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राहुल गाँधी: भारतीय राजनीति का भटकता सितारा, इंग्लिश का चिंतन, हिन्दी में भाषण! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 राहुल गाँधी: भारतीय राजनीति का भटकता सितारा, इंग्लिश का चिंतन, हिन्दी में भाषण! 


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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'वोट चोरी रोको रैली' में 14 दिसम्बर को फ़िर यह साबित हो गया कि पार्टी का अध्यक्ष कोई हो, सुप्रीमों तो राहुल गाँधी ही हैंl

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दिल्लीl(तहलका संवाद) वन्दे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर संसद में हुई चर्चा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर खुद वक्तव्य देने की बजाय अपनी बहन प्रियंका वाड्रा गाँधी को आगे करने वाले राहुल गाँधी विदेश यात्रा पर निकल गए हैंl अभी 19 दिसम्बर तक संसद का शीतकालीन सत्र चलना है और वह 15 को ही जर्मनी रवाना हो गएl वहां की लेफ़्ट पार्टी के न्योते पर वह गए हैं, लेकिन सड़क से लेकर संसद तक पीएम मोदी को अपशब्दों से नवाजने वाले कांग्रेस के ये राजकुमार अपनी पार्टी में जिस अनुशासन और लोकतन्त्र (डेमोक्रेसी) का दावा करते हैं, उसे खुद ही उन्होंने एक बार फ़िर 14 दिसम्बर की रैली में तार- तार कर दियाl उसी दौरान यह भी साबित हो गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे भी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की तरह कथित गाँधी परिवार की कठपुतली हैंl 


राजनीतिक सूत्रों की मानें तो राहुल गाँधी वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर सोचते तो इंग्लिश में हैं लेकिन भाषण हिन्दी में देते समय भारतीय संस्कृति का ध्यान नहीं रख पाते हैंl लिहाजा वह अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी अपमान करते रहते हैंl ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल वह विदेशों में भी करते हैंl



दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहने वाली सोनिया गाँधी का पुत्र मोह राहुल गाँधी को 'भारतीय राजनीति का भटकता सितारा' बना दिया हैl क्योंकि उनका यह राजकुमार संसदीय परम्परा को भी गम्भीरता से नहीं लेता हैl प्रियंका वाड्रा गाँधी को पार्टी की कमान देने की जिसने भी सिफारिश की वह खुद पार्टी से बाहर नज़र आता हैl कांग्रेस के इस खेवनहार की गतिविधि देखकर राजनीतिक विश्लेषक व बुद्धिजीवी भी अचंभे में हैंl उन्हें भी दुविधा ये है कि यह 'गाँधी परिवार' कांग्रेस पार्टी को किस मुकाम पर ले जाना चाहता है या फ़िर दिल्ली में दस जनपथ के अपने बंगले बचाने को राजनीति में हैl आने वाले समय में पार्टी पर कब्जे को लेकर यदि भाई- बहन के बीच संघर्ष हो तो किसी को हैरत नहीं होनी चाहिएl क्योंकि दोनों के सलाहकार संगठन के आंतरिक गतिविधियों से एक- दूसरे को नीचा दिखाने से नहीं चूकते हैंl


विदित हो कि वर्ष 2007 में गुजरात विधान सभा का चुनाव हो रहा थाl एक सभा में सोनियां गाँधी को लगा कि यदि हम सीधे तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी पर हमला करेंगे तो कांग्रेस फ़िर सत्ता में लौट आयेगीl उन्होंने मोदी के लिए 'मौत का सौदागर' शब्द का प्रयोग कर दियाl लेकिन ये शब्द गुजरात के लोगों के दिल को छू गयाl क्योंकि ये शब्द वर्ष 2002 में हुए दंगे के संदर्भ को लेकर कहे गए थेl जिसमें हिंदू और मुस्लिम सभी मारे गए गए थेl लेकिन तब से अब तक लगभग 24 साल से गुजरात दंगा मुक्त भी हैl इसका श्रेय कांग्रेस या गाँधी परिवार ने न तो मोदी को दिया और न ही भाजपा कोl इसी दोषारोपण का खामियाजा कांग्रेस भुगत रही हैl यानी वह सत्ता में नहीं लौट सकी हैl बावजूद इसके उस पार्टी और परिवार को समझ नहीं आ रही हैl आज भी 'चौकीदार से लेकर वोट चोर' तक कहने से गुरेज नहीं हैl जबकि इन कथित मुद्दों पर जन समर्थन भी नहीं हैl यदि ऐसा होता तो बिहार चुनाव में इसका असर जरूर दिखा होताl


