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ममता बनर्जी के लिए भष्मासुर बने उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, पार्टी भी हाथ से निकली! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 ममता बनर्जी के लिए भष्मासुर बने उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, पार्टी भी हाथ से निकली! 


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कैलाश सिंह-

राजनीतिक संपादक

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-महाराष्ट्र के दो राजनीतिक दलों शिवसेना और एनसीपी की राह पर चली पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक तक शासन करने वाली पार्टी टीएमसी, कुल 80 विधायकों में से 58 की राह हुई जुदाl


-पश्चिम बंगाल में 'इस्लामिक शासन' वाला फार्मूला 'बुआ- भतीजे' के लिए 'काल' बनता जा रहा, आम जनता की सजा से टीएमसी के नेता- कार्यकर्ता भी सहमेl

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कोलकाता, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l जंतुओं में एक जीव होता है 'मादा बिच्छू', उसके पेट में पल रहे बच्चे अपनी माँ के ही पेट को फाड़कर बाहर निकलते हैं और उसी को पहला ग्रास बना लेते हैंl ठीक यही हाल दीदी ममता बनर्जी का हो रहा हैl उन्होंने पार्टी के उदयकाल वाले नेताओं को दरकिनार करके जिस अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ताकतवर बनाया उसी ने कैडर को 'गुंडा और वसूली गिरोह' में तब्दील कर दियाl उन्होंने प्रदेश में 'कट मनी, निजी टोल प्लाजा, गो-तस्करी आदि को बढ़ावा दियाl संदेश खाली और आर्जिकर मेडिकल कॉलेज की घटना ने आमजन के धैर्य का बांध तोड़ दिया था, जिसका असर जल प्रलय सरीखे मतदान में नज़र आयाl जनाक्रोश तब दिखा जब अभिषेक बनर्जी पर महिलाओं ने उन्हीं के गढ़ में अंडे- डंडे से हमला कर दियाl इस घटना के बाद पार्टी के 80 में से अधिकतर विधायक भी सहम गएl यही कारण है कि उनके द्वारा नेता विपक्ष के लिए नामित विधायक शोभन देव चट्टोपाध्याय को लेकर पार्टी में बगावत हो गईl बागी ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा की अगुवाई में 56 विधायकों के गुट को स्पीकर ने मान्यता दे दीl


दरअसल पश्चिम बंगाल की दीदी  ममता बनर्जी की कुर्सी जब एक माह पूर्व चार मई को चुनाव परिणाम के दिन चली गई तभी उनकी पार्टी 'टीएमसी' के टूटने की आहट शुरू हो गई थीl तब लगा था कि भाजपा के कथित हाई कमान के ईशारे पर महाराष्ट्र के दो दलों 'शिवसेना और एनसीपी' सरीखे टीएमसी भी दरक जाएगी, लेकिन पश्चिम बंगाल में मिले भाजपा को जनादेश ने यह भी संकेत दे दिया कि यदि कांग्रेस, सीपीएम और टीएमसी की तरह उनके ही नेता, कार्यकर्ता भाजपा में शिफ्ट हुए तो इस दल का भी वही हाल होगाl इसलिए चुनाव के दौरान जो वायदे किये थे उसे पूरे करने में सीएम शुवेन्दु अधिकारी 'जी -जान' से जुटे हैंl इसीलिए टीएमसी के विधायकों को पार्टी में लेने से भाजपा कतरा रही हैl


....तब भाजपा पर वाशिंग मशीन होने की तोहमत लगी थी: महाराष्ट्र विधान सभा के चुनाव होने वाले थेl एक सभा में पीएम मोदी ने भाषण के दौरान कहा था कि सरकार बहुत बड़े घोटालेबाज, भ्रस्टाचारी को जेल भेजेगी लेकिन उन्हीं अजीत पवार(अब दिवंगत) को भाजपा ने एनडीए का हिस्सा बना लियाl इसके बाद विपक्ष ने भाजपा पर 'वाशिंग मशीन' होने की तोहमत लगाई थीl एनसीपी और टीएमसी में बगावत या टूट का कारण भी अलग हैl अजीत पवार सांगठनिक ताकत वाले नेता थे जबकि अभिषेक बनर्जी गुंडों के सरदार हैं और उनके खिलाफ जनता के मन में गुस्से का लावा उबलकर बाहर निकल रहा हैl इसलिए बागी गुट पर भी जनता को भरोसा नहीं हो रहा हैl शिवसेना को तोड़ने वाले एकनाथ शिंदे उधव ठाकरे के डिक्टेटरशिप से हलकान थे, जबकि अभिषेक बनर्जी से भी उनके विधायक उसी तरह त्रस्त हैं लेकिन उनके प्रति जनता का भरोसा नहीं हैl पश्चिम बंगाल में मिला जनादेश इस्लामिक शासन के खिलाफ हैl क्योंकि आमजन के लिए बाइक पर हेलमेट अनिवार्य था लेकिन मुस्लिम वर्ग के लिए उनकी जालीदार टोपी ही हेलमेट की गारन्टी थीl


बांग्लादेश में सनातन और हिंदुत्व की एकता पश्चिम बंगाल में प्रेरणा बनी: भाजपा ने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सनातन संस्कृति व हिंदुत्व एकता को चुनावी हथियार बनाया, लोगों के मन में जारी आक्रोश को हवा देकर उन्हें सुरक्षा की गारण्टी भी दी, जो उसके लिए प्रचण्ड बहुमत का आधार बन गईl राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडे' मानते हैं कि कांग्रेस, सीपीएम की तरह टीएमसी से भी सत्ता दूर हो जाएगीl यदि भाजपा में भी अहंकार आया तो उसका भक्षण भी पश्चिम बंगाल की जनता इन्हीं दलों की तरह कर सकती हैl

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