पीयू का गड़बड़झाला 4: जेएनयू कैम्पस से जुगलबन्दी कर रहा पीयू का ट्रांजिट हॉस्टल!
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-पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सबकुछ उल्टा चल रहा, कथित जगलर शिक्षक 'पाक सेना' सरीखे मूल काम से इतर धन उगाही, परिवार और जातिवाद झंडा उठाए चल रहे हैं, जिसकी चलती है वही गिरोहबंद होकर बिंदास लूटता है, कुछ कथित शिक्षक नेता तो पीजी कॉलेजों का ठेका लेकर खुद करोड़पति बनने को अग्रसर हैं, वह वीसी को दलाल पत्रकारों की तरह सलाह देकर खुद मालामाल होते हैं, इसमें पुरोहित गैंग ऐसा है जो सभी गिरोह के लिए अय्याशी का सामान 'शराब- शबाब- कवाब' जैसी व्यवस्था मुहैया कराता है, तब जाकर जेएनयू के उन्मुक्त वातावरण वाले कैम्पस से पीयू का ट्रांजिट हॉस्टल टक्कर ले रहा है।
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कैलाश सिंह/संतोष कुमार सिंह-
(स्पेशल रिपोर्टर/ चीफ रिपोर्टर)
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लखनऊ/ जौनपुर, (तहलका न्यूज नेटवर्क) वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय 'पीयू' की स्थापना उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम स्व.'वीबी सिंह' के नाम से उसी तर्ज पर स्थापित हुआ जैसे दिल्ली में देश के प्रथम पीएम के नाम पर 'जेएनयू' की स्थापना हुई थी। वहां के कैम्पस में 'उन्मुक्त वातावरण' के साथ उम्दा शिक्षण कार्य, शोध होता रहा है लेकिन पीयू के कथित शिक्षकों ने केवल उन्मुक्त वातावरण को ही अपनाया, जिसका नतीजा 'ट्रांजिट हॉस्टल' में शराब की खाली बोतलों के साथ महामहिम के सामने आया। बाकी इसके साथ 'शबाब और कवाब' की परछाईं सुबह से देर शाम तक कैम्पस के दोनों हिस्सों यानी जौनपुर- शाहगंज रोड के दोनों तरफ़ व सड़क किनारे बने होटलों, ढाबों और शहर के होटलों में भी देखने को मिलती है।परिसर के खाली विभागों में भी कथित रासलीला खुल्लम खुल्ला होती दिखती है।
अध्यापन वाले इस झमेले से रहते हैं दूर: पीयू कैम्पस के शिक्षकों में जिनको केवल शिक्षण कार्य से मतलब है वह यहां की अंदरूनी राजनीति से दूर रहते हैं, लेकिन जो खुद और परिवार के लिए लाभ उठाने का मंसूबा लेकर नौकरी करने पहुंचते हैं वह 'पुरोहित गैंग' का मेंबर बनकर कूटिनीति के माहिर खिलाड़ी हो जाते हैं। अब जैसे कुछ बानगी पर नज़र डालिए- यहां के गुरुघंटाल को जब किसी भी समारोह के संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है तो वह कार्यक्रम के एक हफ़्ते पूर्व से छुट्टी लेकर केवल मुलेठी खाकर 'नाटक वाले किरदार सरीखे रिहर्सल' करता है, इतनी मेहनत शायद उसने अपनी पढ़ाई के दौरान नहीं की होगी। इस बीच कैम्पस में उसकी मेहनत का बखान उसके चेले करते रहते हैं विधार्थियों को यह सुनकर हैरत होती है, क्योंकि वह कभी क्लास में लेक्चर नहीं देता है, लेकिन कार्यक्रमों में वह मुख्य वक्ता का स्थान पाने लगा है।
