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पीयू में एव्रीथिंग इज़ रांग: पात्र बाहर, अयोग्य बन रहे प्रोफेसर! Tahalka Samvad

Tahalka Samvaad

 पीयू में एव्रीथिंग इज़ रांग: पात्र बाहर, अयोग्य बन रहे प्रोफेसर! 


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तहलका संवाद

विशेष एपिसोड-1

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-पुरोहित गैंग का नया लीडर  'बाबू' बना है कुलपति का मौखिक ओएसडी, लैब टेक्नीशियन व अटेंडेंट संभाल रहे हैं वित्त विभाग का भुगतान काउंटरl

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जौनपुर/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l लगभग चार दशक पहले पूर्व मुख्यमन्त्री वीर बहादुर सिंह के नाम पर जनपद में स्थापित पूर्वांचल विश्विद्यालय  के अधीन पूर्वांचल के कई जिलों के हजारों कॉलेज संचालित होते थे, जो अब सिमटकर 600 के करीब रह गए हैंl अब तो यहां यूजीसी के मानक भी नहीं फालो होतेl यदि ऐसा होता तो छात्रों के शिकायतों की फेहरिस्त प्रदेश के राजभवन और कुलाधिपति- राज्यपाल तक न पहुंचतीl यहां हर शाख पे बैठे उल्लू (प्रतीकात्मक) योग्य लोगों का चयन तक नहीं होने देते हैंl पुस्तकालय में विषयों से सम्बन्धित किताबों के अभाव की शिकायत एक छात्रा ने की लेकिन उस मामले में उसी का मुंह बन्द कराने की कोशिश हुईl एक छात्र को इसी प्रकरण में गेस्ट फेकेल्टी बना दिया गया थाl इस बार उसे फेकेल्टी से हटा दिया गया तो उसने फ़िर दलाल पत्रकारों के जरिए इस मुद्दे को राजभवन तक पहुंचाने का परोक्ष दावा करके खलबली मचा दीl दरअसल इस प्रकरण में जिस कथित प्रोफेसर को दो साल पूर्व तक पुस्तकालय का अध्यक्ष बनाए रखा गया था उसने खुद और अपने पिता द्वारा लिखित व अन्य गैर सब्जेक्ट की पुस्तकों से लाइब्रेरी को सिलिंग फैन तक भर दियाl उसकी जांच वाकई राजभवन से आई थी लेकिन उसने अपने कथित विभिन्न प्रभावों से जांच अधिकारियों का मुंह बन्द करा दियाl उसकी डिग्री खुद भी संदेह के घेरे में हैl



पूर्वांचल विवि में अरसे से सबकुछ नियम के विपरीत चल रहा हैl यहां पहली परीक्षा का परिणाम आये बगैर दूसरी परीक्षा की स्कीम जारी कर दी जाती हैl इस साल तो अद्भुत तेजी दिखाई जा रही है, क्योंकि वर्तमान कुलपति का कार्यकाल अगस्त में समाप्त हो रहा है और पुरोहित गैंग इनके तीन साल के कार्यकाल में ही चौथा दीक्षांत समारोह मनाने की तैयारी में लगा हैl वित्तीय मामले में दीक्षांत समारोह में हुए खर्च का ऑडिट नहीं होता हैl शायद इसीलिए ये करिंदे चौका लगाने के फेर में हैंl नियम को धता करके गैर जरूरी भवनों के रेनोवेशन पर प्रति भवन पांच करोड़ का भुगतान भी पुरोहित गैंग करा लेता हैl वर्तमान में भी अधूरे भवन निर्माणाधीन हैं, कैसे और क्यों? इसका जवाब किसी के पास नहीं हैl


अगले महीने जुलाई में दीक्षांत की तैयारी जोरों पर है: अचानक तमाम गोल्ड मेडलिस्ट की लिस्ट भी बनेगीl इस विवि के अधीन कॉलेजों पर कम लेकिन विवि कैंपस के पीएचडी धारकों की संख्या सैकड़ों में दिखेगीl इनमें भी जन संचार एवं पत्रकारिता  विभाग के पीएचडी धारक तो अपना शोध सैटेलाइट या ए आई से कर रहे हैंl उनमें एक तो वाराणसी में होटल चला रहा हैl इससे पूर्व वह एक बन्द हुए अखबार में मुनीम थाl कई तो दिल्ली, मुंबई व अन्य शहरों में नौकरी कर रहे हैंl यहां के शिक्षक भी हवा में चंद्रायान बनाने का दावा करते हैंl इस विभाग का अध्यक्ष तो जुगाड़ से इतिहास में पीएचडी करके जनसंचार का प्रोफेसर ही नहीं बल्कि अध्यक्ष बना बैठा हैl प्रदेश की मीडिया को भी वह अपनी जेब में लेकर चलता हैl यहां की हर उलटबासी यानी गडबड़झाला का क्रमवार विवरण 'तहलका संवाद' सीरियल में मिलेगाl


प्रयागराज के एक विवि से खारिज शिक्षक पूर्वांचल विवि में बना प्रोफेसर: पिछले दिनों उस शिक्षक की नियुक्ति प्रोफेसर पद पर हुई जिसे प्रयागराज के एक विवि ने असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए भी अयोग्य करार देकर उनके आवेदन को ही खारिज कर दिया थाl उसी शिक्षक को पूर्वांचल विवि में केवल कोरम इंटरव्यू के जरिए रख लिया गयाl जबकि योग्यता रखने वाले  तमाम अभ्यर्थी इंतजार ही करते रह गएl इसके अयोग्य करार दिये जाने की कॉपी प्रमाण स्वरूप 'तहलका संवाद' के पास उपलब्ध हैl विस्तृत विवरण अगले एपिसोड में,,,,, l क्रमशः

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