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काबुल के बगराम एरबेस पर भारत का वर्चस्व, आसमान में गरजा सुखोई 57! Tahalka Samvad

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 काबुल के बगराम एरबेस पर भारत का वर्चस्व, आसमान में गरजा सुखोई57! 


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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-बेचैन अमेरिका की चेतावनी का जवाब अफगानी आकाश में चील सरीखे झपट्टा मारने को आतुर उसके ड्रोन को भारतीय सेटेलाइट व रडार सिस्टम ने नाकाम कर दियाl

-गरजते सुखोई 57 के साथ उतरे रूसी पायलट रूपी सैन्य बल ने बगराम एयरबेस के रनवे पर दौड़ते हुए दुनिया को संदेश दे दिया कि भारत के साथ रूस भी दहाड़ रहा हैl

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लखनऊ/दिल्ली, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l अफ़ग़ानिस्तान के बगराम एयरबेस पर भारत का प्रभुत्व कायम होते ही 'मध्य एशिया' में रणनीतिक कौशल के नये इतिहास की रचना शुरू हो गईl सबकुछ इतनी तेजी से बदलने लगा कि वाशिंगटन में खलबली मच गईl नई दिल्ली आये अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री के साथ दोनों देशों में हुए व्यापारिक व रणनीतिक समझौता भी सामान्य सा नज़र आया, लेकिन जब भारतीय तिरंगा बगराम एयरबेस पर लहराया तब अमेरिका ने इसे रोकने को चेतावनी के साथ अपने टोही ड्रोन भेजे, जिसे निष्क्रिय करके भारत ने लौटने पर विवश करके यह संदेश भी दे दिया कि 'भारत अब बग़ैर किसी दबाव के अपने फैसले खुद करता हैl अफगानी धरती पर फौजियों के बूट और तोपों की आवाज़ के साथ आसमान में गरजते 'सुखोई 57' की पायलट- पलटन और रूस के सैन्यबल ने दुनिया को चौंका दियाl इस तरह भारत ने मध्य एशिया में 'भरोसे' के बल पर शक्ति संतुलन बना लिया, जबकि अमेरिका ने दो दशक तक ताकत के बल पर राज किया लेकिन तालिबान को कभी न हरा सकाl



आज से पांच दशक पूर्व इसी एयरबेस पर सोवियत रूस का कब्जा रह चुका था लेकिन इस बार रूसी सैनिकों और जेट की उड़ान ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका को भी हिलाकर रख दियाl समूची व्यवस्था इतनी तेजी से बदलती जा रही है कि किसी को कुछ समझ आने से पहले भारतीय प्रभुत्व और मजबूत नज़र आ रहा हैl यह किसी चमत्कार से कमतर नहीं लग रहा हैl एक तरफ़ अमेरिकी सैनिकों द्वारा 2021 में नष्ट किये गए रनवे ठीक करने में लगे भारतीय इंजीनियर जादुई कमाल कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बिगड़े रडार व सैटेलाइट सक्रिय हो गएl जब तक भारत को 'बगराम एयरबेस' को छोड़ने की अमेरिकी धमकी मिलती है तब तक यहां की धरती से लेकर आसमान तक रूसी सैनिकों की मौजूदगी से यह संदेश फैल जाता है कि भारत अकेला नहीं हैl साथ ही तालिबानी सरकार का बयान जारी होता है कि भारत जब तक चाहे हमारे एयरबेस का इस्तेमाल कर सकता हैl यह हमारे रणनीतिक -व्यापारिक समझौते का हिस्सा हैl


ध्यान रहे कि भारत की कूटिनीति नज़र अफ़ग़ानिस्तान पर 2021 से ही थीl यही कारण है कि अमेरिकी सैनिकों के उस देस को छोड़कर जाने के बाद अकेले भारत हर वक्त उसकी मदद को तत्पर रहाl इससे पूर्व के दशकों में भारत ने वहां सलमा डैम, हाईवे, समुद्री पोर्ट, बिजली, संचार नेटवर्क, संसद भवन, स्कूल कॉलेज,अस्पताल आदि की व्यवस्था और निर्माण कर चुका थाl


अफ़ग़ानिस्तान का बगराम एयरबेस मध्य एशिया में रणनीतिक कौशल के नजरिये से अति महत्वपूर्ण हैl यही अमेरिकी चिंता का प्रमुख कारण हैl पाकिस्तान की बेचैनी अपनी खुराफाती सुरक्षा को लेकर बढ़ी हुई हैl वाशिंगटन इसलिए भी भौंचक है कि जिस बगराम एयरबेस पर सैन्य ताकत से उसका कब्जा था, उसे भारत ने केवल भरोसे (विश्वास) के बल पर कैसे हासिल कर लिया? और अफगानी जनमानस को भी भारत का साथ मिल रहा हैl

नोट- देस- विदेश की खबरों के लिए हमारे डिजीटल प्लेटफार्म -  www.tahalkasamvaad.com को अवश्य पढ़ेंl साग्रह धन्यवाद l

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