थे फ़िर भी दूसरे व अंतिम फेज के मतदान में हुए बवाल ने जहां इतिहास दोहराया वहीं आमजन के मन में हिंसा का डर बनाए रखाl अब मतगणना के बाद संभावित उपद्रव के मद्देनज़र प्रदेश भर में पहरा सख्त कर दिया गया हैl
मतगणना वाले रुझान से खत्म होते जाएंगे कयासों के बादल: चार मई को वोटों की गिनती के साथ उसी रफ़्तार में कयासों के साथ अफवाहों के बादल भी छंटते रहेंगेl दलों और प्रत्याशियों को चुनावी परिणाम में अपनी 'फेल- पास' हो रही रणनीति के साथ खामियां भी उसी तरह दिखेंगी जिस तरह मौत के करीब होने पर इंसान को अपने कर्म या कुकर्म याद आते हैंl लोकतंत्र में यही खासियत है कि बारम्बार प्रताणित होने वाली 'जनता' पांच साल की अल्पायु वाले राजाओं को गद्दी से हटाकर अपने बराबर लाकर खड़ी कर देती हैl अब चुनाव परिणाम ही फैसला करेंगे कि आमजन के मन में क्या है? उनमें प्रदेश में सत्ता 'परिवर्तन' लाने का संकल्प था या नहीं! कोर्ट और चुनाव आयोग ने आमजन के मन से 'डर' को हटाने के लिए भरपूर व्यवस्था दी है, बाकी रिजल्ट पर निर्भर हैl
यदि ममता बनर्जी पराजित हुईं तो उनकी हार में आधी आबादी की नाराजगी स्पष्ट होगी: पश्चिम बंगाल में संदेश खाली की घटना हो या आर्जिकर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु डॉक्टर की रेप- हत्या अथवा मृतका की मां का चुनाव प्रचार के दौरान कथित अपमान, इन सबका प्रतिकार चुनाव परिणाम में नज़र आयेगाl इसी के साथ महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका भी नज़र आयेगीl इसके अलावा मुस्लिम वोटबैंक की एकजुटता या बिखरने का रिजल्ट भी दिखेगाl यदि वह टूटा तो कांग्रेस फ़िर कुछ सीटों पर जीवित हो उठेगीl असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूँ कबीर की तरफ़ यह वोटबैंक घूमा तो कुछ सीटें इन्हें भी मिल जाएंगी जो ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की रीढ़ चटकाने में 'आधी आबादी' की निर्णायक भूमिका में सहायक बन जाएगीl,,,,,,,, तो बस इंतजार कीजिए आज रात के गुजरने का l





