यूपी में नशे का धंधा: कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट को रौंदने के लिए योगी का बुलडोजर तैयार!
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कैलाश सिंह
विशेष संवाददाता
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-कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट से जुड़े एक दर्जन से अधिक नामजद तस्करों की कुंडली से उनकी अवैध संपत्ति खंगाली जा चुकी हैंl इसी हफ़्ते पूस की हाड़तोड़ ठंड में बुलडोजर की गर्जना शुरू हो तो हैरत नहीं होनी चाहिएl
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लखनऊ/वाराणसी, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l उत्तर प्रदेश विधान सभा सत्र के दौरान मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जब विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के कोडीन कफ़ सिरप के मुद्दे पर सदन में जवाब दे रहे थे तब उनके हाथ में मौजूद लिस्ट में सिंडिकेट के वह नाम भी शामिल थे जिनकी संपत्तियों को रौंदने के लिए बुलडोजर तैयार है जो साल के आखिरी महीने दिसम्बर की कड़कड़ाती ठंड में गरजने लगे तो किसी को हैरत नहीं होनी चाहिएl उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो जिन 79 लोगों के नाम कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट में नामजद किया गया है उनमें से एक दर्जन से अधिक की अवैध सम्पति वाली कुंडली बना ली गई हैl इसकी तैयारी उस दिन से तेज़ हो गई थी जिस दिन सीएम अपने दोनों डिप्टी सीएम के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस किए थेl
माफिया को मिट्टी में मिलाने वाला इतिहास दोहराएगा: जिस तरह पिछले वर्षों में विधान सभा सत्र के दौरान सदन में 'माफिया' को लेकर सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने सत्ताधारी दल भाजपा और सीएम को घेरने के लिए मुद्दा बनाया था तब योगी आदित्यनाथ का रौद्र रूप दिखा थाl उन्होंने कहा था कि 'हम माफिया को मिट्टी में मिलाकर छोड़ेंगेl' इसके बाद जो हुआ उसे प्रदेश ही नहीं समूचा देश जानता हैl ठीक उसी अंदाज़ फ़िर उसी हाउस में कोडीन कफ़ सिरप को लेकर सपा सुप्रीमों और पार्टी के इस मुद्दे का जवाब देते हुए योगी ने कहा कि मद्य निषेध वाले राज्यों और देशों में 'इन लीगल डायवर्जन'(तस्करी) मामले से जुड़े अपराधियों पर भी बुलडोजर चलेगाl इसके मायने राजनीतिक गलियारे में यही निकाले जा रहे हैं कि तैयारी पूरी हो चुकी हैl उन्होंने 'एनडीपीएस' कानून का भी नाम लिया थाl इसका सीधा मतलब यह भी समझा जा सकता है कि जिनकी अवैध संपत्ति पर बुलडोजर गरजेगा उन्हें स्थगनादेश (स्टे) के लिए भी कोर्ट तक जाने की गुंजाइश नहीं रहेगीl
कहीं सपा को जातिवाद का कार्ड खेलना महंगा न पड़ जाए: कोडीन कफ़ सिरप मामले में सड़क से शुरू बयानबाज़ी जब संसद में सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने उठाया तभी जाहिर हो गया था कि विधान सभा में भी इसी मुद्दे को लेकर हंगामा बरपेगा, तभी से योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस मामले को कानून के दायरे में रहते हुए हुए राजनीतिक एंगल से तलाश शुरू कर दी थीl हुआ यह था कि जब एसटीएफ का बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह कोडीन कफ़ सिरप मामले में गिरफ्तार हुआ तब पूर्व सांसद धनंजय सिंह की उसके साथ की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो गईl किसी नेता के साथ फोटो कोई ठोस सुबूत या मुद्दा नहीं हो सकता, लेकिन इत्तिफाक से प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आलोक या उसके भाई की आलीशान कोठी के सामने धनंजय सिंह का भी मकान है, लिहाजा इन दोनों ठाकुरों को जोड़कर सीएम योगी पर जातिवादी कार्ड का हमला सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने बोल दियाl हलांकि उन्हें इस कार्ड में अपनी पेंच फंसने का अनुमान जब हुआ तब तक देर हो चुकी थीl शायद इसीलिए उनकी गाड़ी का 'बैक गियर' नहीं लग पाया, और अब तो योगी ने सदन में ऐलान कर दिया कि कोडीन कफ़ सिरप माफिया पर भी बुलडोजर चलेगाl इसी नजरिये से सभी नामजद 79 आरोपियों की अवैध संपत्ति का लेखाजोखा तैयार होने लगाl पहली लिस्ट में एक दर्जन से अधिक नाम हैं, जिनमें कई जाति वर्ग के बताए जाते हैंl सूत्रों का कहना है कि बुलडोजर की चपेट में लगभग सभी आरोपी आयेंगे, क्योंकि यह अवैध कारोबार करोड़ों में हुआ और राज्यों के साथ देश की सीमा भी पार कर चुका हैl
एनडीपीएस एक्ट नशे के तस्करों के लिए है आफत: सदन में कोडीन कफ़ सिरप मामले में जवाब देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एनडीपीएस एक्ट के हवाले से भी संकेत दियाl यह कानून काफी सख़्त है जिसमें आरोपी की अवैध सम्पति के घर की कुर्की, ध्वस्तीकरण तक के नियम हैंl विदित हो कि जब बुलडोजर के मामले सुप्रीम कोर्ट में थे तब विपक्षी दलों और उनसे जुड़ी मीडिया ने भी शोर मचाया था कि 'थम गया योगी बुलडोजर', लेकिन हुआ यह कि बुलडोजर ब्रांड बनकर उभरा और देश के अन्य राज्यों के लिए नज़ीर बन गयाl क्योंकि 'कोर्ट की गाइड लाइन मिली कि किसी भी वैध सम्पति पर बुलडोजर नहीं चलेगा, लेकिन अवैध सम्पति पर इसके चलने पर कोई रोक नहीं हैl' और योगी सबसे पहले अवैध सम्पति की फाइल मजबूत करते हैं, फ़िर चलता है उनका बुलडोजरl इसका सीधा मतलब यह है कि यूपी में बुलडोजर चलाने से पहले कानून के दायरे में आरोपी को पहले ही जकड़ लिया जाता हैl यही कारण है कि ऐसे लोगों को कोर्ट तक जाने के रास्ते भी बंद हो जाते हैंl उदाहरण के तौर पर बरेली में हुए उपद्रव के मुखिया तौकीर रजा के मामले को देखा जा सकता हैl वह अपनी व सगे सम्बन्धियों की अवैध सम्पति बचाना तो दूर, ख़ुद की जमानत के लिए महीने भर तक अर्जी भी कोर्ट में नहीं दे सका थाl बाद में डेढ़ दर्जन उसकी अर्जियाँ कोर्ट से खारिज हो गईंl,,,,, क्रमशः


