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बिहार की चुनावी सियासत: पोस्टर और मेनिफेस्टो वार चरम पर, अब नीतीश- तेजस्वी की सीधी टक्कर! Tabala Samvad

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बिहार की चुनावी सियासत: पोस्टर और मेनिफेस्टो वार चरम पर, अब नीतीश- तेजस्वी की सीधी टक्कर! 

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कैलाश सिंह/प्रशांत त्रिपाठी-

राजनीतिक संपादक/ब्यूरो चीफ

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-महागठबंधन का सीएम चेहरा घोषित होने के बाद एनडीए भी नीतीश को सामने लाया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाजपा के लिए संजीवनी और विपक्षी दलों पर साइलेंट किलर की तरह भारी पड़ रहाl

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पटना/वाराणसी, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l बिहार प्रांत में विधान सभा चुनाव का काउंटडाउन होते ही पिछले हफ़्ते कांग्रेस को आरजेडी के दबाव में अशोक गहलोत के जरिए महागठबंधन का 'सीएम फेस' तेजस्वी यादव को घोषित करना पड़ा, लेकिन राहुल गाँधी नाराज होकर चुनावी परिदृश्य से गायब हो गएl हालांकि उनके आने के अनुमान की खबर लगातार चल रही हैl

 इधर एनडीए की तरफ़ से बढ़े कथित विपक्षी दबाव के चलते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रचार सभा में मुख्यमन्त्री फेस के तौर पर नीतीश कुमार के नाम की घोषणा कर दीl प्रचार अभियान में दोनों गठबंधन की 'राजनीतिक सेनाएं' चुनावी मैदान में डट गई हैंl दोनों तरफ़ से पोस्टर और घोषणा पत्र के अलावा किए जा रहे 'हवाई वादों' की झड़ी लगाई जा रही है,लेकिन महागठबंधन के सभी दल भाजपा के 'साइलेंट किलर' की तरफ़ से गाफ़िल हैंl संघ सूत्रों की मानें तो बिहार प्रांत की सभी विधान सभा के हर गांव और मोहल्लों में एक- एक दर्जन स्वयंसेवक चुनावी ऐलान होते ही मैदान में उतर चुके हैंl ये 'प्रचार के स्थान पर ब्रेनवाश' करते हैंl इनकी थीम 'रास्ट्र प्रथम' पर आधारित होती हैl 


विदित हो कि बिहार में विस चुवाव के लिए मतदान दो चरणों छह और नौ  नवंबर को होना है परिणाम 14 नवंबर को आयेगाl यानी प्रचार के लिए महज हफ़्ते- दस दिन ही रह गए हैंl महागठबंधन का जो घोषणा पत्र जारी हुआ है उसमें कांग्रेस की हिस्सेदारी नहीं हैl इससे जाहिर होता है कि अंदरखाने कांग्रेस और राजद एक- दूसरे को निबटाने में लगे हैंl इस मैनिफेस्टो का शीर्षक भी 'तेजस्वी प्रण' के नाम पर रखा गया हैl इसमें किए गए वादे भी वोटरों को हैरत में डाल रहे हैंl घोषणा पत्र से पूर्व सोशल मीडिया पर चल रहा राजद के प्रचार वाला वीडियो तो 'अत्मघाती साबित हो रहा हैl क्योंकि इसके जरिए बिहार में फ़िर जंगलराज अर्थात अपहरण तक के संदेश आमजन के बीच गूंज रहे हैंl 


कांग्रेस नेता राहुल गाँधी अक्टूबर के अंत में पहुंचे  तो सबसे पहले तेजस्वी के साथ मुज़फ़्फ़र पुर में एक साथ पहली रैली कियेl हालांकि वह 'वोट अधिकार यात्रा' के बाद बिहार छोड़े तो अब जाकर लौटेl राजद -कांग्रेस के बीच 'मुस्लिम वोट बैंक' को लेकर खींचतान मची हैl ऊपर से असददुद्दीन ओवैसी और जन सुराज के प्रशांत किशोर की बाज़ नज़र भी इसी वोटबैंक पर लगी हैl सवर्णों और पिछड़ों के साथ दलित वोट बैंक पर भी दोनों गठबंधन और उनके सहयोगियों में होड़ लगी हैl


भाजपा के पक्ष में संघ बना साइलेंट प्रचारक: एनडीए के पक्ष में हरियाणा और दिल्ली का मॉडल लेकर रास्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता 'मैन टू मैन' गांव और मोहल्लों में फैल चुके हैंl लोगों के बीच मौजूद स्वयंसेवक उनकी छोटी समस्याएं खुद हल करने में जुटे हैंl हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र की तर्ज पर बिहार में भी संघ की 34 अनुसांगिक इकाइयों से जुड़े लगभग 60 हजार कार्यकर्ता चुनाव की घोषणा होते ही गांव और मोहल्लों में फैल गए हैंl इनमें शिक्षक, चिकित्सक, व्यापारी समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोग शामिल हैंl इससे पूर्व वह 'कास्ट सेंसस' में भी मदादगार साबित हुएl 

संघ सूत्रों की मानें तो हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवकों की टोली महीनों से सक्रिय हैl उनके इस साइलेंट यानी 'मैन टू मैन' संपर्क अभियान से भाजपा के कार्यकर्ताओं को दूर रखा गया हैl एक बार जो स्वयंसेवक किसी भी घर में निःस्वार्थ भाव से दाखिल होता है तो वह परिवार ऐसे मददगारों का मुरीद हो जाता हैl वैसे भी उनके लिए वे चेहरे अपरिचित नहीं होते हैंl


राजनीतिक विश्लेषकों को अनुमान है कि बि


हार का चुनावी परिणाम हरियाणा और दिल्ली की तरह पार्टियों, नेताओं के साथ आमजन को भी 'हतप्रभ' करने वाला साबित हो तो अचंभा नहीं होना चाहिएl

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