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पश्चिम बंगाल: 28 को फाइनल मतदाता सूची नहीं जारी हुई तो टलेगा चुनाव और लगेगा राष्ट्रपति शासन! Tahalka Samvad

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 पश्चिम बंगाल: 28 को फाइनल मतदाता सूची नहीं जारी हुई तो टलेगा चुनाव और लगेगा राष्ट्रपति शासन! 

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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-सियासी खेल में ममता बनर्जी का दांव पड़ा उल्टा, उनके गले की फांस बना एसआईआरl 20 फरवरी (शुक्रवार) को सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारियों के सहयोग से निर्वाचन आयोग की एक हफ़्ते में फाइनल मतदाता सूची जारी कराई जाएl अब इसके लिए बचे हैं महज दो दिनl

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दिल्ली/कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l आखिरकार पश्चिम बंगाल की मुख्यमन्त्री व तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के लिए 'गहन मतदाता पुनरीक्षण' (एसआईआर) गले की फांस बन गयाl 28 फरवरी को यदि फाइनल मतदाता सूची चुनाव आयोग नहीं जारी कर पाता है तो जाहिर है मार्च में होने वाला चुनाव टालना पड़ेगाl ऐसे में वहां केन्द्र सरकार की विवशता होगी राष्ट्रपति शासन की संस्तुति करनाl यदि फाइनल मतदाता सूची जारी हो गई तो लगभग सवा करोड़ वोटर मतदान से बाहर हो सकते हैंl यानी दोनों स्थितियों नुकसान तृणमूल कांग्रेस का ही होना तय हैl


दरअसल बिहार विधान सभा चुनाव से पूर्व जब वहां एसआईआर शुरू हुआ तभी से ममता बनर्जी ने इसे रोकने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया थाl जब वह घड़ी आई तब उन्होंने जिस तरह सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय 'ईडी' जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कार्य में बाधा पहुंचाई, उसी तर्ज पर निर्वाचन आयोग को भी काम करने से रोकने की कोशिश कीl राज्य सरकार के अधीन कर्मचारियों का सहयोग भी पूर्ण नहीं मिलाl फ़िर भी ममता बनर्जी 58 लाख वोटरों के नाम कटने से नहीं रोक पाईंl जब फाइनल मतदाता सूची जारी करने का वक़्त करीब आने लगा और इसमें 'सवा करोड़' वोटरों के नाम त्रुटिपूर्ण जिनका शुद्धिकरण नहीं होने की स्थिति दिखी तो वह सुप्रीम कोर्ट पहुँच गईंl 


सुप्रीम कोर्ट का असाधारण फैसला: तृणमूल कांग्रेस की मुखिया होने के नाते और लॉ की डिग्री हासिल ममता बनर्जी खुद कोर्ट में 'काली कोट' पहनकर प्रस्तुत हुईंl उनकी दलील केंद्रीय निर्वाचन आयोग पर अविश्वास के इर्द- गिर्द घूमती रहीl दूसरी तरफ केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भी राज्य सरकार के अधीन अफसरों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर अविश्वास देख सुप्रीम कोर्ट ने असाधारण फैसले के साथ अद्भुत निर्देश दे दिया कि- एसआईआर तो किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगाl चूंकि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग का एक- दूसरे के प्रति परस्पर विश्वास की कमी है, लिहाजा ऐसी स्थिति में कोलकाता हाईकोर्ट वर्तमान व रिटायर्ड न्यायिक अफसरों को लगाकर चुनाव आयोग के जरिए त्रुटियों की शुद्धिकारण के साथ 28 फरवरी तक फाइनल मतदाता सूची जारी करायेl सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश विगत 20 फरवरी शुक्रवार को दियाl इस तरह महज एक हफ़्ते में काम पूरा नहीं हुआ तो निर्वाचन आयोग कोर्ट से और वक़्त मांगेगाl ऐसे में मार्च में होने वाला चुनाव टालना पड़ेगा और यदि चुनाव समय से नहीं हुआ तो वर्तमान ममता सरकार का कार्यकाल खत्म हो जाएगाl तब केन्द्र सरकार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की संस्तुति करनी पड़ेगीl इस स्थिति में ममता बनर्जी के डेढ़ दशक के शासन की निरंतरता का क्रम टूटने से इनकार नहीं किया जा सकता हैl यदि निर्वाचन आयोग ने फाइनल मतदाता सूची जारी कर दी तो ममता बनर्जी के वोट बैंक को 'सवा करोड़' का और झटका लगना तय हैl इससे पूर्व 58 लाख मतदाताओं के नाम कट चुके हैंl 


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के मायने: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में केन्द्र सरकार लगभग एक दशक से प्रभावहीन हैl यानी यहां की सीएम ममता बनर्जी किसी केंद्रीय कानून को नहीं मानती हैंl परोक्ष रूप से सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे महसूस कियाl शायद इसीलिए कोलकाता हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह न्यायिक अधिकारियों को लगाकर निर्वाचन आयोग द्वारा फाइनल मतदाता सूची प्रकाशन निर्धारित तारीख 28 फरवरी तक पूरा करायेl यदि दूसरे राज्य का मामला होता तो वहां की सरकार से ही अधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया होता और इसके लिए चीफ सेक्रेटरी व डीजीपी को फटकार भी लगतीl यानी पश्चिम बंगाल सरकार और वहां के मुख्य अफसरों को 'परे' मानकर सुप्रीम कोर्ट ने महसूस किया कि अब सामान्य आदेश यहां कारगर नहीं होगाl


पश्चिम बंगाल में फर्जी मतदान की धांधली का पटाक्षेप: जिन कथित घुसपैठियों और फर्जी वोटरों के बलपर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक से शासन करती आ रही हैं, उसका पटाक्षेप 'एस आई आर' ने इस बार कर कर दियाl इसमें घुसपैठियों के अलावा राज्य छोड़कर जा चुके या मर चुके लोगों के नामों का भी दुरूपयोग फर्जी वोटिंग में माना जाता रहा हैl पोलिंग बूथों पर कब्जा सम्बन्धित पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सहज तरीका रहा हैl इस बार फाइनल मतदाता सूची प्रकाशन में त्रुटिपूर्ण 'सवा करोड़'  वोटरों के नाम कटने और 58 लाख नाम पहले ही हट चुके हैं, जिसे ममता बनर्जी के सियासी खेल की रीढ़ टूटने का संकेत माना जा सकता हैl अब ममता बनर्जी के लिए प्रदेश में चौथी बार अपनी सरकार बनाने के लिए डगर कठिन हो गई हैl यदि फाइनल मतदाता सूची इसी 28 को जारी नहीं हो पाई तो पश्चिम बंगाल का विधान सभा चुनाव राष्ट्रपति शासन में होगा जो उन्हें भारी पड़ेगाl बस दो दिन और इंतजारl

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