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यूपी पुलिस: मुख्यमन्त्री जन सेवक और नौकरशाह बने हैं वायसराय! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad


 यूपी पुलिस: मुख्यमन्त्री जन सेवक और नौकरशाह बने हैं वायसराय! 

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कैलाश सिंह-

विशेष संवाददाता

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-ब्रिटिश शासन की कार्यशैली से आठ दशक बाद भी नहीं उबर पाई है उत्तर प्रदेश की नौकरशाही: इसका जीता- जागता प्रमाण अफसरों के जनता दरबार में देखने को हर कार्य दिवस में मिल रहा हैl इस एपिसोड में दी गई तस्वीरें जनता दरबारों की स्थिति बयां कर रही हैंl

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लखनऊ/जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l वर्ष 2017 में जब गोरक्ष पीठाधीश्वर और तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री पद की शपथ ली थी तभी उन्होंने खुद की पूर्व से संचालित अपने क्षेत्र के 'जनता दरबार' को समूचे प्रदेश में लागू कर दियाl इसमें वह खड़े होकर कुर्सी पर बैठे आमजन की समस्या सुन रहे हैंl इसका असर ये हुआ कि सभी मन्त्री और अधिकतर विधायकों ने भी अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनता दरबार लगाना शुरू कर दियाl हलांकि ये प्रतिनिधि खुद भी जनता के साथ कुर्सियों पर बैठकर समस्या निस्तारण करते हैंl यदि इस योजना के विपरीत अब तक कोई दिख रहा है तो वे हैं प्रदेश के नौकरशाहl अधिकतर जनपदों के डीएम और एसपी के जनता दरबार में खड़ी जनता को देखकर यही महसूस होता है कि आज भी हम 80 साल पीछे वाले युग (गुलामी) में जी रहे हैंl हम यहां जौनपुर के एसपी कुंवर अनुपम सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन की तस्वीर साझा कर रहे हैं, ताकि हमारे पाठकों को लिखी गई स्टोरी का एहसास खुद ब खुद हो जाएl इसमें जहां कप्तान ब्रिटिशकाल के 'वायसराय' नजर आ रहे हैं, वहीं जनता गुलामों की तरह गिड़गिड़ाती दिख रही हैl जबकि  सीएम योगी 'जनसेवक' सरीखे कुर्सी पर बैठी जनता के पास जाकर उनकी समस्या पूछते दिख रहे हैंl





दरअसल जब नौ साल पूर्व  योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुखिया बने तब तक यहां की कानून व्यवस्था रसातल में जा चुकी थीl अपराधियों का दबदबा हर जिले के गांवों और मोहल्लों तक ऐसा कायम था मानो इनके रुतबे के आगे पुलिस- प्रशासन का इकबाल पानी भरता नज़र आ रहा हैl थानों में तत्कालीन सारकारों के छुटभैये नेताओं का ही बोलबाला थाl शायद उनके आगे विवश पुलिस -प्रशासनिक अफसरों को विवश देख सीएम ने उन्हें सम्पूर्ण अधिकार दे दिये लेकिन यह भी संकेत दिया कि आमजन को थानों, चौकियों और ब्लॉकों में भी सम्मान सहित कुर्सी दी जाएl इसे दरकिनार करते हुए नौकरशाही ने अधिकार पाते ही फ़िर ब्रिटिशकाल वाली कार्यशैली अपना लीl 'तहलका संवाद' टीम द्वारा की गई पड़ताल का विवरण पिछले दो एपिसोड में दिया गया हैl इसमें जौनपुर के दो थानों सरपतहा और सिकरारा में थानेदारों द्वारा जिन दो परिवारों को मुकदमे में फंसाया गया है उनकी पीड़ा को उकेरा गया हैl सरपतहा का थानेदार सिपाही से प्रमोट होकर दारोगा बना और जौनपुर में तबादला होकर आया तो एक बार कोतवाल भी बन गया थाl उसे पूर्व एसपी डॉ अजय पाल शर्मा ने निलम्बित किया था फ़िर भी उनके ट्रांसफर के बाद वह थानों का प्रभार पाता रहाl शाम छह बजे तक सोने वाले इस थाना प्रभारी से मिलने के लिए ग्राम छीतमपट्टी के वयोवृद्ध शिक्षक रुपनारायन सिंह, उनके दो पुत्रों में एक कैंसर पीड़ित दोपहर से इंतजार करते रहेl वह जब शाम को मिला तो बोला कि आपके खिलाफ मुकदमा लिखा जा चुका हैl दिलचस्प ये है कि जिस जमीन पर हुए झगड़े में रिपोर्ट लिखी गई उसमें पहले से मुकदमा चल रहा है लेकिन दूसरे पक्ष की भारी जेब ने उससे यह कमाल करा दियाl पीड़ित शिक्षक ने इस मामले को 'आई जी आर एस' में शिकायत की तो बीते दिवस महकमा खड़बड़ाया और मौके की फोटोग्राफी की गईl इसी तरह सिकरारा थानेदार ने पासी समाज के उस पक्ष के एक व्यक्ति को जेल भेजा जिसे उसी समाज के दबंगों ने पीटकर गम्भीर रूप से घायल किया थाl इन कहानियों का सीधा मतलब ये है कि 'वायसराय' रूपी एसपी के नियंत्रण से उनके ही मातहत बाहर हैंl गुलाम अगर कोई है तो वह है जनताl


कहीं दबंगों के ही पक्ष में तो नहीं खड़ी है जौनपुर पुलिस! पिछले दिनों बक्शा थाना क्षेत्र में हुई एक व्यक्ति की हत्या के बाद रात में पीड़ित परिवार की महिला से उसका मोबाइल लेकर उसमें रिकॉर्ड हुए वीडियो, वाइस और तस्वीरों को डिलीट करने वाले वर्दीधारी का यह कारनामा तो इसी बात की गवाही दे रहा हैl मीडिया के सामने पीड़ित महिला का बयान भी इसे प्रमाणित कर रहा हैl घटना में हुआ यह था कि सद्दोपुर कौली गांव में भूमि को लेकर दो पक्ष भिड़ गएl इस खूनी संघर्ष में एक पक्ष के भाजपा कार्यकर्ता अजय सिंह की मौत हो गईl इनके बच्चों समेत चार अन्य घायल हो गएl इसी मामले में घटना के अगले दिन गांव में ही जमकर बवाल हुआl जनाक्रोश का कारण बना दारोगा द्वारा पीड़ित पक्ष की महिला के मोबाइल से हत्यरोपियों की फोटो, वीडियो डिलीट किया जानाl बाकी अगले एपिसोड मेंl,,,, क्रमशः

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