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ओवैसी का डर: कहीं इसी कारण सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव जेल में आज़म खान से मिलने पहुंचे! Tahalka Samvad

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 मिशन यूपी 2027 का सेमी फाइनल शुरू -------


ओवैसी का डर: कहीं इसी कारण सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव जेल में आज़म खान से मिलने पहुंचे! 

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कैलाश सिंह

राजनीतिक संपादक

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-कांग्रेस ने ब्राम्हण- मुस्लिम चेहरा आगे किया और उसी के भरोसे गठबंधन में सीटों की संख्या लगभग 50-50 पर दावा ठोंक रहीl

-असदुद्दीन ओवैसी का संदेश: अब अब्दुल्ला दरी नहीं बिछाएगा, कहीं समाजवादी पार्टी की हालत बिहार के आरजेडी सरीखे न कर देl

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लखनऊ/दिल्ली, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l मिशन यूपी 2027 का अभियान पश्चिम बंगाल के विधान सभा चुनाव के बाद ही शुरू हो गया था, लेकिन  राज्य सभा और शिक्षक, स्नातक एमएलसी चुनाव ने राजनीतिक दलों के इस मिशन को सेमीफ़ाइनल में पहुंचा दिया हैl उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच अभी तक फंसी हैl क्योंकि दोनों दलों के बीच छीना -झपटी मुस्लिम वोटरों को लेकर हैl कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर ब्राम्हण आराधना मिश्रा के साथ सपा से आये मुस्लिम चेहरा ईमरान मसूद को मैदान में लाकर सीट बंटवारे पर अपनी दावेदारी 50 फीसदी पर कर दी हैl जबकि सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरा आज़म खान की कभी परवाह नहीं कीl हालांकि असदुद्दीन ओवैसी दक्षिण के हैदराबाद से आते हैं इसलिए यूपी में वह बड़ा फैक्टर तो नहीं होंगे लेकिन बिहार की तरह डेंट तो लगा ही सकते हैंl 



असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर के टांडा में विगत 18 अक्टूबर को सभा में कहा कि अब अब्दुल्ला दरी नहीं बिछाएगाl वह सांसद, विधायक और बड़ा नेता बनेगाl इसी के बाद अखिलेश यादव आनन -फानन जेल पहुंचकर आज़म खान से मिलने पहुंचेl राजनीतिक विश्लेषकों डॉ अरविंद मिश्र, एस. पांडेय के मुताबिक लगभग एक घंटे की मुलाकात के बाद अखिलेश यादव आज़म खान की नब्ज़ टटोले थे, लेकिन आज़म खान उनकी बात मान गए हों ऐसा अखिलेश यादव के चेहरे से परिलक्षित नहीं हुआl पश्चिमी यूपी में आज़म खान का दबदबा आज भी हैl वह भले ही खलनायक थे लेकिन 10 बार एमएलए, एक बार सांसद, चार बार यूपी में मन्त्री भी रह चुके हैंl उनका अपना सांगठनिक ढांचा और राजनीतिक रसूख है जिसे नकारा नहीं जा सकता हैl


सनातनी ध्रुवीकरण ने जातीय समीकरण को ध्वस्त किया: बाबरी विध्वंस और राम मन्दिर निर्माण के बाद से ही जातीय समीकरण को सनातनी ध्रुवीकरण ने ध्वस्त करना शुरू कर दिया थाl हालांकि चुनावी समर में भाजपा के विजयी रथ चाहे हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अहम भूमिका को दरकिनार करके नहीं आंका जा सकता हैl इसके अलावा सम्बन्धित राज्यों के विपक्षी दलों की जातीय कमजोरी भी उनकी पराजय का प्रमुख कारण बनी हैl यूपी में भाजपा का चेहरा दो बार से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो खुद उपर्युक्त राज्यों में 80 फीसदी से अधिक स्ट्राइक रेट वाले स्टार प्रचारक रहे हैंl इनकी कार्यशैली तो विभिन्न राज्यों ही नहीं, इटली जैसे यूरोपीय देशों में भी अपनाई जाने लगी हैl यानी वह खुद विपक्ष के सामने स्तम्भ सरीखे खड़े हैंl हाल ही में दो बड़े सर्वे आये जिसमें योगी को 66.6 और 267 सीटों पर बढ़त का दावा हैl राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा की जान 'यूजीसी' रूपी तोते में अटकी पड़ी है जिसे मुद्दा बनाने की बजाय विपक्षी पार्टियां बग़ैर सुबूत वाले मुद्दे 'वोट चोरी' को लेकर घूम रही हैंl


रुहेलखंड में आज भी आज़म खान का जबरदस्त प्रभाव है: राजनीतिक विश्लेषक एस. के. एच. दीपू के मुताबिक जिस ओवैसी को विपक्षी पार्टियां बीजेपी की 'बी टीम' बोलते आये हैं उसी असदुद्दीन ने टांडा की सभा में कहा कि आज़म खान की तकलीफों का आरपार नहीं हैl वैसे भी आज़म की फीलिंग भी सपा को लेकर बहुत अच्छी नहीं है क्योंकि उनकी परवाह श्री यादव ने कभी गम्भीरता से नहीं कीl आज़म खान खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांगठनिक ढांचा और रसूख वाले समूचे रुहेलखंड में लगभग पांच दर्जन सीटों पर हैl वैसे भी 57 सीटें मुस्लिम फैक्टर की मानी जाती हैंl


 आज़म खान से अखिलेश यादव के मिलने की विवशता ये निर्णायक सीटें- तराई' रुहेलखंड और अवध के कुछ इलाकों के अलावा पश्चिम यूपी के बिजनौर, मेरठ, बरेली, श्रावस्ती, बदायूं,रामपुर, सहारनपुर, संभल, बहराइच, बलरामपुर श्यामली, मुरादाबाद, आजमगढ़ की कुछ सीटें हैं, जहां आज़म खान का प्रभाव हैl उसी गढ़ में जाकर ओवैसी ने आज़म खान की तकलीफों का जिक्र करते हुए कहा कि कब तक अब्दुल्ला दरी बिछाएगाl समय आ गया है कि मुस्लिम वोटर अब अपने बीच से नेता चुनें, कब तक यह समुदाय अखिलेश यादव और गाँधी परिवारों को अपना नेता चुनेगाl

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