नशे का धंधा: देश में कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट का विस्तार व खाडी़ देशों में तस्करी एक साथ चल रही थी!
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के एन सिंह/ संतोष कुमार सिंह
कन्सल्टेंट एडिटर/चीफ़ रिपोर्टर
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-अभी तक कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट का सरगना पुलिस की पकड़ से दूर है, वह निरंतर बदल रहा है अपना अड्डा, पिछले दिनों दुबई के होटल में चहलदमी करते सोशल मीडिया में वायरल उसके वीडियो ने सनसनी फैला दीl
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लखनऊ/वाराणसी/जौनपुर,(तहलका न्यूज नेटवर्क)l एक तरफ़ पूर्वांचल के जौनपुर, वाराणसी समेत देश के कई शहरों के दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे पड़ रहे थे तो दूसरी ओर कोडीन कफ़ सिरप सिंडिकेट के वाराणसी निवासी सरगना शुभम जायसवाल का दुबई के एक होटल की लॉबी में चहलकदमी करता वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर वायरल हो रहा थाl उसे अब तक एसआईटी, एसटीएफ व पुलिस नहीं पकड़ सकी हैl ईडी की तरफ़ से उसके घरों पर तीन बार नोटिस भी चस्पा की जा चुकी है, लेकिन वह हाजिर तक नहीं हुआl
अब सवाल ये है कि क्या जांच एजेंसियों के सक्रिय होने से पूर्व शुभम जायसवाल वाकई दुबई भाग निकला था? क्या वहां उसका अपना सैकड़ों करोड़ मूल्य वाला होटल है? क्या 130-160 रुपए मूल्य वाले प्रति पीस कोडीन युक्त कफ़ सिरप की इतनी खपत बढ़े दाम पर है कि सिंडिकेट के सदस्यों तक की लाइफ स्टाइल बदल गई? एक दशक से 'ड्रग फर्मों' को लाइसेंस देने वाली अथारिटी 'खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन' कैसे डिमांड और सप्लाई को लेकर गाफ़िल रहा? या फ़िर वह परोक्ष रूप से इस काले कारोबार का हिस्सा रहा? 'तहलका संवाद' की टीम द्वारा की जा रही पड़ताल से जो निष्कर्ष निकला उससे तो यही लग रहा है कि बग़ैर विभागीय लोगों की मिलीभगत के नशे का यह धंधा दुनिया के खाडी़ देशों तक तस्करी की उड़ान नहीं भर पाताl क्योंकि जौनपुर में ही एक ट्रक कोडीनयुक्त फेन्सा फेन्साडील कफ़ सिरप 2019 के कोरोना काल में तत्कालीन ड्रग इंस्पेक्टर ने पकड़ी थीl तब मामले को रफ़ादफा कराने में ड्रग एसोशियेशन के एक पदाधिकारी ने अहम भूमिका निभाई थीl आज वही पदाधिकारी जिला और प्रदेश की दोनों टीम का एक साथ ओहदेदार हैl तब उसने फंसे सम्बंधित फर्म संचालक को बचा लिया थाl इस बार भी औषधि प्रशासन की तरफ़ से दर्ज एफआईआर की नामजद लिस्ट में वह शुमार हैl सूत्र यह भी बताते हैं कि उसने अपने इस आका को पिछले महीनों में एक फ़ार्च्युनर कार भी गिफ्ट की थीl शुभम या अन्य ने महंगे वाहन खरीदकर जिन्हें गिफ्ट किये थे उनमें से एक फर्म अयोध्या की बताई जाती है, जिसकी प्रारम्भिक जांच में ईडी को कुछ 'क्लू' मिलने की पुष्टि हमारे सूत्र भी कर रहे हैंl
ईडी ने जौनपुर के जिन तीन अड्डों पर छापे मारे थे: उनमें एक की फर्म से कोडीन कफ़ सिरप के लिये 17 करोड़ से अधिक के लेनदेन की पुष्टि होने की चर्चा आम होने लगी हैl अब ऐसी बानगी मिलने के बाद तो यही माना जा सकता है कि 'दवा के नाम पर नशे का यह धंधा' करोड़ों के टर्न ओवर वाला हो चुका थाl शायद तभी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने 'सेम्पल जांच' के बाद मिले सुबूत के आधार पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ जांच के आदेश दिये थेl
धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग की गंध मिलने पर जांच के लिए इसमें कूदी ईडी: कोडीन कफ़ सिरप की 'डिमांड और सप्लाई' के साथ बिलिंग में मिलने वाले असन्तुलन को देख ईडी को लगा कि यहां 'मनी लॉन्ड्रिंग' का बड़ा खेल वर्षो से चल रहा हैl तभी वह जांच के लिए इस मैदान में कूद पड़ीl इन दिनों फेन्साडील पर लगे प्रतिबन्ध के चलते एक विदेशी कंपनी से कोडीन कफ़ सिरप की आपूर्ति बड़े पैमाने पर हो रही थीl उसी खेप को वाराणसी से बिहार होते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों से नेपाल, पाकिस्तान व खाडी़ देशों और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक तस्कर पहुंचाते रहेl चूंकि दवा के नाम पर बेरोकटोक 'निर्बाध' इसकी सप्लाई होती रही जिससे सिंडिकेट की चांदी कटती गईl
धीरे- धीरे देश के हर हिस्से में इस धंधे की पोल खुल रही: उत्तर प्रदेश में अब तक हुई जांच से जो खबर सूत्रों के हवाले से मिल रही है उसके मुताबिक अभी तक किंगपिन यानी सरगना शुभम जायसवाल ही मुख्य हैl जबकि गुजरात के अहमदाबाद की 'अर्पिक और इथिका' फ़ार्मास्यूटिकल कम्पनी का कोडीनयुक्त कफ़ सिरप नेपाल जाते रहना पाया गयाl इस प्रांत की कई फर्मों के डीलरों द्वारा इसे ऊँचे दामों पर बेचा जा रहा था, लेकिन वहां का सिंडिकेट यूपी के सिंडिकेट से अलग बताया जा रहा हैl,,,,, क्रमशः