कई फैकेल्टी में है विधार्थियों का टोटा: पत्रकारिता विभाग की तरह इस विश्विद्यालय की कई फेकल्टी ऐसी हैं जिनके शिक्षक अपनी तरफ़ से फ़ीस जमा करके कम से कम आधा दर्जन छात्र जुटाते हैं,बावजूद इसके कई शिक्षकों के पास महज दो छात्र ही पढ़ने वाले मिले हैं, जाहिर है जो खाली रहते हैं वह कूटिनीति के माहिर हो जाते हैं। 'एपियाई स्कोर' के आधार पर इस बार जिन पांच शिक्षकों को सम्मान कुलाधिपति महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल के हाथों मिला उनमें एक महिला शिक्षक ऐसी हैं जिन्हें अपनी विशेषज्ञता वाले विषय की बजाय दूसरी फैकेल्टी में नियुक्ति मिली है, लेकिन उनके पति वह महापुरुष हैं जो शासन भेजी गई सूची में उन पांच शिक्षकों में अपनी शिक्षक पत्नी का नाम प्रमुखता से रखा। यह पावर उनके पास 'कन्वेनर' होने के नाते थी, हालांकि वह खुद जिस फैकेल्टी में शिक्षक हैं, उसमें भी छात्रों का 'टोटा' है। शायद इसीलिए उन्हें अस्थाई वित्त जैसे पद भी मिलते रहते हैं।
कुछ कथित शिक्षकों के लिए पीयू कैम्पस बना चारागाह: यहां जिन शिक्षकों का शिक्षण कार्य से कोई खास वास्ता नहीं है वह गुरुघंटाल की गैंग के अहम मेंबर हो जाते हैं,ऐसे लोग अपने परिवार और परिचितों के अलावा अन्य जुगाड़ू छात्रों का नम्बर बढ़ाने की एवज में सुविधा शुल्क किसी भी रूप में वसूलते हैं।
एक लुटेरा शिक्षा आयोग में पहुंचा और मालामाल होकर लौटा: इसी विश्वविद्यालय के अधीन एक पीजी कॉलेज का शिक्षक 'आरएसएस' से जुगाड़ लगाकर 'बीएचयू' में पहुंच गया, फिर इसी रास्ते से जुगाड़ लगाया और शिक्षा आयोग में दाखिल हो गया, उसकी वसूली प्रवित्ति की दुर्गंध इतनी तेज़ी से संघ के पदाधिकारियों के पास पहुंची कि वह अपना 'सिर पकड़' लिए।इसके उत्साह का कमाल ये था कि वह ऐसी ही पहुंच अपने भाई को एक आयोग का सदस्य बनवाने को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के पास पहुंच गया, उन्होंने जब मना कर दिया तो वह जौनपुर आकर 'मुख्यमंत्री योगी' पर 'ठाकुरवाद' का आरोप पब्लिक के बीच मढ़ना शुरू कर दिया। अब अपने पदभार से खाली हुआ तो एक 'पेड सुरक्षा कर्मी' लेकर चलता है।
दलाल पत्रकार गिरोह और एक माननीय भी पुरोहित गैंग की राह पर अग्रसर: इस नये एपिसोड में उन दलाल पत्रकारों के गिरोह पर की जा रही पड़ताल मिलेगी जो गिद्ध सरीखे उन विभागों, अफ़सरों और नर्सिंग होम्स को टारगेट करते हैं जहां से मोटी वसूली हो जाए। एक गिरोह की सूची देख सीएमओ और उनका महकमा भ्रम में पड़ जाता है कि इनकी लिस्ट पर यदि निजी अस्पतालों को सीज किया जाने लगा तो फ़िर 'इलाज की निजी दुकानें' बंद होती जाएंगी, मानकों के हिसाब से कमी कहां नहीं रहती? फ़िर ये कथित पत्रकार डीएम तो हैं नहीं कि इनकी बात ही मानी जाए, इसी तरह एक माननीय हर साल महोत्सव के बहाने मोटी वसूली को धंधा बना लिए हैं। इस साल फ़िर एक से तीन नवम्बर को महोत्सव के लिए वसूली जारी है। सरकारी विभागों पर इनका वसूली टैक्स दो से पांच लाख, व्यापारियों पर उनकी जेब के वजन के हिसाब से, कोतेदारों और प्रधानों, भावी प्रधान प्रत्याशियों पर पांच- पांच हजार का टैक्स लगा है। पिछले साल इसी महोत्सव में हुए 'सामूहिक विवाह' में ऐसे जोड़ों की पोल खुली जो पहले से शादीशुदा रहे या फ़िर भाई- बहन, देवर या जेठ आदि निकले। यह माननीय किसी भी माध्यम श्रेणी उद्योगपति को सीएम से मिलाने के नाम पर भी लाखों की रकम ऐंठते हैं, यह बातें उनके क्षेत्र में बहुप्रचारित हैl,,,,,,, क्रमशः
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