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मिशन यूपी-27: योगी आदित्यनाथ की पिच पर खेलना अखिलेश यादव को भारी पड़ रहा, पहले बैटिंग के ऑफर पर वाकओवर! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 मिशन यूपी-27: योगी आदित्यनाथ की पिच पर खेलना अखिलेश यादव को भारी पड़ रहा, पहले बैटिंग के ऑफर पर वाकओवर! 


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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-अयोध्या के चंदा चोरों के मुद्दे से सनातान वाले स्टेडियम में उतरने की बजाय सपा सुप्रीमों यदि आज़म खान के मामले में सड़क पर उतरे होते तो शायद अपने कोर वोटरों को दुविधा मुक्त रखतेl 

-सपा प्रमुख द्वारा पीडीए छोड़ हिंदुत्व के ट्रैक पर आने से लक्ष्य दिवा स्वप्न सरीखा, उनकी यह राजनीतिक बैटिंग 'माया मिली न राम' की तरह होती जा रही, हिन्दू विश्वास नहीं कर रहा और मुस्लिम डिग रहाl

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लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l अयोध्या में चंदा चोरी को मुद्दा बनाकर सनातन वाले स्टेडियम में हिदुत्व की पिच पर खेलने आये सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए पहले बैटिंग के ऑफर पर ही वाकओवर दे दियाl राजनीतिक विश्लेषक तो ऐसा ही महसूस कर रहे हैंl जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि राम द्रोही यानी कोई भी चंदा चोर नहीं बचेगा और अखिलेश यादव यदि हिंदुत्व में अपनी निष्ठा दिखाने के ख्वाहिशमन्द हैं तो मथुरा में भागवान श्री कृष्ण का मन्दिर बनाने में साथ देंl माह भर होने को है लेकिन इसका जवाब वह अभी तक नहीं दे पाए जिसे वाकओवर ही समझा जा सकता हैl दरअसल वह राजनीतिक क्षितिज पर त्रिशंकु सरीखे अटक गए हैंl 



कारसेवकों को अखिलेश यादव पर भरोसा ही नहीं हो रहा: राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडेय' कहते हैं कि जब अयोध्या में कारसेवकों पर अखिलेश यादव के पिता तत्कालीन मुख्यमन्त्री मुलायम सिंह यादव ने गोली चलवाई थी तब उनके नाम के आगे 'मुल्ला' जुड़ गया था और उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ी तो फ़िर गोली चलवायेंगेl वर्ष 2012 में अखिलेश यादव यूपी के सीएम बने तब से लेकर आज तक उस घटना के लिए वह माफ़ी तक नहीं मांगे, ऐसे में सनातनी अथवा हिन्दू कैसे उनके प्रति 'राम में आस्थावान' होने पर विश्वास करे कि वह सच बोल रहे हैंl बल्कि सीएम बनने के बाद इन्होंने आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए एड़ी -चोटी का जोर लगा दिया थाl यह तो संयोग से कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और वे आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैंl रहा सवाल अयोध्या में करोड़ों की रकम और सोना- चांदी चोरी होने के भंडाफोड़ का तो यह सच है कि अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया था, क्योंकि चोरों में शुमार टिन्नू यादव उसके संपर्क था जिसका खुलासा एसआईटी की जांच में होता जा रहा हैl ध्यान रहे कि उनपर मुस्लिमों का भरोसा तभी डिगने लगा था जब आज़म खान सपरिवार गिरफ्तार हुए और उनकी जौहर युनिवर्सिटी का भी पलीता लग गया और अखिलेश यादव व समाजवादी पार्टी बचाव में नहीं उतरेl विदित हो कि आज़म खान ने ही उन्हें सीएम की कुर्सी पर बिठाने में अहम भूमिका निभाई थीl अब वह सनातनी बनकर हिंदुत्व की पिच पर खेलने लगे तो 2024 में हिट हुआ उनका 'पीडीए' हवा होने लगा हैl इस तरह 'माया मिली न राम' वाली कहावत वर्तमान में उनपर फिट बैठ रही हैl वह हिंदुओं के विरोध में खड़े होकर समर्थन की चाहत रखने वाले नेता बन चुके हैंl


योगी आदित्यनाथ ने नहीं बदला हिंदुत्व वाला ट्रैक: वर्ष 2017 के यूपी विधान सभा चुनाव में सपा के पराभव और भाजपा की जीत पर जब योगी आदित्यनाथ सीएम बने तब से अब तक साढ़े नौ साल में उन्होंने हिंदुत्व की लगाम को ढीला नहीं छोड़ा बल्कि बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के नरसंहार के दौरान नारा दिया कि 'बन्टोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ होगे' यही नारा भाजपा और सनातन के लिए मन्त्र बन गयाl परिणाम स्वरूप यह पार्टी राज्य दर राज्य में फतह हासिल करती जा रही है और अखिलेश यादव की सपा समेत विपक्षी गठबंधन मात खाता जा रहा हैl


निष्कर्ष: राजनीतिक विश्लेषण के नजरिये से देखें तो सनातन अथवा हिंदुत्व की पिच पर खेलना सपा मुखिया अखिलेश यादव के लिए 'राजनीतिक आत्मघात' साबित हो रहा हैl जैसे छुट्टा पशुओं से फ़सलों को बचाने के लिए किसान 'धोख' बनाकर लगाते हैं जो हफ़्ते भर भी नहीं चल पाता है, उसी तरह सपा मुखिया द्वारा ओढ़े गए 'सनातन संस्कृति और हिंदुत्व' रूपी 'खोल' को पब्लिक तराश रही हैl

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