यूपी दंगा 3: योगी को चुनौती देना तौकीर रजा को पड़ा भारी,जलालुद्दीन उर्फ़ छांगुर का भी साम्राज्य तबाह!
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-कानून व्यवस्था में सख़्त मायावती से भी बच निकला था 2010 के बरेली दंगे का मास्टर माइंड तौकीर रजा, डेढ़ दशक बाद योगी आदित्यनाथ से लिया पंगा तो 84 लोगों के साथ पहुंच गया जेल, दो सौ करोड़ से अधिक का उसका साम्राज्य भी हुआ ध्वस्तl इसी तरह धर्मांतरण का रैकेट चलाने वाला छांगुर उर्फ़ जलालुद्दीन भी पहुंचा सीखचों के पीछे, उसकी हजारों करोड़ की संपत्ति भी मिट्टी में मिलीl
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लखनऊ/ बरेली, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l तौकीर रजा गुंडा नहीं, समाज द्रोही हैl वह बरेली में हुए 2010 के दंगे का मुख्य आरोपी रहा, तब इस शहर ने एक महीने तक कर्फ्यू का संत्रास झेला थाl फ़िर भी वह हिरासत से तीन दिन बाद छूट गया, मायावती की सख़्त क़ानून व्यवस्था भी उसका बाल बांका नहीं कर सकी तो वह ढीठ हो गयाl इसके बाद उसके समर्थन से वोट पाने के लिए राजनीतिक दलों का संरक्षण मिलने लगा तो वह योगी आदित्यनाथ को बीते महीने 26 सितम्बर को चुनौती दे बैठाl यही उसके जीवन की सबसे बड़ी गलती साबित हुई और वह 84 लोगों के साथ जेल पहुंच गयाl उसकी नामी- बेनामी और समर्थकों के दो सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त और ध्वस्त हो गईl
दरअसल जिस नाथ नगरी बरेली को पिछले डेढ़ दशक से तौकीर रजा अपनी 'जहरीली तकरीर' से 'सांप्रदायिकाता के तन्दूर' की आंच में पका रहा थाl उसकी तरफ से गफ़िल सरकारों को समर्थन और वोट की तिजारत करके मुस्लिम समुदाय का वह सौदागर बन बैठा थाl शायद उसे योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस वाले शासन और बुलडोजर' का अंदाज़ा ठीक से नहीं हो पाया था, उसे लगा कि वह एक राजनीतिक पार्टी का मुखिया यानी खुदमुख्तार हैl तमाम पोलिटिकल पार्टियों के नेता उसके साथ हैंl इसलिये योगी कुछ नहीं कर पाएंगेl उसने सम्भल की घटना से भी सबक नहीं लियाl जाहिर है 'उसका हाल उस पगलाये गीदड़ सरीखा हुआ जो जंगल छोड़कर शहर में पहुंच गया थाl' उसने 'आई लव मोहम्मद' के स्लोगन पर हजारों लोगों को इस्लामिया ग्राउंड में पहुँचने की अपील कर दी और खुद गायब रहाl दंगा भड़का लेकिन सभी कैमरों की नज़र में आ गएl अब जेल की हवा खा रहे हैंl
दूसरी तरफ जलालुद्दीन ने खुद का नाम 'छांगुर बाबा' रखकर छद्मवेश में 'लव जिहाद' के साइलेंट स्लोगन पर काम करके हजारों करोड़ की विदेशी फ़ंडिंग से संपत्ति का सम्राज्य खड़ा कर लियाl ऐसा नहीं कि उसकी तरफ़ से सरकार गफ़िल थीl उसके पीछे तीन साल से खुफिया एजेंसियां लगी थींl हर लड़की के लिए विदेशों से उसे मोटी रकम मिलती थीl हर लड़की सौंदर्य, जाति और घरानों के हिसाब से रेट तय होते थेl उन्हें बरगलाने के लिए बाकायदे 'पेड टीम' लगी थीl लड़कियों को शीशे में उतारने के बाद इस्लाम कुबूल कराने और निकाह करके नकाब (बुर्का) में खाड़ी व मुस्लिम देशों में भेजा जाता थाl कहावत है कि 'इश्क और मुश्क' छिपाये नहीं छिपती हैl अपनी मौजूदगी का एहसास वह खुद करा देती हैl इसी तरह उसके पास बढ़ती अकूत रकम से हो रहे भवनों के निर्माण और तेज़ी से बदलते रहन- सहन के साथ बढ़ती कथित मुरीदों की संख्या ने जहां आसपास के लोगों का ध्यान खींचा, वहीं खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गएl अब वह भी जेल की हवा खा रहा हैl