विगत 14 दिसम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली में जुटी भीड़ के मामले में पार्टी की इज्जत हरियाणा और राजस्थान ने बचा लीl इसे 'वोट चोरी रोको रैली' का नाम दिया गया थाl इसमें पार्टी के सभी राज्यों से भी तमाम नेता मौजूद थेl बिहार विधान सभा चुनाव में 'वोट चोरी' का मुद्दा फेल हो गया था, फ़िर भी राहुल गाँधी मानने को तैयार नहीं हैंl बग़ैर जन समर्थन के इस मुद्दे को जीवित रखने को 'वोट चोर, गद्दी छोड़' का नाम देकर हुई रैली में नारे लगे-' मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी', ये नारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे और गाँधी परिवार के तीनों सदस्यों की मौजूदगी में लगेl फ़िर भी किसी ने नहीं रोकाl अलबत्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष का अपमान लाइव टीवी के सामने तब हो गया जब उनके भाषण के लिए पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने घोषणा कीl श्री खड़गे उठने लगे तभी राहुल गाँधी ने कहा कि मैं बोलूँगा, तब खड़गे को बैठना पड़ाl इस तरह रैली में उनका अपमान हुआ और वह लोगों की नज़र में पूर्व पीएम मनमोहन सरीखे गाँधी परिवार के कठपुतली नज़र आयेl



कांग्रेस में लोकतंत्र कायम रहने का दावा: कांग्रेस में लोकतन्त्र बने रहने का जो ढोल पीटा जाता है, उसकी बजाय पार्टी ही ढोल बनती जा रही हैl अब यहां जिन घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें प्रियंका वाड्रा गाँधी के प्रशंसकों का हश्र जानकर पार्टी में लोकतन्त्र का अनुमान लगाया जा सकता हैl एक बार नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में मुख्यमन्त्री बनने के लिए 'पांच सौ करोड़ का ब्रीफकेस' देना पड़ता हैl साथ में यह भी बताया कि मेरे पति नवजोत सिंह सिद्धू के प्रियंका वाड्रा गाँधी से नजदीकी सम्बन्ध हैंl इसी बयान के बाद सिद्धू को पार्टी से बाहर कर दिया गयाl इसी तरह उडीसा में कांग्रेस के पूर्व विधायक मो.मुकीम भ्रष्टाचार के मामले में चुनाव से अयोग्य हुए तो उनकी बेटी विधायक हैंl उन्होंने पिछले हफ़्ते पार्टी सुप्रीमों को एक पत्र लिखा जिसमें जिक्र किया कि कांग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए प्रियंका वाड्रा को पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिएl उस पत्र के जवाब में पूर्व विधायक को कांग्रेस से निष्कासन वाली चिठ्ठी मिल गईl इन घटनाओं के जिक्र के संदर्भ में यही समझा जा सकता है कि 'पार्टी में लोकतन्त्र कायम' बताना कितना हस्यास्पद हैl रहा सवाल पार्टी को कब्जे में लेने का तो प्रियंका वाड्रा गाँधी को अपने ही भाई से एक न एक दिन जंग करनी पड़ेगी!फिलहाल वह इस जंग को टाल रही हैंl यदि उन्हें राजनीति में रहना है तो पार्टी के अंदरखाने जारी 'शीतयुद्ध' की बजाय 'सीधी जंग' के लिए आगे आना होगा या फ़िर राजनीति से संन्यास लेना पड़ेगाl,,, क्रमशः

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