पांच राज्यों का चुनावी विश्लेषण: तीन सीएम पराजित पर ममता बनर्जी को हार स्वीकार नहीं!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-पश्चिम बंगाल में एकजुट हिन्दू वोटरों ने 15 साल की मुस्लिम तुष्टिकरण वाली टीएमसी की अत्याचारी सरकार को उखाड़ फेंका, अब इस्तीफा न देने का आखिरी ड्रामा कर रहीं ममता बनर्जी निर्वाचन आयोग, एसआईआर और मीडिया पर हराने की तोहमत लगा रहींl
-तमिलनाडु में फिल्म स्टार विजय थलापति ने प्रचण्ड जीत से नया इतिहास रचा, यहां के सीएम एम के स्टालिन का अहंकार और द्रविण राजनीति का वर्चस्व टूटा, असम में हिमन्ता विस्व सर्मा ने हैट्रिक लगाई, केरलम में वामपंथी सरकारों का आखिरी किला भी ढह गयाl
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दिल्ली/कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा ने जीत हासिल की जबकि तमिलनाडु में दशकों से द्रविंड़ राजनीति से डीएमके का दबदबा था जिसे दक्षिण फिल्मों के अभिनेता विजय थलापति ने अपनी दो साल वाली नई पार्टी टीवीके के जरिए ध्वस्त कर दियाl केरलम में सीएम पेनराई विजयन की हार से सत्ता अब कांग्रेस के हाथ आ गईl इस तरह तीन प्रांतों में जनता ने मुख्यमन्त्रियों को भी हरा दिया, लेकिन ममता बनर्जी अब भी खुद को देश के संविधान से ऊपर समझ रही हैंl तभी तो वह पार्टी और अपनी सीट से हुई हार को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं, और इस्तीफा देने से इनकार करते हुए अपनी हार की तोहमत एसआईआर, निर्वाचन आयोग और मीडिया पर मढ रही हैंl हालांकि उनकी टीएमसी की सरकार का कार्यकाल इसी सात मई को खत्म हो रहा है फ़िर ममता के इस्तीफा न देने के मायने भी बदल जाएंगेl
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को महिलाओं की 'हाय' लगी: पिछले साल नौ अगस्त को आर्जिकर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद 14 अगस्त को 'भद्रलोक' यानी प्रबुध्द जन सड़कों पर आकर मौन प्रदर्शन कियाl स्वतः स्फूर्त इस गैर राजनीतिक आंदोलन ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की सरकार के ताबूत में पहली कील ठोक दी जो बाद में होने वाले अत्याचार के दौरान आखिरी कील साबित हुईl बिहार में एसआईआर होने के बाद से ही ममता बनर्जी इसे पश्चिम बंगाल में रोकने के लिए जुगत खोजने लगींl उन्होंने पहले भी केंद्रीय योजनाओं से आमजन को दूर रखते हुए एनआरसी तक लागू नहीं होने दियाl लेकिन एसआईआर को रोकने और निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं पर उन्हें मुंह की खानी पड़ीl इसी तरह 'महिला सुरक्षा' को हथियार बनाकर भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने वाली तीन प्रमुख महिलाओं ने जीत हासिल कर लीl इनमें 'मृतका प्रशिक्षु डॉक्टर की मां रत्ना देवनाथ, संदेशखाली में दूसरी पीड़िता रेखा पात्रा और घरेलू श्रामिक कलिता माझी' पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा की प्रतिक बन गईंl
पश्चिम बंगाल में टीएमसी का दिया दर्द जब हद पार किया तो हिन्दू वोटरों ने परिवर्तन कर दिया: ममता बनर्जी ने सीएम रहते हुए दो बार अपनी सीट से पराजित होने का रिकॉर्ड बना ली हैंl अब इस्तीफा को लेकर उनका आखिरी ड्रामा चुनाव बाद हिंसा के रूप में सामने आ रहा हैl यदि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो 7 मई को सरकार का कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जाएगा और नौ मई की भाजपा की सरकार शपथ ले लेगीl ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पाले हुए गुंडे अब पलायन भी कर जाएंगेl इस गुंडातंत्र से प्रदेश का हर हिंदू परिवार त्रस्त थाl अब लोगों को कट मनी, सिंडिकेट और महिलाओं से हो रहे अत्याचार का नई सरकार के आने से अंत माना जा रहा हैl देश की आजादी से पूर्व कोलकाता हिन्दू महासभा के जरिए 'सनातन संस्कृति' का गढ़ रहा है लेकिन भाजपा को यहां सत्ता तक आने में दशकों लग गएl फ़िर भी शिखर पर प्रचण्ड जीत के साथ आकर इस पार्टी ने 'हिन्दू ध्रुविकरण से मुस्लिम तुष्टिकरण' को पीछे कर दियाl

